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चले थे इस्लामिक NATO बनाने, पहले टेस्ट में पाकिस्तान फेल; आसिम मुनीर का MBS को झटका

September 14, 2026

Sep 14, 2026 10:25 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ मक्का समझौता इसी तरह के संकट से निपटने के लिए किया था। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने सितंबर 2025 में ही आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए थे।

Pakistan Field Marshal Asim Munir failed first major test of Mecca Agreement

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर।

मक्का समझौते के पहले टेस्ट में ही पाकिस्तान फेल हो गया है। पाकिस्तानी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर सऊदी अरब के साथ खड़े होने के बजाय ईरान से संपर्क साधते दिखे। दरअसल, पिछले हफ्ते हूती विद्रोहियों ने मोखा और पेरिम द्वीप पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी अरब के लिए हालात मुश्किल हुए, लेकिन मुनीर ने पाकिस्तान की सेना को सीधे हूतियों के खिलाफ उतारने की जल्दबाजी नहीं दिखाई। इसी दौरान उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की। इससे संकेत मिल रहा है कि पाकिस्तान फिलहाल सऊदी अरब और ईरान, दोनों के साथ संतुलन बनाए रखना चाहता है।

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर मक्का समझौता इसी तरह के संकट से निपटने के लिए बनाया था। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने सितंबर 2025 में ही रणनीतिक आपसी रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अगस्त 2026 में इसे तीन देशों के मक्का समझौते के रूप में आगे बढ़ाया गया। इसका सचिवालय रियाद में है और पहले तीन साल की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास है। हालांकि, अब तक इस समझौते को लागू नहीं किया गया है।

पाकिस्तान का सऊदी अरब से गहरा आर्थिक संबंध

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि सऊदी अरब पर बिना उकसावे के हमला या यमन युद्ध का असर वहां तक पहुंचने पर समझौता लागू हो सकता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इसकी तुलना NATO से की है, जिसमें मदद मांगने वाले देश की जरूरत के हिसाब से सहायता दी जाती है। मीडिया में इसे ‘इस्लामिक नाटो’ भी कहा गया।

पाकिस्तान के सऊदी अरब से गहरे आर्थिक और सुरक्षा संबंध हैं। उसे सऊदी अरब और खाड़ी देशों से विदेशी मुद्रा, निवेश, ऊर्जा मदद और आर्थिक सहायता मिलती है। पाकिस्तान के करीब 16 जेएफ-17 लड़ाकू विमान, वायु रक्षा यूनिट्स और हजारों सैनिक पहले से सऊदी अरब में मौजूद हैं। लेकिन ईरान के खिलाफ सीधी सैन्य कार्रवाई पाकिस्तान के लिए बड़ी मुश्किल पैदा कर सकती है।

पाकिस्तान की ईरान के साथ लंबी और खुली सीमा

पाकिस्तान की ईरान के साथ लंबी और खुली सीमा है और उसके अपने सुरक्षा हित जुड़े हैं। इसके अलावा, हूतियों के खिलाफ लड़ाई में उतरने से ईरान और उसके सहयोगियों के साथ टकराव का खतरा बढ़ सकता है। पाकिस्तान में शिया आबादी भी बड़ी संख्या में है, इसलिए घरेलू स्तर पर विरोध की आशंका है। एक और वजह अमेरिका से पाकिस्तान के बढ़ते रिश्ते हैं। मुनीर पिछले एक साल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने संबंध मजबूत करने में जुटे हैं। बताया गया कि ट्रंप ने हूतियों के खिलाफ सऊदी अरब की मदद के लिए की गई अपील को 2 बार ठुकराया है। ऐसे में मुनीर ऐसा कदम उठाने से बच सकते हैं, जिससे वह अमेरिकी राष्ट्रपति की नीति के खिलाफ जाते दिखें।