मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने 18 अगस्त को 2,400 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया। इसके साथ चालू वित्त वर्ष में सरकार की कुल उधारी 47,800 करोड़ रुपये हो गई है।
मोहन सरकार ने फिर लिया 2400 करोड़ का कर्ज
- Published: 21 Aug 2026, 09:50 AM IST
- Last Updated: 21 Aug 2026, 09:50 AM IST
भोपाल: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने एक बार फिर बाजार से 2,400 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। सरकार ने यह कर्ज अलग-अलग ब्याज दरों पर दो हिस्सों में उठाया है। इसके साथ ही चालू वित्त वर्ष में अब तक लिए गए कर्ज का आंकड़ा 47,800 करोड़ रुपये पहुंच गया है। वहीं, राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 36 हजार 514 करोड़ रुपये हो गया है।
सरकार ने 18 अगस्त को सिक्योरिटी की नीलामी के बाद 7.58 और 7.39 प्रतिशत की ब्याज दर पर दो कर्ज लिए। इनमें 1,400 करोड़ रुपये का कर्ज 12 साल के लिए और 1,000 करोड़ रुपये का कर्ज 8 साल के लिए लिया गया है। दोनों कर्ज पर ब्याज का भुगतान जनवरी और जुलाई में छमाही आधार पर किया जाएगा।
पांच महीने में लगातार बढ़ी उधारी
मध्य प्रदेश सरकार ने चालू वित्त वर्ष में लगातार बाजार से कर्ज जुटाया है। इससे पहले 4 अगस्त को सरकार ने 1,600 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपये के दो कर्ज लिए थे। यानी उस समय कुल 3,600 करोड़ रुपये बाजार से जुटाए गए थे।
इससे पहले 21 जुलाई को सरकार ने एक ही दिन में 24,400 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा कर्ज लिया था। उस दिन 20,000 करोड़, 1,000 करोड़, 1,400 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपये के चार अलग-अलग कर्ज उठाए गए थे।
इस तरह सरकार करीब हर 15 दिन में बाजार से कर्ज ले रही है। नई उधारी के साथ राज्य के वित्तीय दायित्व में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
लाड़ली बहना की किस्त से पहले लिया कर्ज
सरकार ने 19 अगस्त को मैहर में आयोजित कार्यक्रम में 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में लाड़ली बहना योजना की 2,148 करोड़ रुपये की किस्त ट्रांसफर की। इससे एक दिन पहले ही सरकार ने 2,400 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया था।
पांच लाख करोड़ से ज्यादा हुआ कुल कर्ज
31 मार्च 2026 तक मध्य प्रदेश सरकार पर कुल 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपये का कर्ज था। चालू वित्त वर्ष में अब तक 47,800 करोड़ रुपये की नई उधारी के बाद यह आंकड़ा बढ़कर 5 लाख 36 हजार 514 करोड़ रुपये हो गया है।
लगातार बढ़ते कर्ज के बीच सरकार के सामने विकास योजनाओं, कर्मचारियों के खर्च और सामाजिक योजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की चुनौती भी बनी हुई है। वहीं, सरकार का जोर विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने पर है।