गणेश चतुर्थी भगवान गणेश को समर्पित सबसे प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। देशभर में इस पर्व को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है, लेकिन मुंबई का गणेशोत्सव अपनी भव्यता और अलग ही माहौल के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। मुंबई के सबसे लोकप्रिय गणपति पंडालों में लालबागचा राजा का नाम सबसे आगे आता है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल की स्थापना 12 सितंबर 1934 को हुई थी। इस साल मंडल की ओर से 93वें गणेशोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। भक्तों का लंबे समय से जिस पल का इंतजार था, वह आज यानी 11 सितंबर 2026 को आने वाला है। लालबागचा राजा की पहली झलक शाम 7 बजे भक्तों के सामने पेश की जाएगी।
आज सामने आएगा लालबागचा राजा का पहला लुक
मंडल की जानकारी के मुताबिक, इस साल गणेशोत्सव की शुरुआत 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी से होगी और इसका समापन 25 सितंबर 2026 को अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ होगा।
हर साल की तरह इस बार भी लालबागचा राजा के दर्शन को लेकर भक्तों में जबरदस्त उत्साह है। गणेशोत्सव शुरू होने से पहले ही मुंबई के लालबाग इलाके में तैयारियां तेज हो गई हैं और भक्तों को गणपति बप्पा की पहली झलक का बेसब्री से इंतजार है।
लालबागचा राजा की पहली झलक
- तारीख: 11 सितंबर 2026
- समय: शाम 7 बजे
- स्थान: लालबाग मार्केट, डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर रोड, परेल, मुंबई
- गणेशोत्सव: 14 सितंबर से 25 सितंबर 2026 तक
कब से होंगे लालबागचा राजा के दर्शन?
लालबागचा राजा के दर्शन गणेशोत्सव के दौरान लगभग पूरे दिन जारी रहते हैं। पिछले वर्षों के कार्यक्रम को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए जनरल दर्शन सुबह करीब 5 बजे से शुरू होते हैं।
वहीं, मुख दर्शन और चरण स्पर्श के लिए श्रद्धालुओं की कतारें सुबह करीब 6 बजे से शुरू होती हैं और देर रात तक चलती रहती हैं। हालांकि, इस साल दर्शन के समय में मंडल की ओर से बदलाव किया जा सकता है, इसलिए भक्तों को आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
कैसे शुरू हुई लालबागचा राजा की कहानी?
लालबागचा राजा की कहानी मुंबई के पुराने गिरणगांव इलाके से जुड़ी हुई है। 20वीं सदी की शुरुआत में लालबाग और परेल के आसपास का क्षेत्र कपड़ा मिलों के मजदूरों, मछुआरों, छोटे व्यापारियों और दुकानदारों से आबाद था। उस समय बाजार और चॉलें स्थानीय लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा हुआ करती थीं।
लालबागचा राजा की शुरुआत पेरू चॉल के बाजार से जुड़ी मानी जाती है। साल 1932 में यह बाजार बंद हो गया, जिसके बाद स्थानीय मछुआरों और दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। उनके पास अपना सामान बेचने के लिए कोई स्थायी जगह नहीं बची थी।
इसके बाद स्थानीय लोगों ने भगवान गणेश से प्रार्थना की और मनौती मांगी कि उन्हें अपना स्थायी बाजार मिल जाए।
मनौती पूरी होने के बाद शुरू हुआ गणेशोत्सव
स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने बाजार के लिए जमीन उपलब्ध कराने की कोशिश शुरू की। इस प्रयास में काउंसिलर कुंवरजी जेठाभाई शाह, डॉ. वी. बी. कोरगांवकर, नाखावा कोकम मामा, भाऊसाहेब शिंदे और डॉ. यू. ए. राव समेत कई लोगों ने भूमिका निभाई।
उनके प्रयासों के बाद जमीन की मालकिन राजाबाई तैयबअली बाजार बनाने के लिए एक भूखंड उपलब्ध कराने पर सहमत हुईं। इसके बाद स्थानीय लोगों की मनौती पूरी हुई और इसी खुशी में गणेशोत्सव की शुरुआत की गई।
समय के साथ यही गणेशोत्सव लालबागचा राजा के नाम से देश के सबसे प्रसिद्ध गणपति उत्सवों में शामिल हो गया। आज हर साल लाखों श्रद्धालु यहां भगवान गणेश के दर्शन करने और अपनी मनोकामना लेकर पहुंचते हैं। भक्तों के बीच लालबागचा राजा को लेकर गहरी आस्था है और गणेशोत्सव के दौरान पूरा लालबाग इलाका भक्ति और उत्सव के रंग में डूब जाता है।