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Mahant Swami Maharaj: कौन हैं BAPS गुरु? Eiffel Tower विवाद में क्यों घिरे?

September 8, 2026

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BAPS Guru Paris Visit: एफ़िल टॉवर क्यों करना पड़ा बंद?

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BAPS Guru Paris Visit: एफ़िल टॉवर क्यों करना पड़ा बंद?

Eiffel Tower Controversy: एफ़िल टॉवर ने अपने सौ से भी ज़्यादा सालों के इतिहास में कई विश्व युद्ध, राजनीतिक उथल-पुथल और पर्यटकों के हुजूम देखे हैं। लेकिन इस सितंबर में पेरिस की यह ऐतिहासिक इमारत एक अजीबोगरीब विवाद की वजह से अचानक बंद हो गई। विवाद इस बात को लेकर था कि क्या टॉवर पर तैनात महिला कर्मचारियों को वहाँ से हटाना सही था ताकि भारत से आए एक हिंदू संत गुजर सकें। इस पूरे विवाद के केंद्र में बिना किसी तामझाम या बयानबाजी के केसरिया वस्त्र पहने 92 साल के एक साधु खड़े थे-महंत स्वामी महाराज। वे दुनिया भर में फैले स्वामीनारायण संप्रदाय के सबसे बड़े संगठनों में से एक BAPS के आध्यात्मिक प्रमुख हैं। आखिर वह कौन हैं और उनकी धार्मिक परंपरा क्या है?

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Mahant Swami Maharaj: कौन हैं BAPS के आध्यात्मिक गुरु?

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Mahant Swami Maharaj: कौन हैं BAPS के आध्यात्मिक गुरु?

महंत स्वामी महाराज का जन्म 1933 में जबलपुर में विनू पटेल के रूप में हुआ था। वह BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के छठे और मौजूदा आध्यात्मिक गुरु हैं। उन्होंने 1961 में साधु जीवन अपनाया और संन्यासी परंपरा में दीक्षित हुए। इसके बाद दशकों तक वह BAPS की धार्मिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़े रहे।

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क्या है BAPS, कहां और कितना है इसका प्रभाव?

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क्या है BAPS, कहां और कितना है इसका प्रभाव?

2016 में प्रमुख स्वामी महाराज के निधन के बाद महंत स्वामी महाराज ने संगठन के आध्यात्मिक नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। आज BAPS का प्रभाव भारत तक सीमित नहीं है। संगठन दुनिया के कई देशों में मंदिरों और धार्मिक केंद्रों के जरिए सक्रिय है। अबू धाबी और न्यू जर्सी जैसे स्थानों में बने भव्य हिंदू मंदिरों ने भी BAPS को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है। BAPS के अनुयायियों के लिए महंत स्वामी महाराज सिर्फ संगठन के प्रमुख नहीं हैं। उन्हें आध्यात्मिक मार्गदर्शक और गुरु के रूप में देखा जाता है।

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Eiffel Tower Controversy: पेरिस में आखिर हुआ क्या?

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Eiffel Tower Controversy: पेरिस में आखिर हुआ क्या?

विवाद की शुरुआत सितंबर की शुरुआत में हुई। फ्रांस में BAPS के एक बड़े धार्मिक आयोजन के बाद संगठन से जुड़े करीब 100 लोगों का एक दल एफिल टॉवर के निजी दौरे पर पहुंचा था। BAPS ने फ्रांस में अपना पहला पारंपरिक हिंदू पत्थर का मंदिर स्थापित किया है। इसी आयोजन से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान यह प्रतिनिधिमंडल एफिल टॉवर पहुंचा।

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आखिर हुआ हुआ था?

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आखिर हुआ हुआ था?

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को कुछ जगहों से हटने के निर्देश दिए गए। कुछ जगहों पर पुरुष कर्मचारियों ने उनकी जगह ली। कर्मचारियों ने इसे लैंगिक भेदभाव से जोड़ते हुए विरोध किया। एफिल टॉवर के कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें ऐसी पेशेवर परिस्थितियों में काम करने के लिए कहा गया, जिसमें महिला कर्मचारियों को सिर्फ उनके लिंग की वजह से पीछे किया गया। इसके बाद कर्मचारियों के विरोध और वॉकआउट के कारण 7 सितंबर को एफिल टॉवर बंद करना पड़ा।

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BAPS का क्या कहना है?

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BAPS का क्या कहना है?

इस विवाद में BAPS ने अपना पक्ष भी रखा है। संगठन का कहना है कि इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल की वजह से एफिल टॉवर प्रबंधन के साथ मिलकर दौरे का समय तय किया गया था, ताकि आम पर्यटकों को कम से कम परेशानी हो। BAPS ने कहा कि उसे ऐसी किसी घटना की जानकारी नहीं थी जिसमें महिला कर्मचारियों को अपनी जगह छोड़ने के लिए कहा गया हो या किसी व्यक्ति को एफिल टॉवर में प्रवेश से रोका गया हो। हालांकि, संगठन ने पूरे विवाद पर खेद जताया और किसी भी तरह की तकलीफ या असुविधा के लिए माफी मांगी। यानी विवाद का एक पक्ष कर्मचारियों और यूनियन के आरोप हैं, जबकि दूसरा पक्ष BAPS का स्पष्टीकरण है। पेरिस प्रशासन ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

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Mahant Swami Maharaj Religion: महिलाओं से दूरी का क्या है नियम?

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Mahant Swami Maharaj Religion: महिलाओं से दूरी का क्या है नियम?

इस विवाद की जड़ BAPS से जुड़ी साधु परंपरा के एक धार्मिक नियम में बताई जा रही है। स्वामीनारायण साधु परंपरा में साधुओं के लिए ब्रह्मचर्य का कड़ा पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके तहत साधु महिलाओं से बातचीत, शारीरिक संपर्क और व्यक्तिगत मेल-जोल से दूरी रखते हैं। BAPS का कहना है कि यह महिलाओं के प्रति किसी नकारात्मक सोच का मामला नहीं है, बल्कि साधु के व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुशासन और धार्मिक संकल्प का हिस्सा है। संगठन ने यह भी रेखांकित किया है कि उसके धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

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France Equality Row: आस्था बनाम लैंगिक समानता

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France Equality Row: आस्था बनाम लैंगिक समानता

एफिल टॉवर विवाद ने फ्रांस में धार्मिक स्वतंत्रता और लैंगिक समानता के बीच संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है। फ्रांस में सार्वजनिक जीवन में महिला-पुरुष समानता को बेहद महत्वपूर्ण मूल्य माना जाता है। फ्रांसीसी अधिकारियों और नेताओं ने कहा कि धार्मिक या सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान अपनी जगह है, लेकिन सार्वजनिक संस्थानों में समानता के सिद्धांत से समझौता नहीं किया जा सकता। पेरिस के मेयर ने मामले की जल्द जांच कराने की बात कही।

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BAPS के लिए क्यों अहम है यह विवाद?

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BAPS के लिए क्यों अहम है यह विवाद?

BAPS पिछले कुछ वर्षों में भारत से बाहर अपने मंदिरों और धार्मिक गतिविधियों के कारण तेजी से वैश्विक पहचान बना चुका है। ऐसे में एफिल टॉवर जैसी विश्व प्रसिद्ध जगह से जुड़ा विवाद संगठन के लिए निश्चित तौर पर संवेदनशील मामला है। एक तरफ संगठन अपनी धार्मिक परंपराओं और साधु मर्यादाओं का पालन करने की बात करता है। दूसरी तरफ जिस देश में कार्यक्रम हो रहा है, वहां के सार्वजनिक संस्थानों के अपने नियम और सामाजिक मूल्य हैं। पेरिस की घटना इसी टकराव को सामने लाती है।

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