Published: Saturday, October 3, 2026, 19:10 [IST]
Jitiya Vrat Parana Timing 2026: संतान के लिए पूरे दिन बिना अन्न और जल के कठिन व्रत रखने के बाद अब माताओं को जितिया व्रत के पारण का इंतजार रहेगा। जितिया की पूजा जितनी खास मानी जाती है, उतना ही महत्व इसे सही समय और विधि से खोलने का भी बताया गया है। ऐसे में व्रती महिलाओं के मन में सवाल हो सकता है कि 4 अक्टूबर को कितने बजे व्रत खोला जाए, सबसे पहले क्या खाया जाए और पारण से पहले कौन से काम करने चाहिए।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस बार जितिया व्रत का पारण रविवार, 4 अक्टूबर को किया जाएगा। पारण से पहले भगवान जीमूतवाहन की पूजा और संतान के मंगल की प्रार्थना की जाती है। इसके बाद जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है।
कितने बजे खुलेगा जितिया व्रत?
जितिया व्रत का पारण आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि में किया जाता है। इस साल व्रती महिलाएं 4 अक्टूबर, रविवार को सुबह 7 बजकर 32 मिनट के बाद पारण कर सकती हैं। धार्मिक मान्यता में सही तिथि और समय पर पारण करने को खास माना गया है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग में समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार भी समय की जांच की जा सकती है।
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पारण से पहले ऐसे करें पूजा
पारण वाले दिन सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद भगवान जीमूतवाहन और अपने इष्टदेव का स्मरण करते हुए दीपक जलाएं। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार फल, फूल और प्रसाद चढ़ाकर पूजा की जा सकती है। पूजा पूरी होने के बाद जितिया का प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटने की परंपरा भी है। इसके बाद परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जा सकता है।
सबसे पहले क्या खाकर खोलें व्रत?
जितिया का निर्जला व्रत होने के कारण पारण के समय सबसे पहले जल ग्रहण करने की परंपरा है। इसके बाद फल, दूध या हल्का सात्विक भोजन लिया जा सकता है। कई परिवारों में पारण के भोजन को लेकर अपनी पुरानी परंपराएं हैं। बिहार और आसपास के कुछ क्षेत्रों में नोनी साग और तोरी की सब्जी के साथ पारण करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।
पारण में इन नियमों का रखें ध्यान
पारण करने से पहले व्रत और पूजा से जुड़े सभी नियम पूरे करने की परंपरा है। कई परिवारों में पारण से पहले ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, अनाज, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा देने का भी चलन है। लंबे निर्जला व्रत के तुरंत बाद बहुत ज्यादा तला-भुना और भारी भोजन करने से बचना बेहतर माना जाता है। हल्का और सात्विक भोजन लिया जा सकता है।
पारण के दिन घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई तथा सात्विकता का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। परिवार और क्षेत्र के अनुसार जितिया व्रत की पूजा और पारण की परंपराओं में अंतर हो सकता है।
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