Monsoon Health Tips: बारिश के सीजन में इम्यूनटी कमजोर हो जाती है। ऐसे में सर्दी-जुकाम का रिस्क बढ़ जाता है। देसी काढ़ा इस परेशानी से निजात दिलाने में मददगार होता है।
बारिश में सर्दी-जुकाम से बचने का देसी काढ़ा।
- Published: 16 Jul 2026, 03:26 PM IST
- Last Updated: 16 Jul 2026, 03:26 PM IST
Monsoon Health Tips: बारिश का मौसम अपने साथ ठंडी हवाएं और सुकून लेकर आता है, लेकिन यही मौसम सर्दी-जुकाम, गले में खराश और वायरल संक्रमण का खतरा भी बढ़ा देता है। तापमान में बदलाव और नमी के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ सकती है। ऐसे में अगर समय रहते खानपान और घरेलू उपायों पर ध्यान दिया जाए तो मौसमी बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है।
इसी कड़ी में आयुर्वेद में बताए गए देसी काढ़े का सेवन एक कारगर विकल्प माना जाता है। अदरक, तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी और लौंग जैसी प्राकृतिक चीजों से तैयार यह काढ़ा शरीर को गर्माहट देने के साथ इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है। हालांकि किसी भी घरेलू नुस्खे को इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहें या तेज बुखार हो तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
क्यों फायदेमंद है देसी काढ़ा?
आयुर्वेदिक मसालों और औषधीय पौधों से तैयार काढ़ा शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक गुण गले की खराश, हल्की खांसी और मौसमी संक्रमण के जोखिम को कम करने में सहायक माने जाते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन बारिश के मौसम में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
अदरक
अदरक में मौजूद जिंजरॉल प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। यह गले की खराश कम करने, बलगम को ढीला करने और शरीर को गर्म रखने में मदद करता है। काढ़े में ताजा अदरक डालने से इसका स्वाद और प्रभाव दोनों बढ़ जाते हैं।
तुलसी की पत्तियां
तुलसी को आयुर्वेद में औषधीय पौधा माना गया है। इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व इम्यूनिटी को सपोर्ट करने और श्वसन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। बारिश के मौसम में तुलसी वाला काढ़ा गले को आराम पहुंचाने और संक्रमण के खतरे को कम करने में उपयोगी माना जाता है।
काली मिर्च
काली मिर्च में पाया जाने वाला पाइपरीन शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह गले में जमा कफ को कम करने और शरीर को गर्म रखने में सहायक हो सकती है। काढ़े में 4-5 दाने काली मिर्च डालना पर्याप्त रहता है।
दालचीनी
दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। इसका हल्का मीठा स्वाद काढ़े को स्वादिष्ट बनाता है और शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करता है। यह मौसमी संक्रमण से बचाव में भी सहायक मानी जाती है।
लौंग
लौंग में मौजूद यूजेनॉल प्राकृतिक एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के लिए जाना जाता है। यह गले की खराश और हल्की खांसी में राहत पहुंचाने में मदद कर सकता है। काढ़े में 2-3 लौंग डालने से इसका औषधीय प्रभाव बढ़ जाता है।
काढ़ा बनाने का आसान तरीका
एक बर्तन में 2 कप पानी लें। इसमें 1 इंच कद्दूकस किया हुआ अदरक, 7-8 तुलसी की पत्तियां, 4-5 काली मिर्च, 1 छोटा दालचीनी का टुकड़ा और 2-3 लौंग डालें। इसे तब तक उबालें जब तक पानी आधा न रह जाए। छानकर गुनगुना पिएं। स्वाद के लिए हल्का शहद केवल तब मिलाएं जब काढ़ा थोड़ा ठंडा हो जाए।
ध्यान रखें ये बातें
- दिन में 1-2 बार से अधिक काढ़े का सेवन न करें।
- गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे या गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
- तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या लगातार खांसी होने पर घरेलू नुस्खों पर निर्भर न रहें और चिकित्सकीय सलाह लें।
(Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई सामग्री सिर्फ जानकारी के लिए है। हरिभूमि इनकी पुष्टि नहीं करता है। किसी भी सलाह या सुझाव को अमल में लेने से पहले किसी विशेषज्ञ/डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।)
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लेखक: (कीर्ति)