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NCP का चुनाव प्लान संभालेंगे प्रशांत किशोर? बैठक के बाद घमासान, BJP की भी बढ़ी धड़कनें

August 8, 2026

प्रशांत किशोर और सुनेत्रा पवार की मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज है। NCP में तटकरे की कुर्सी पर सस्पेंस के बीच BJP भी असहज नजर आ रही है। जानिए इस पूरी सियासी उथल-पुथल की वजह।

बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज करने वाले चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के मुखिया प्रशांत किशोर अब महाराष्ट्र की राजनीति में भी सुर्खियां बटोर रहे हैं। उनकी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनेत्रा पवार से मुलाकात ने बड़ी सियासी हलचल मचा दी है। इस मुलाकात के बाद महायुति गठबंधन में शामिल सहयोगी भाजपा असहज है, तो वहीं खुद एनसीपी के भीतर दरारें साफ नजर आने लगी हैं।

तटकरे को हटाने की अटकलें और उनका पलटवार

गुरुवार को प्रशांत किशोर ने एनसीपी अध्यक्ष सुनेत्रा पवार और उनके बड़े बेटे व राज्यसभा सांसद पार्थ पवार से मुलाकात की। उनके दूसरे बेटे जय पवार भी इस बैठक में वर्चुअली जुड़े। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रशांत किशोर ने एनसीपी के लिए नया रोडमैप शेयर किया है और महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे को हटाने की सलाह दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीके का मानना है कि तटकरे प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर पर्याप्त काम नहीं कर रहे हैं।

हालांकि, रायगढ़ से लोकसभा सांसद सुनील तटकरे ने प्रशांत किशोर की नियुक्ति पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा, "मैं नहीं जानता कि क्या चर्चा हुई। हम प्रैक्टिकल लोग हैं और थ्योरी में विश्वास नहीं करते। मुझे रणनीतिकारों की जरूरत नहीं है क्योंकि मैं जमीन से जुड़ा आदमी हूं।"

तटकरे ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जो व्यक्ति खुद अपनी एक राजनीतिक पार्टी चला रहा हो, वह दूसरी पार्टी का रणनीतिकार कैसे हो सकता है? उन्होंने कहा कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व पर चलती है और अगर ऐसा कोई फैसला हुआ होता, तो उन्हें जरूर बताया जाता।

एनसीपी के भीतर विरोधाभास

पार्टी के भीतर मतभेद तब खुलकर सामने आ गए जब सुनेत्रा पवार के करीबी और महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने पुष्टि की कि प्रशांत किशोर उनके नए चुनाव रणनीतिकार हैं। हालांकि, उन्होंने तटकरे को हटाए जाने की बात को महज अफवाह बताया। भरणे ने कहा, "पीके हमारे चुनावी रणनीतिकार हैं, लेकिन उन्होंने तटकरे को हटाने जैसा कोई बयान नहीं दिया है। यह सिर्फ एक कोरी अटकलबाजी है।"

बीजेपी की टेंशन और नेताओं की नसीहत

प्रशांत किशोर लगातार बीजेपी के आलोचक रहे हैं और हाल ही में उनकी जन सुराज पार्टी ने बिहार के बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को हराया है। यही वजह है कि पीके की एनसीपी नेताओं से मुलाकात से बीजेपी असहज है।

बीजेपी नेता और राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने नसीहत देते हुए कहा, "उन्हें अपनी पार्टी में फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन कोई भी ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे संदेह पैदा हो या गठबंधन को नुकसान पहुंचे।" उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे व सुनेत्रा पवार से टकराव से बचने और मिलकर काम करने की अपील की।

वहीं, मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि उन्हें सहयोगी दल द्वारा प्रशांत किशोर को राजनीतिक सलाहकार नियुक्त किए जाने की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।

इस पूरे विवाद पर क्या बोले प्रशांत किशोर?

इस पूरे सियासी बवाल और नई भूमिका के दावों पर जब प्रशांत किशोर से सवाल किया गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। टेक्स्ट मैसेज के जरिए जवाब देते हुए पीके ने स्पष्ट किया, "यह पवार परिवार के साथ महज एक व्यक्तिगत मुलाकात थी, जो हमारे पारिवारिक मित्र हैं। इस मुलाकात का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं था।"

एनसीपी नेता भरणे का तर्क है कि महायुति गठबंधन का हिस्सा होते हुए भी वे एक अलग पार्टी हैं। रणनीतिकार नियुक्त करना उनका आंतरिक मामला है और अगर उनकी पार्टी मजबूत होती है, तो इसका सीधा फायदा गठबंधन को ही मिलेगा, इसलिए बीजेपी को इस फैसले का स्वागत करना चाहिए।