Published: Monday, August 24, 2026, 22:06 [IST]
Mamata Banerjee News: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों पर सोमवार (24 अगस्त)को बड़ा बयान दिया। लगातार TMC में बगावत के बीच फेसबुक लाइव आकर ममता ने मन की बात कही। उन्होंने साफ कहा कि वह राजनीति नहीं छोड़ने जा रही हैं। ममता ने कहा कि जब तक भाजपा को राजनीतिक रूप से हाशिए पर नहीं पहुंचा देतीं, तब तक वह रुकने वाली नहीं हैं।
फेसबुक लाइव के जरिए जनता से संवाद के दौरान भाजपा पर निशाना साधने के साथ-साथ जनगणना, NRC, महिला कल्याण योजनाओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी अपनी बात रखी। आइए जानते हैं कि क्या-क्या कहा?
Mamata Banerjee Retire News: 'राजनीति से संन्यास नहीं लूंगी'
ममता बनर्जी ने अपने फेसबुक लाइव में राजनीति से संन्यास लेने की चर्चाओं को खारिज करते हुए कहा कि वह अभी सक्रिय राजनीति से दूर नहीं होने वाली हैं। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों ने कुछ ही महीनों में भाजपा का 'असली चेहरा' देख लिया है। ममता ने संकेत दिया कि उनकी लड़ाई भाजपा के खिलाफ आगे भी जारी रहेगी। उनके इस बयान को TMC में जारी आंतरिक राजनीतिक खींचतान के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
Mamata Banerjee Facebook Live: जनगणना को NRC से जोड़कर ममता का बड़ा आरोप
ममता बनर्जी ने जनगणना की प्रक्रिया को लेकर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जनगणना के जरिए भविष्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC लागू करने की जमीन तैयार की जा सकती है। NRC का उद्देश्य किसी क्षेत्र में रहने वाले वैध भारतीय नागरिकों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना है। हालांकि, देशभर में NRC लागू करने की प्रक्रिया फिलहाल शुरू नहीं हुई है। ममता का आरोप है कि इस तरह की प्रक्रिया को राजनीतिक दलों से पर्याप्त चर्चा किए बिना आगे बढ़ाया जा रहा है।
SIR के बाद क्यों बढ़ी NRC की आशंका?
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है। TMC का आरोप रहा है कि मतदाता सूची की जांच के दौरान दस्तावेजों और पात्रता की पड़ताल भविष्य में नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़ सकती है। ममता बनर्जी इससे पहले भी कई बार SIR और NRC को एक-दूसरे से जोड़कर केंद्र सरकार पर निशाना साध चुकी हैं। हालांकि, SIR और NRC दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। SIR का उद्देश्य मतदाता सूची का पुनरीक्षण है, जबकि NRC नागरिकता से संबंधित रजिस्टर की प्रक्रिया है।
क्या पूरे देश में NRC लागू है?
देशभर में NRC फिलहाल लागू नहीं है। असम में NRC की एक विशेष प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसका आधार असम समझौते के तहत 24 मार्च 1971 की कटऑफ तारीख से पहले राज्य में मौजूद नागरिकों और उनके पूर्वजों से जुड़े दस्तावेज थे। असम की अंतिम NRC सूची अगस्त 2019 में प्रकाशित हुई थी। इसमें करीब 19.06 लाख लोग सूची में शामिल नहीं हो पाए थे। हालांकि, NRC से बाहर रह जाना अपने आप किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित नहीं करता। ऐसे मामलों में आगे कानूनी प्रक्रिया का प्रावधान है।
महिलाओं की योजनाओं पर भी BJP को घेरा
ममता बनर्जी ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने वाली योजनाओं को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों में महिलाएं अन्नपूर्णा भंडार की आर्थिक सहायता मिलने में देरी को लेकर प्रदर्शन कर रही हैं। ममता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लाभार्थियों की संख्या कम करने के लिए पात्रता संबंधी नियमों का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से लक्ष्मी भंडार योजना शुरू की थी।