मोहाली की विशेष अदालत ने नशीले पदार्थ (NDPS) कानून के तहत दर्ज एक मामले में आरोपी सिंगर गुरिंदरपाल सिंह उर्फ वड्डा गरेवाल (निवासी कमोमजरा कलां, संगरूर) को आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों मे
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केस दर्ज करते समय सोहाना थाने की पुलिस की सारी कहानी अदालत में कमजोर पड़ गई। आरोपी गुरिंदर पाल सिंह और गायक एलि मांगट का करीबी रहा है। उसने आरोप लगा था। हालांकि उसने अदालत में बयान में कहा कि ‘रंधावा ब्रदर्स’ की शिकायत पर गायक एलि मांगट (हरकिरत सिंह मांगट) के खिलाफ 10 सितंबर 2019 को केस दर्ज हुआ था।
उसने एलि मांगट के समर्थन में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब पर कई वीडियो बनाकर अपलोड किए थे। स्थानीय पुलिस का मानना था कि आरोपी द्वारा अपलोड किए गए इन वीडियो और एलि मांगट के समर्थन के कारण ही पूरब प्रीमियम अपार्टमेंट्स के बाहर बड़ी संख्या में लोग और भीड़ इकट्ठा हुई थी।
इसी वजह से थाना सोहाना पुलिस उससे रंजिश रखती थी। आरोपी के अनुसार, पुलिस अधिकारियों ने इसी रंजिश के चलते उसके खिलाफ अफीम की झूठी बरामदगी दिखाकर यह मामला दर्ज किया था।
अब 7 प्वाइंट में जानिए थाने में पुलिस की कहानी कैसे पड़ी कमजोर
सचेत कब्जे का सबूत नहीं: आरोपी अस्पताल के कमरा नंबर 412 में भर्ती था, जहां दो बेड मौजूद थे और अफीम वाला बैग आरोपी के बेड के बजाय दूसरे बेड पर रखा हुआ था। पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि बैग के अंदर से आरोपी का कोई पहचान पत्र या निजी सामान नहीं मिला था।
सबूतों का अभाव और अन्य संभावना: जांच अधिकारी (SI हरजिंदर सिंह) ने माना कि इस बात की पूरी संभावना थी कि वह बैग किसी अन्य व्यक्ति का हो। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई सबूत भी नहीं था, जो आरोपी को उस बैग की बरामदगी से जोड़ सके।
अस्पताल रिकॉर्ड और गवाहों की अनदेखी: पुलिस ने अस्पताल के कर्मचारियों के बयान दर्ज नहीं किए और न ही विजिस्टर रजिस्टर की जांच की। इससे यह स्पष्ट हो सकता था कि कमरे में आरोपी के अलावा और कौन-कौन आया-जाया था।
पुलिस गवाह के बयानों में विरोधाभास: कार्यवाहक थाना प्रभारी (SI बरमा सिंह) ने अपने बयानों में बदलाव किया। पहले उन्होंने कहा था कि आरोपी को थाने में उनके सामने पेश किया गया था, लेकिन बाद में बयान बदलकर कहा कि केवल केस प्रॉपर्टी लाई गई थी।
कानूनी अनिवार्यताओं का उल्लंघन: मामले में NDPS अधिनियम की धारा 42 और धारा 57 के तहत निर्धारित अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया था। इसके अलावा, तलाशी के समय अस्पताल के किसी स्वतंत्र गवाह को भी शामिल नहीं किया गया।
सेवन का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं: नशीले पदार्थ के सेवन के आरोप को साबित करने के लिए पुलिस ने आरोपी के नमूने फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी नहीं भेजे थे। इसके अलावा, जिस डॉक्टर (डॉ. लवली मान) ने डोप टेस्ट रिपोर्ट तैयार की थी, उन्हें अदालत में गवाह के रूप में पेश ही नहीं किया गया।
शराब के ओवरडोज का पहलू: जांच अधिकारी ने स्वीकार किया कि जांच के दौरान यह बात भी सामने आई थी कि आरोपी को शराब के अत्यधिक सेवन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अब जानिए क्या था सारा मामला
15 अप्रैल 2020 को अस्पताल से मिली सूचना
15 अप्रैल 2020 को थाना सोहाना की पुलिस टीम को श्री हरकृष्ण अस्पताल, सोहाना से रुक्का मिला। इसमें बताया गया कि गुरिंदर पाल सिंह उर्फ वड्डा गरेवाल नशीले पदार्थ की ओवरडोज के कारण अस्पताल की चौथी मंजिल स्थित कमरा नंबर 412 में भर्ती है।
पुलिस पहुंची तो बेड पर मिला आरोपी
सूचना मिलने पर एसआई हरजिंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम अस्पताल पहुंची। टीम में एचसी बलदेव सिंह समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। कमरा नंबर 412 में आरोपी बेड पर लेटा मिला। पूछताछ में उसने अपनी पहचान गुरिंदर पाल सिंह उर्फ वड्डा गरेवाल के रूप में बताई।
बैग की तलाशी से पहले दिया धारा 50 का नोटिस
पुलिस को कमरे में रखे एक बैग में संदिग्ध नशीला पदार्थ होने का शक हुआ। जांच अधिकारी ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 50 के तहत उसके अधिकारों की जानकारी दी कि वह अपनी और बैग की तलाशी किसी मजिस्ट्रेट या राजपत्रित अधिकारी की मौजूदगी में करवा सकता है। आरोपी ने अस्पताल में भर्ती होने का हवाला देते हुए जांच अधिकारी पर भरोसा जताया। इसके बाद नोटिस और सहमति पत्र तैयार किए गए, जिन पर आरोपी के हस्ताक्षर करवाए गए।
बैग से 30 ग्राम अफीम बरामद होने का दावा
पुलिस के मुताबिक, बैग की तलाशी लेने पर पॉलीथिन में लिपटी 30 ग्राम अफीम बरामद हुई। इलेक्ट्रॉनिक तराजू से वजन करने के बाद अफीम का पार्सल बनाया गया और उस पर एसआई हरजिंदर सिंह ने 'HS' मार्क की सील लगाई। सील का नमूना अलग से तैयार किया गया। बैग और पार्सल को जब्ती मेमो के जरिए पुलिस ने कब्जे में ले लिया।
रुक्का भेजकर FIR दर्ज, आरोपी को किया गिरफ्तार
पुलिस ने सिपाही दर्शन सिंह के जरिए थाना सोहाना में रुक्का भेजकर FIR नंबर 145 दर्ज कराई। इसके बाद घटनास्थल का साइट प्लान तैयार किया गया। आरोपी का गिरफ्तारी मेमो और व्यक्तिगत तलाशी मेमो तैयार कर उसे मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।