MP Land Mutation:मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में जमीन के मालिक (land owner) का नाम सरकारी भूमि रिकॉर्ड (Government Land Records ) में बदलने की प्रक्रिया को नामांतरण (Mutation) कहते हैं। जमीन खरीदने, विरासत में मिलने या दान के जरिए संपत्ति मिलने पर नामांतरण कराया जा सकता है। इसके बाद सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है।
नामांतरण कब कराना पड़ता है?
जमीन की रजिस्ट्री (Land Registry) कराने के बाद, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद वारिसों के नाम जमीन दर्ज कराने, परिवार में बंटवारे या दानपत्र के जरिए जमीन मिलने पर नामांतरण कराया जाता है। खेती की जमीन हो या दूसरी संपत्ति, राजस्व रिकॉर्ड में सही नाम दर्ज होना जरूरी है।
नामांतरण के लिए कौन-से दस्तावेज चाहिए?
नामांतरण (Land Mutation) के लिए जमीन से जुड़े दस्तावेज और नए मालिक की पहचान जरूरी होती है। इसमें खसरा (Khasra), जमीन की रजिस्ट्री (Registry Document), आधार कार्ड, पते का प्रमाण और जमीन मिलने से जुड़े दस्तावेज मांगे जा सकते हैं। विरासत के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र और वारिसों से जुड़े दस्तावेज भी जरूरी हो सकते हैं।
नामांतरण के लिए आवेदन कैसे करें?
जमीन मालिक मध्य प्रदेश भूलेख (MP Bhulekh) या राजस्व केस मैनेजमेंट सिस्टम (RCMS) के जरिए नामांतरण की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। इसके लिए जमीन और आवेदक की जानकारी भरकर जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। आवेदन के बाद राजस्व अधिकारी रिकॉर्ड की जांच करते हैं। जरूरत पड़ने पर संबंधित पक्षों से आपत्ति भी मांगी जा सकती है।
नामांतरण की फीस कितनी है?
नामांतरण की फीस जमीन के मामले और लागू सरकारी नियमों के अनुसार होती है। ऑनलाइन आवेदन या लोक सेवा केंद्र के जरिए प्रक्रिया पूरी करते समय लागू सरकारी शुल्क और सेवा शुल्क की जानकारी मिलती है। इसलिए आवेदन करने से पहले शुल्क की जानकारी जरूर जांच लें।
नामांतरण में कितना समय लगता है?
नामांतरण में लगने वाला समय आवेदन के प्रकार, दस्तावेजों की जांच और किसी आपत्ति या विवाद पर निर्भर करता है। मध्य प्रदेश में रजिस्ट्री वाली जमीन के कुछ मामलों में साइबर तहसील के जरिए फेसलेस नामांतरण की सुविधा भी उपलब्ध है। विवाद होने पर प्रक्रिया में ज्यादा समय लग सकता है।
नामांतरण का स्टेटस कैसे चेक करें?
आवेदन जमा करने के बाद नामांतरण की स्थिति (Mutation Status) जानने के लिए RCMS पोर्टल https://rcms.mp.gov.in/citizen/ पर संबंधित प्रकरण की जानकारी देख सकते हैं। नामांतरण पूरा होने के बाद खसरा और बी-1 (B-1 Khasra Record) में दर्ज जमीन के विवरण की जांच करें, ताकि नए मालिक का नाम सही दर्ज हुआ है या नहीं, यह पता चल सके।
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