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थलपति विजय ने याद दिलाया MISA, डीएमके विधायकों का विधानसभा में हंगामा; बुलाने पड़े मार्शल

September 8, 2026

Sep 08, 2026 11:15 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

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विजय थलपति के MISA ऐक्ट को लेकर दिए गए बयान पर भड़के डीएमके विधायकों ने सदन में जमकर हंगामा किया। वे स्पीकर की चेयर के पास तक पहुंच गए। इसके बाद मार्शल बुलाकर उन्हें बाहर निकलवाया गया।

तमिलनाडु विधानसभा में विपक्षी DMK ने मुख्यमंत्री जोसेफ सी. विजय के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने एमके स्टालिन के शासन के दौरान कथित भ्रष्टाचार के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दस्तावेजों का हवाला दिया था। विधानसभा में डीएमके विधायकों ने जमकर हंगमा किया और स्पीकर के पास पहुंच गए। डीएमके विधायक स्पीकर को घेरकर हंगामा करते रहे।

सीएम विजय बोले- सब जानते हैं MISA ऐक्ट कैसे इस्तेमाल होता था

डीएमके के चीफ विप ईवी वेलू ने सीएम विजय के मीसा (आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम) पर दिए गए बयान को लेकर आपत्ति जताई थी। डीएमके विधायक उनके साथ खड़े हो गए और हंगामा करने लगे। उनकी मांग थी कि स्पीकर विजय की टिप्पणी को कार्यवाही से हटवा दें। इसके बाद स्पीकर ने मार्शल बुलाकर डीएमके विधायकों को सदन के बाहर निकलवा दिया। सीएम विजय ने कहा कि सभी जानते हैं कि पहले की सरकार में मीसा ऐक्ट का कैसे इस्तेमाल किया जाता था।

सीएम विजय ने टास्मैक में हुए भ्रष्टाचार को लेकर डीएमकी की पूर्ववर्ती सरकार को निशाने पर लयि था। उन्होंने कहा कि 2021 से 2025 तक राज्य में एक गिरोह चल रहा था जिसे करूर गिरोह कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जाता था और फिर अवैध पैसों का लेनदेन होता था। यह विभाग सेंथिल बालाजी के पास था। उन्होंने कहा कि सरकारी नियमों की अनदेखी की गई।

सीएम विजय ने कहा कि करूर और कोयंबटूर में शराब की खूब कालाबाजारी चलतीथी। बिना किसी तय कीमत के शराब बेची जाती थी और बार मालिकों से जमकर उगाही होती थी। उन्होंने कहा कि स्टालिन की सरकार में टेंडर में भी गड़बड़ी की जाती थी। उन्होंने कहा कि जिस तरह से 1977 में एणजी रामचंद्रन और 1983 में एनटी रामा राव की जीत हुई थी उसी तरह चुनाव में तमिलगा वेत्री कजगम भी जीती है। यह जीत मेहनत की जीत है। विजय ने कहा, भगवान, प्रकृति और इस प्रदेश की जनता हमारे साथ है। ऐसे में जांच हुई तो विपक्ष का कोई दांव नहीं चलेगा।

ईडी ने दर्ज किया है केस

ईडी ने सरकारी निविदाओं में बड़े पैमाने पर कथित हेरफेर और रिश्वत वसूली से जुड़े 1,020 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामले में पूर्व मंत्री के. एन. नेहरू को ''मुख्य आरोपी'' बनाते हुए उनके तथा 12 अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

एफआईआर में डीएमके नेता नेता नेहरू के भाइयों के साथ-साथ पार्टी के दो पूर्व विधायकों एस. सुदर्शनम (ए10) और जे. जे. एबेनेजर (ए11) को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर ठेकेदारों के नाम की सिफारिश करने तथा निविदाओं से जुड़ी जानकारी और कथित रिश्वत की रकम का ब्योरा साझा करने का आरोप है। डीवीएसी के दस्तावेज में दावा किया गया है कि नेहरू ने वरिष्ठ नौकरशाहों तक पहुंच उपलब्ध कराई और निविदाएं आवंटित करने की प्रक्रिया को ''प्रभावित'' किया।