Nepal Flood: नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बीच रायपुर के 5 दोस्त जिंदगी और मौत के बीच से सुरक्षित लौटे हैं। शनिवार को रायपुर पहुंचने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली। रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही पांचों ने जमीन पर माथा टेका और मातृभूमि की मिट्टी को सिर से लगाया। दोस्तों ने बताया कि उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे वे नेपाल से दूसरी जिंदगी लेकर लौटे हैं।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि चाय पीने के लिए लिया गया सिर्फ 10 से 15 मिनट का ब्रेक उनकी जिंदगी बचाने वाला साबित हुआ। अगर वे उस वक्त होटल पर नहीं रुकते और कुछ मिनट पहले आगे निकल जाते, तो शायद बाढ़ के तेज बहाव में फंस सकते थे।
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चाय के लिए रुके और सामने आ गया सैलाब
रायपुर के माना कैंप निवासी दिनेश सिंह ठाकुर, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, नारायण सेन और यतेंद्र प्रकाश 21 अगस्त को धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। वापसी के दौरान वे मुक्तिनाथ से पोखरा होते हुए लौट रहे थे। नारायण सेन और दिनेश ठाकुर ने बताया कि धड़िंग जिले के मलेखू कस्बे में सुबह करीब 9:30 बजे उन्हें चाय पीने का मन हुआ।
सड़क किनारे होटल दिखाई दिया तो उन्होंने गाड़ी रोक दी। चाय पीने में करीब 10 से 15 मिनट लग गए। इसी दौरान भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में पानी तेजी से बढ़ने लगा। थोड़ी ही देर में हालात बिगड़ गए और रास्ते बंद होने लगे। दोस्तों का कहना है कि अगर वे उस समय होटल पर नहीं रुकते तो शायद बाढ़ की चपेट में आ जाते।
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आंखों के सामने बहने लगे घर और वाहन
बाढ़ आने के बाद दोस्तों ने जो मंजर देखा, उससे वे बुरी तरह डर गए। उन्हें पता चला कि आगे का पुल भी पानी में बह गया है। त्रिशूली नदी का पानी बेहद तेज था और कई जगह सड़क तक पहुंच चुका था। दोस्तों ने बताया कि उनकी आंखों के सामने गाड़ियां, सामान और दूसरी चीजें पानी के साथ बह रही थीं।
कई जगह घरों को भी नुकसान पहुंचा। लोग अपने परिवार और सामान को बचाने के लिए सुरक्षित जगह तलाश रहे थे। चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। दोस्तों ने बताया कि उन्होंने नेपाल में बाढ़ का ऐसा रूप पहली बार देखा और उन पलों को वे कभी नहीं भूल पाएंगे।
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भारतीय होटल संचालक ने मुश्किल समय में की मदद
बाढ़ के कारण रास्ते बंद होने के बाद पांचों दोस्तों ने ऊंचाई वाले इलाके में शरण ली। जिस होटल में उन्होंने रुककर चाय पी थी, उसका संचालक भारतीय था। उसने मुश्किल समय में दोस्तों की मदद की और उन्हें खाना और सुरक्षित जगह उपलब्ध कराई। इसके बाद पांचों ने मलेखू की ऊंचाई वाली जगह पर समय बिताया।
एक रात उन्हें अपनी कार में ही गुजारनी पड़ी। दोस्तों के मुताबिक, उस समय सबसे बड़ी चिंता यह थी कि किसी तरह सुरक्षित जगह तक पहुंचा जाए। इस दौरान ड्राइवर अर्जुन ने भी सभी का हौसला बनाए रखा और रास्ता बंद होने के बाद वैकल्पिक रास्तों से गाड़ी निकालने की कोशिश की।
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पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद लौटे रायपुर
हालात कुछ बेहतर होने के बाद दोस्तों ने आगे का सफर शुरू किया। उन्होंने नेपाल में बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन भी किए और फिर रेलवे स्टेशन पहुंचे। इस दौरान नेपाल में तैनात महिला सुरक्षा कर्मियों ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। दोस्तों ने बताया कि रक्षाबंधन के बाद उनकी वापसी होनी थी और बहनों ने उन्हें पहले ही राखियां दे दी थीं।
सुरक्षा कर्मियों ने वही राखियां उनकी कलाई पर बांधीं। यह पल उनके लिए बेहद भावुक रहा। शनिवार दोपहर करीब 12:50 बजे पांचों दोस्त दुर्ग-नवतनवा एक्सप्रेस से रायपुर पहुंचे। परिवार के लोग स्टेशन पर लेने आना चाहते थे, लेकिन दोस्तों ने मना कर दिया। वे खुद घर जाकर परिवार से मिलना चाहते थे। रायपुर पहुंचकर उन्होंने कहा कि चाय के लिए लिया गया वह छोटा-सा ब्रेक उनके लिए जिंदगी का सबसे बड़ा संयोग बन गया।
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