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दिमाग की नसों में ब्लीडिंग,बिना चीरा लगाए ब्रेन का ऑपरेशन: कोटा के MBS अस्पताल में डॉक्टर्स ने बचाई जान; मरीज का फ्री में हुआ इलाज - Kota News

October 19, 2026

कोटा3 घंटे पहले

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कोटा के एमबीएस अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है। दिमाग की झिल्लियों के बीच खून का रिसाव होने से मरीज की जान पर खतरा बन गया था। ऐसे में MBS अस्पताल में डॉक्टरों ने बिना चीरफाड़ किए ऑपरेशन कर मरीज की जान बचाई।

खास बात यह रही कि मरीज का इलाज निशुल्क किया गया। डॉक्टर्स ने दादाबाड़ी उड़िया बस्ती निवासी 51 साल के दीपक विश्वास को एक गंभीर और जानलेवा स्थिति से उबारकर उसे नया जीवन दिया है।

दीपक विश्वास को 11 अक्टूबर को तेज सिरदर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत पर एमबीएस अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था।

दीपक विश्वास को 11 अक्टूबर को तेज सिरदर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत पर एमबीएस अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था।

दरअसल, 11 अक्टूबर को मरीज दीपक विश्वास को तेज सिरदर्द, उल्टी और चक्कर आने की शिकायत पर एमबीएस अस्पताल के मेडिसिन विभाग में भर्ती कराया गया था। जहां दिमाग की नसों की जांच करने पर पता चला कि उनकी मस्तिष्क की नस में गुब्बारे जैसी गांठ (बाइलोब्ड एन्यूरिज़्म) बन गई थी, जिससे दिमाग की झिल्लियों के बीच खून का रिसाव (सब-अरैक्नॉइड हैमरेज) हो रहा था। यह एक बेहद नाजुक और जानलेवा स्थिति थी।

दिमाग की झिल्लियों के बीच खून का रिसाव (सब-अरैक्नॉइड हैमरेज) हो रहा था। यह एक बेहद नाजुक और जानलेवा स्थिति थी।

दिमाग की झिल्लियों के बीच खून का रिसाव (सब-अरैक्नॉइड हैमरेज) हो रहा था। यह एक बेहद नाजुक और जानलेवा स्थिति थी।

गंभीरता को देखते हुए 14 अक्टूबर को मरीज को न्यूरोसर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एस.एन. गौतम की देखरेख में शिफ्ट किया गया और तुरंत न्यूरो आईसीयू में रखा गया।

डॉक्टरों ने आधुनिक और सुरक्षित एंडोवैस्कुलर कोइलिंग पद्धति से इलाज करने का फैसला लिया।

डॉक्टरों ने आधुनिक और सुरक्षित एंडोवैस्कुलर कोइलिंग पद्धति से इलाज करने का फैसला लिया।

बिना चीर-फाड़ के आधुनिक तकनीक से हुआ ऑपरेशन

परिजनों की सहमति के बाद डॉक्टरों ने आधुनिक और सुरक्षित एंडोवैस्कुलर कोइलिंग पद्धति से इलाज करने का फैसला लिया। 15 अक्टूबर को जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति अब पूरी तरह स्थिर है और वे न्यूरो आईसीयू में डॉक्टरों की निगरानी में हैं।

निशुल्क हुआ पूरा इलाज

मरीज के परिजनों ने डॉक्टरों और पूरे मेडिकल स्टाफ की मुस्तैदी और देखभाल के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया। उल्लेखनीय है कि इस पूरे जटिल और महंगे इलाज का मरीज को एक भी पैसा नहीं देना पड़ा, यह संपूर्ण इलाज पूरी तरह निशुल्क किया गया।

क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि

पहले इस प्रकार के जटिल ब्रेन ऑपरेशनों और कोइलिंग प्रक्रियाओं के लिए मरीजों को दिल्ली, जयपुर या अहमदाबाद जैसे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था, जिससे भारी आर्थिक बोझ और समय की बर्बादी होती थी। अब एमबीएस अस्पताल का न्यूरोसर्जरी विभाग ऐसे जटिल ऑपरेशन नियमित रूप से कर रहा है। इससे कोटा संभाग के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के मरीजों को भी घर बैठे ही यह जीवनरक्षक सुविधा सरकारी अस्पताल में मिल रही है।

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