पहली बार 3 मई को नीट का पेपर देने पर उत्तर कुंजी के अनुसार उसके 480 अंक आ रहे थे, 21 जून को हुए री-टेस्ट के बाद 16 जुलाई को जब परिणाम आया, तो उसके अंक घटकर महज 220 रह गए।
रोहतक की आरजू के परिवार से मिलते CJP के सदस्य।
- Published: 30 Jul 2026, 04:30 PM IST
- Last Updated: 30 Jul 2026, 04:30 PM IST
हरियाणा के रोहतक जिले में दोबारा कराई गई नीट परीक्षा (NEET Exam) के नतीजों में अचानक कम अंक होने से डिप्रेशन में आई एक होनहार छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। तब परिवार ने पुलिस कार्रवाई के बिना ही शव का दाह-संस्कार कर दिया था और कागजों में मौत की वजह दिल का दौरा दर्ज कराई थी। हालांकि, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के गुरुवार को घर पहुंचने पर अब इस पूरे दुखद घटनाक्रम का पर्दाफाश हुआ है।
यह दुखद घटना रोहतक के आंवल गांव की है, जहां डॉक्टर बनने का सपना देख रही छात्रा आरजू ने परीक्षा के नतीजों से आहत होकर 17 जुलाई को आत्महत्या कर ली थी।
री-नीट के नतीजों ने तोड़ा हौसला, 480 से सीधे 220 नंबर मिले
आरजू ने कलानौर के सरकारी स्कूल से 10वीं में 97 फीसदी और 12वीं में 80 फीसदी अंक हासिल किए थे। उनके भाई साहिल ने बताया कि आरजू ने 3 मई 2026 को पहली बार नीट की परीक्षा दी थी। उत्तर कुंजी (Answer Key) के अनुसार उसके 480 अंक बन रहे थे, लेकिन पर्चा लीक होने की वजह से वह परीक्षा रद्द कर दी गई।
इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा हुई। जब 16 जुलाई को इसका संशोधित परिणाम घोषित हुआ, तो आरजू के अंक घटकर महज 220 रह गए। इस भारी गिरावट को बर्दाश्त नहीं कर सकी और गहरे मानसिक तनाव में चली गई। अगले ही दिन 17 जुलाई को उसने घर के बाथरूम में फंदा लगाकर जान दे दी।
जंतर-मंतर पहुंचे परिजन
गहरे सदमे में डूबे परिजनों ने उस समय पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के अंतिम संस्कार कर दिया। मृत्यु प्रमाण पत्र में भी मौत का कारण 'हार्ट अटैक' लिखवाया गया।
मामले में मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुआ। वहां उन्होंने CJP के पदाधिकारियों से मुलाकात कर पूरा घटनाक्रम साझा किया। इसके बाद CJP कोर टीम के सदस्य सुधीर सांगवान के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल गुरुवार को आंवल गांव स्थित छात्रा के घर संवेदना व्यक्त करने पहुंचा।
हिसार में भी सामने आया था ऐसा मामला
CJP नेताओं ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और आर्थिक सहायता दिलाने का भरोसा जताया। सुधीर सांगवान ने कहा कि नीट जैसे इम्तिहानों के भारी तनाव के कारण विद्यार्थियों का इस तरह कदम उठाना केवल एक परिवार का नुकसान नहीं, बल्कि पूरे समाज और शैक्षणिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने परीक्षा के दबाव में जान गंवाने वाले छात्रों के परिजनों को आर्थिक मुआवजा देने का आश्वासन दिया है, जिसके चलते उनकी संस्था ऐसे सभी मामलों की जानकारी जुटा रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व हिसार के धाणी खान बहादुर गांव की 19 वर्षीय परीक्षार्थी सिमरन ने भी री-टेस्ट से ठीक पहले खौफनाक कदम उठाकर अपनी जान दे दी थी।