घरेलू वायदा बाजार (MCX) पर हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव के चलते कीमती धातुओं के तेवर एक बार फिर गरम हो गए हैं। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर शुरुआती कारोबार के दौरान सोना ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम के आंकड़े को पार कर गई है। वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच सर्राफा बाजार में निवेशकों की नजर लगातार नए आंकड़ों पर बनी हुई है।
MCX पर सोना और चांदी के ताजा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोमवार सुबह के सत्र में कारोबार की शुरुआत होते ही कीमती धातुओं में खरीदारी का दौर देखने को मिला। सुबह 9:15 बजे तक अक्टूबर एक्सपायरी वाला सोना 0.37 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,55,079 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर ट्रेड कर रहा था। वहीं दूसरी ओर, सितंबर वायदा चांदी में और भी अधिक मजबूती दर्ज की गई और यह 0.74 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,37,678 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। शुरुआती कारोबार में दोनों ही बहुमूल्य धातुओं में करीब एक फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है।
डॉलर की कमजोरी और फेडरल रिजर्व की नीतियों का असर
सोने और चांदी की कीमतों में आई इस तेजी के पीछे मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर का कमजोर होना और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें शामिल हैं। आम तौर पर डॉलर के कमजोर होने पर वैश्विक बाजार में सोने की मांग बढ़ जाती है। हालांकि, बाजार की निगाहें अब आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकी हुई हैं। फेडरल रिजर्व की महंगाई मापने वाली प्रमुख 'PCE प्राइस इंडेक्स' रिपोर्ट आगामी 26 अगस्त को जारी होनी है, जो ब्याज दरों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। इसके अलावा जुलाई के महीने-दर-महीने और सालाना सीपीआई (CPI) के आंकड़े भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रहे हैं।
कच्चा तेल और अमेरिका-ईरान तनाव बना चुनौती
एक तरफ जहां डॉलर की नरमी सोने को समर्थन दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। महंगे कच्चे तेल से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है, जिससे फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव ने भी अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। ईरान के अधिकारियों द्वारा इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण और सप्लाई को लेकर दिए गए बयानों ने तेल और सर्राफा बाजार दोनों की हलचल को तेज कर दिया है।