Aug 14, 2026 06:14 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान
अध्यक्ष विकास सिंह ने कहा कि वह इस बात का समर्थन नहीं कर रहे हैं कि छात्रों ने चीफ जस्टिस के दीक्षांत समारोह में आने का विरोध न करने का जो फैसला लिया, वह सही था। लेकिन संविधान के तहत अपनी बात रखना उनका अधिकार है।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह और चीफ जस्टिस सूर्यकांत।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष विकास सिंह ने NALSAR विवाद पर बड़ी टिप्पणी की है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन इस तरह व्यवहार कर रहे हैं, जैसे बीसीआई उनकी निजी संपत्ति हो। उन्होंने कहा कि जब भी वह कोई आदेश, पत्र या निर्देश जारी करते हैं, तो उसमें यह तक स्पष्ट नहीं किया जाता कि ऐसा आदेश अधिनियम या नियमों की किस धारा या प्रावधान के तहत जारी किया जा रहा है। विकास सिंह ने कहा कि नालसार के खिलाफ पारित प्रस्ताव और आदेश पूरी तरह गैरकानूनी था। उन्होंने बताया कि कुछ लोग उनके पास भी आए थे और सुबह इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाने की तैयारी थी। एक रिट याचिका भी दायर की जानी थी और उन्हें पूरा भरोसा था कि सुप्रीम कोर्ट उस आदेश पर रोक लगा देता।
SCBA के अध्यक्ष के मुताबिक, शायद बीसीआई चेयरमैन को इसका अंदाजा हो गया था, इसलिए उन्होंने धीरे-धीरे अपना फैसला वापस लेना शुरू किया। पहले आदेश को आंशिक रूप से वापस लिया गया और बाद में नालसार ने यह विचार करने के लिए प्रस्ताव पारित किया कि क्या वह ऐसी जांच कर सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि बीसीआई चेयरमैन को यह समझना चाहिए कि वह पूरे कानूनी पेशे के नियामक के अध्यक्ष हैं और उन्हें युवाओं के लिए सही मानक स्थापित करने चाहिए। विकास सिंह ने यह भी कहा कि वह इस बात का समर्थन नहीं कर रहे हैं कि छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश के दीक्षांत समारोह में आने का विरोध न करने का जो फैसला लिया, वह सही था। लेकिन संविधान के तहत अपनी बात रखना उनका अधिकार है। वे गलत सलाह के कारण ऐसा कर सकते हैं, उनका फैसला गलत भी हो सकता है या वे अपने विरोध को उचित भी मान सकते हैं।
NALSAR यूनिवर्सिटी का क्या है पूरा विवाद
हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ में विवाद तब शुरू हुआ, जब करीब 450 छात्रों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निमंत्रण पर फिर से विचार करने की मांग की थी। इसके बाद 13 अगस्त को बार BCI के चेयरमैन ने 2026 में नालसर से कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले सभी छात्रों के राज्य बार काउंसिल में अधिवक्ता के रूप में रजिस्ट्रेशन पर रोक लगा दी और छात्रों व आयोजकों की पहचान कर रिपोर्ट मांगी। बाद में भारी विरोध के बीच बीसीआई ने यह रोक हटा दी और सभी छात्रों को पंजीकरण की इजाजत दे दी।
मामला यहीं नहीं रुका। NALSAR ने कहा कि बीसीआई की जांच संबंधी मांग को कार्यकारी परिषद के सामने रखा जाएगा और पहले यह देखा जाएगा कि ऐसी जांच करना संवैधानिक व विश्वविद्यालय के नियमों के तहत उचित है या नहीं। इसके बाद BCI चेयरमैन ने जांच भी वापस लेने की घोषणा कर दी। सुप्रीम कोर्ट में 14 अगस्त को मामले पर सुनवाई हुई, जहां चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बीसीआई की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्रों को अपनी राय व्यक्त करने और विरोध करने का अधिकार है। CJI सूर्यकांत ने कहा, 'यह मेरे और छात्रों के बीच बातचीत का मामला है। वे दखल देने वाले कौन होते हैं? यह पूरी तरह अनुचित है।'
