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Lalbaugcha Raja: लालबागचा राजा को कौन-कौन सी चीजें चढ़ाई जाती हैं? जानें सबकुछ

September 12, 2026

Lalbaugcha Raja: लालबागचा राजा को कौन-कौन सी चीजें चढ़ाई जाती हैं? जानें सबकुछ

लालबागचा राजा 2026Image Credit source: PTI

Ganesh Chaturthi 2026: दक्षिण मुंबई के परेल इलाके में सजने वाला लालबागचा राजा का दरबार केवल मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के गणेश भक्तों की आस्था का केंद्र है. इन्हें नवसाचा गणपति कहा जाता है, जिसका मराठी में अर्थ होता है मन्नत पूरी करने वाले बप्पा. हर साल गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक 10 दिनों में यहां आम श्रद्धालुओं से लेकर देश के बड़े उद्योगपति, राजनेता और बॉलीवुड सितारे बप्पा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, साल 2026 में गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा. आइए गणेश उत्सव के खास मौके पर जानते हैं कि भक्तगण लालबागचा राजा के चरणों में कौन-कौन सी चीजें अर्पित करते हैं.

लालबागचा राजा को भक्त क्या-क्या चढ़ाते हैं?

लालबागचा राजा के दर्शन के दौरान भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार अलग-अलग चीजें अर्पित करते हैं. गणपति पूजा में आम तौर पर दूर्वा, फूल, लाल सिंदूर, मोदक, फल, नारियल, अक्षत और मिठाई चढ़ाने की परंपरा है. गणेश जी को मोदक का भोग विशेष रूप से प्रिय माना जाता है. लेकिन लालबागचा राजा के यहां चढ़ावे की सबसे खास बात यह है कि भक्त सामान्य पूजा सामग्री के अलावा सोने और चांदी की वस्तुएं भी अर्पित करते हैं.

इनमें हार, अंगूठी, चेन, मोदक, नारियल, गणेश प्रतिमा, मूषक, गदा और दूसरी धार्मिक वस्तुएं होती हैं. इसलिए लालबागचा राजा के यहां भक्तों की ओर से दिए जाने वाले सोने-चांदी के चढ़ावे की चर्चा हर साल होती है. हर साल कई भक्त अपनी मन्नत पूरी होने पर अपनी श्रद्धा के अनुसार कीमती वस्तुएं भी अर्पित करते हैं.

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं खास चढ़ावा

मन्नतों के राजा होने के कारण लोग संतान प्राप्ति, बीमारी से मुक्ति या व्यापार में सफलता की मन्नत मांगते हैं. मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु अपनी क्षमतानुसार सोने का मुकुट, मोदक, सोने या चांदी की दूर्वा, कान के कुंडल और सोने की चेन चढ़ाते हैं.

चढ़ाई गई सोने-चांदी की वस्तुओं का क्या होता है?

गणेशोत्सव के बाद मंडल पिछले 90 से अधिक सालों से एक वार्षिक परंपरा निभा रहा है, जिसके तहत भक्त बप्पा को श्रद्धा से जो सोने-चांदी की वस्तुएं अर्पित करते हैं, उन्हें प्रसाद के रूप में अन्य भक्तों को नीलामी के माध्यम से दिया जाता है. जिसके बाद धन राशि का एक बड़ा हिस्सा जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक कार्यों पर खर्च किया जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

वरुण चौहान

वरुण चौहान

इलेक्‍ट्रानिक और डिजिटल मीडिया में करीब एक दशक से ज्यादा का अनुभव. 2008 में एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT) नोएडा से पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद कुछ अलग और नया करने की सोच के साथ मीडिया में अपने सफर की शुरुआत की. शुरुआत से ही मेरी रुचि उन विषयों को आम लोगों तक पहुंचाने में रही है, जो भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं से जुड़े हैं. अपने करियर के दौरान Channel One News, Sahara Samay, A2Z News, News Express, National Voice और पंजाब केसरी डिजिटल जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. इन संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, फील्ड रिपोर्टिंग,और डिजिटल कंटेंट को सीखने का अनुभव मिला. फिलहाल देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में धर्म और आस्था से जुड़ी खबरों, धार्मिक आयोजनों, ज्योतिष, वास्तु, पौराणिक कथाओं, मंदिरों की परंपराओं और व्रत-त्योहारों से जुड़े विषयों को सरल, सहज और तथ्यपूर्ण भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रहा हूं. महाकुंभ 2025 की कवरेज मेरे करियर के महत्वपूर्ण अनुभवों में शामिल है, जहां करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, अखाड़ों की परंपराओं, संत समाज की गतिविधियों और कुंभ से जुड़े धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर विस्तार से लिखने का अवसर मिला. इसके अलावा चारधाम यात्रा, सावन, नवरात्रि, दीपावली, होली, छठ पूजा, अमरनाथ यात्रा, रमज़ान और अन्य प्रमुख धार्मिक आयोजनों पर भी लगातार लेखन किया है. भारतीय संस्कृति, धर्म-दर्शन, ज्योतिष, अंक ज्योतिष, वास्तु शास्त्र, पुराणों और लोक आस्थाओं के अध्ययन में विशेष रुचि रखता हूं. मेरा प्रयास हमेशा यही रहता है कि धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों को सरल भाषा के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को बेहतर ढंग से समझ सकें.

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