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BRICS में पाकिस्तान की एंट्री क्यों अटकी? भारत की सहमति से जुड़ा है पूरा मामला, जानें अंदर की कहानी

September 12, 2026

Pakistan BRICS Entry: भारत की अध्यक्षता वाले BRICS 2026 शिखर सम्मेलन के बीच पाकिस्तान 2023 के आवेदन के बावजूद सदस्य नहीं बन सका। नई दिल्ली का वीटो और सर्वसम्मति का नियम रोड़ा बने। 2025 में NDB में $580 million हिस्सेदारी लेने के बावजूद कोशिशें ठहरी रहीं; समूह अब 11 सदस्यों का है।

18th BRICS Summit Delhi: भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी समेत कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधिमंडल राजधानी पहुंच चुके हैं। इसी बीच पाकिस्तान की BRICS सदस्यता की पुरानी कोशिश एक बार फिर चर्चा में है।

पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए आवेदन किया था और रूस, चीन समेत अन्य सदस्य देशों से समर्थन मांगा था। इसके बावजूद उसकी दावेदारी अब तक आगे नहीं बढ़ सकी है। वहीं, BRICS में पिछले कुछ वर्षों में कई नए देशों को शामिल किया गया, जिससे संगठन का विस्तार लगातार बढ़ता गया।

2023 में पाकिस्तान ने रखा था सदस्यता का दावा

पाकिस्तान ने BRICS में शामिल होने की कोशिश उस समय तेज की, जब संगठन के विस्तार को लेकर चर्चा चल रही थी। अगस्त 2023 में BRICS ने अर्जेंटीना, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और UAE को शामिल करने की घोषणा की थी।

उस समय पाकिस्तान को सदस्यता न मिलने को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने तब कहा था कि उसने अभी औपचारिक रूप से सदस्यता के लिए अनुरोध नहीं किया है। इसके कुछ महीने बाद इस्लामाबाद ने 2024 के सदस्यता चक्र के लिए औपचारिक आवेदन करने की घोषणा कर दी।

रूस में पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत मुहम्मद खालिद जमाली ने भी बताया था कि इस्लामाबाद BRICS के सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान को खास उम्मीद रूस से थी, क्योंकि 2024 में BRICS की अध्यक्षता रूस के पास थी।

भारत की सहमति क्यों बन रही है बड़ी बाधा?

पाकिस्तान के लिए BRICS में प्रवेश की राह में सबसे बड़ी चुनौतियों में भारत की स्थिति को माना जाता है। संगठन में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों की सहमति जरूरी होती है। यानी किसी देश की सदस्यता सिर्फ एक या दो देशों के समर्थन से तय नहीं होती। सभी मौजूदा सदस्य देशों की सहमति आवश्यक होने के कारण पाकिस्तान की दावेदारी को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहा है। पाकिस्तान लगातार BRICS को विकासशील देशों के लिए महत्वपूर्ण मंच बताता रहा है। उसका कहना है कि संगठन में शामिल होकर वह वैश्विक सहयोग, विकास और समावेशी बहुपक्षवाद में योगदान दे सकता है।

BRICS में जगह नहीं मिली तो NDB में बढ़ाई वित्तीय हिस्सेदारी

BRICS की सदस्यता हासिल करने की कोशिश के साथ पाकिस्तान ने संगठन से जुड़े वित्तीय संस्थानों के साथ अपने संबंध मजबूत करने पर भी जोर दिया है। Nikkei Asia की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में पाकिस्तान ने BRICS समर्थित New Development Bank में करीब 580 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी खरीदी। इसका उद्देश्य अपने वित्तीय विकल्पों को बढ़ाना और विश्व बैंक तथा IMF जैसी संस्थाओं पर निर्भरता को कुछ हद तक कम करना बताया गया। हालांकि, NDB में हिस्सेदारी बढ़ाने के बावजूद पाकिस्तान को BRICS की पूर्ण सदस्यता हासिल नहीं हो सकी।

अब BRICS में शामिल हैं 11 देश

BRICS के विस्तार के बाद संगठन में अब 11 सदस्य देश हैं। इनमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के अलावा मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।

विस्तारित BRICS का वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव भी पहले की तुलना में काफी बढ़ा है। क्रय शक्ति समानता यानी PPP के आधार पर समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हिस्सेदारी रखता है और दुनिया की बड़ी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

पाकिस्तान की उम्मीद अभी खत्म नहीं, लेकिन राह आसान भी नहीं

नई दिल्ली में BRICS Summit 2026 के आयोजन के बीच पाकिस्तान की सदस्यता का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। इस्लामाबाद लंबे समय से संगठन में शामिल होने की इच्छा जता रहा है, लेकिन सदस्य देशों के बीच सहमति और भारत की स्थिति उसके लिए अहम चुनौती बनी हुई है।

ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि आने वाले समय में BRICS के और विस्तार की स्थिति बनती है तो क्या पाकिस्तान को भी इसमें जगह मिल पाएगी, या उसकी सदस्यता की कोशिश अभी और लंबी चलेगी?