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JMM का भाजपा से सवाल, झारखंड के खनिज पर दिल्ली का नियंत्रण क्यों?

August 14, 2026

Ranchi: खनिज संशोधन विधेयक को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा झारखंड के खनिज अधिकार और राजस्व से जुड़े सवालों का सीधा जवाब नहीं दे रही है.

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विनोद पांडेय ने कहा कि जब मामला झारखंड के संवैधानिक अधिकार, खनिज संपदा और राज्य के राजस्व से जुड़ा है, तो भाजपा को इन सवालों का जवाब देना चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड से चुने गए भाजपा सांसदों को भी केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए.

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उन्होंने कहा कि अगर केंद्र का प्रस्ताव राज्यों के अधिकारों को प्रभावित नहीं करता है, तो खनिज वाली जमीन पर राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले कर, सेस और लेवी को केंद्र की शर्तों से जोड़ने की जरूरत क्यों पड़ रही है. JMM ने इसे राज्यों के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश बताया है.

विनोद पांडेय ने कहा कि JMBL Cess कोई मनमाना टैक्स नहीं है. उन्होंने कहा कि जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने खनिज वाली जमीन पर राज्यों के कर लगाने के अधिकार को मान्यता दी थी. इसी आधार पर झारखंड विधानसभा ने कानून बनाया.

उन्होंने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट राज्यों के अधिकार को मान्यता दे चुका है, तो संसद के कानून के जरिए उस अधिकार को सीमित करने की कोशिश क्यों की जा रही है.

JMM ने दावा किया कि JMBL Cess से झारखंड को आने वाले वर्षों में बड़ी राशि मिलने की उम्मीद है. पार्टी के अनुसार, 2024-25 में करीब 1,379 करोड़ रुपये, 2025-26 में करीब 7,488 करोड़ रुपये और 2026-27 में करीब 13,215 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान है. विनोद पांडेय ने भाजपा से पूछा कि अगर इस आय के स्रोत पर रोक या सीमा लगती है, तो इसकी भरपाई कौन करेगा.

उन्होंने कहा कि रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, DMF और GST को JMBL Cess का विकल्प बताकर असली सवाल से बचा नहीं जा सकता. अलग-अलग राजस्व स्रोतों की अपनी अलग भूमिका है.

विनोद पांडेय ने कहा कि खनन के कारण विस्थापन, जंगल और पर्यावरण पर असर, पानी और हवा की समस्या तथा स्थानीय बुनियादी सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. आदिवासी और स्थानीय लोगों को भी इसका असर झेलना पड़ता है. ऐसे में राज्य के पास प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अधिकार होना चाहिए.

उन्होंने भाजपा के "खनिज लूट" के आरोप पर कहा कि अगर किसी मामले में गड़बड़ी के सबूत हैं, तो भाजपा उन्हें जांच एजेंसियों और कानून के सामने रखे. केवल प्रेस बयान देकर आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है.

विनोद पांडेय ने मंईयां सम्मान योजना को लेकर भाजपा पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि राज्य के पास पर्याप्त संसाधन होंगे तो महिलाओं, किसानों, गरीबों, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं को मजबूत किया जा सकेगा.

उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे को JMBL Cess से जोड़ना भी सही नहीं है. छात्रों की समस्याएं अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उनके नाम पर झारखंड के खनिज अधिकारों से जुड़े सवाल को दबाया नहीं जा सकता.

उन्होंने कहा कि झारखंड अपने जल, जंगल और जमीन के अधिकारों से समझौता नहीं करेगा. झामुमो का कहना है कि खनिज संपदा से होने वाला लाभ झारखंड के लोगों तक पहुंचना चाहिए.

विनोद पांडेय ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन को संविधान पढ़ने की सलाह देने से पहले भाजपा को यह बताना चाहिए कि जब सुप्रीम कोर्ट राज्यों के अधिकारों को मान्यता दे चुका है, तो केंद्र सरकार उन अधिकारों पर नई शर्तें क्यों लगा रही है.

उन्होंने कहा कि झारखंड अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठाता है तो यह केंद्र से टकराव नहीं, बल्कि संघीय व्यवस्था की रक्षा है. JMM खनिज अधिकारों के मुद्दे पर आगे भी आवाज उठाता रहेगा. 

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