Published: Wednesday, September 2, 2026, 13:06 [IST]
क्या आप 31 अगस्त की इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की डेडलाइन मिस कर चुके हैं? 2 सितंबर तक की स्थिति के मुताबिक, आपके पास अभी भी मौका है। आप 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न (Belated Return) फाइल कर सकते हैं। वहीं, अगर कोई गलती हो जाए तो उसे 31 मार्च 2027 तक सुधारा जा सकता है। ध्यान रखें, रिटर्न फाइल करने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर कर लें, वरना रिटर्न अमान्य हो जाएगा।
देर से रिटर्न भरने पर 5,000 रुपये तक की लेट फीस लग सकती है। इसके अलावा, जब तक आप बकाया टैक्स का भुगतान नहीं कर देते, तब तक उस पर ब्याज भी लगता रहेगा। हालांकि, कम आय वाले करदाताओं के लिए नियम के मुताबिक लेट फीस कम रखी गई है। उदाहरण के लिए, अगर आपका बकाया टैक्स 20,000 रुपये है, तो लेट फीस जुड़ने के बाद ब्याज लगने से पहले ही आपकी कुल देनदारी बढ़कर 25,000 रुपये हो जाएगी। इसलिए, ब्याज के बोझ और टैक्स नोटिस से बचने के लिए जितना जल्दी हो सके भुगतान कर दें।

अगर आप तय तारीख तक आईटीआर फाइल नहीं कर पाए हैं, तो बिलेटेड रिटर्न भरें। वहीं, अगर पहले से भरे गए आंकड़ों में कोई गलती सुधारनी है, तो रिवाइज्ड रिटर्न (Revised Return) का इस्तेमाल करें। अगर आपसे कोई बड़ी जानकारी छूट गई है, तो अपडेटेड रिटर्न का विकल्प भी मौजूद है, लेकिन यह थोड़ा खर्चीला साबित हो सकता है। रिटर्न भरने के 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर करें, वरना आईटीआर अमान्य माना जाएगा। भविष्य के रिकॉर्ड के लिए एक्नॉलेजमेंट और चालान की कॉपियां संभालकर रखें।
ओल्ड वर्सेस न्यू टैक्स रिजीम और फॉर्म 10IEA
असेसमेंट ईयर 2026–27 के लिए न्यू टैक्स रिजीम बाय डिफॉल्ट (Default) लागू है। अगर आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनना चाहते हैं, तो आपको तय डेडलाइन से पहले फॉर्म 10IEA भरना होता है। देर से आईटीआर फाइल करने वाले करदाता आमतौर पर अब नया विकल्प नहीं चुन सकते। धारा 80C, 80D या हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसी छूट का फायदा तभी उठाएं, जब नियमानुसार इसकी इजाजत हो।
| पहलू | ओल्ड रिजीम (पुरानी व्यवस्था) | न्यू रिजीम (नई व्यवस्था) |
|---|---|---|
| डिडक्शन और छूट (Deductions & Exemptions) | ढेर सारी टैक्स छूट के दावे मौजूद; कागजी कार्रवाई ज्यादा। | सीमित टैक्स छूट; बेहद सरल ढांचा। |
| किनके लिए बेस्ट | उन करदाताओं के लिए जो ज्यादा टैक्स डिडक्शन का फायदा उठाते हैं। | कम डिडक्शन वाले सैलरीड क्लास के लिए बेस्ट। |
| फॉर्म की जरूरत | बाय डिफॉल्ट सिस्टम से बाहर निकलने के लिए समय पर फॉर्म 10IEA भरना जरूरी। | बाय डिफॉल्ट विकल्प; किसी फॉर्म की जरूरत नहीं। |
| डेडलाइन खत्म होने के बाद का विकल्प | समय पर फॉर्म न भरने पर ओल्ड रिजीम चुनने का मौका खत्म। | बिलेटेड फाइलिंग में भी आसानी से उपलब्ध। |
मान लीजिए आपकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपये है और आपके पास 2 लाख रुपये के टैक्स डिडक्शन दावे हैं। ओल्ड रिजीम के तहत, ये डिडक्शन आपकी टैक्स योग्य आय को घटा देते हैं, जिससे कुल टैक्स कम हो सकता है। वहीं न्यू रिजीम में टैक्स स्लैब की दरें तो कम हैं, लेकिन डिडक्शन सीमित मिलते हैं। अगर आपके पास ज्यादा डिडक्शन दावे नहीं हैं, तो नई व्यवस्था आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। लेकिन ध्यान रखें, अगर आपने समय पर फॉर्म 10IEA नहीं भरा था, तो अब रिजीम बदलना मुश्किल होगा।
इनकम टैक्स पोर्टल पर जाकर असेसमेंट ईयर 2026–27 और 'बिलेटेड रिटर्न' का विकल्प चुनें। प्री-फिल डेटा डाउनलोड करें और फॉर्म 16, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) व टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) का सही से मिलान करें। इसके बाद टैक्स की गणना करें, अगर कोई बकाया टैक्स है तो उसका भुगतान करें, फिर रिटर्न सबमिट करके 30 दिनों के भीतर ई-वेरिफिकेशन जरूर करें। आईटीआर भरने से पहले 80C, 80D, HRA के सबूत और बैंक ब्याज व कैपिटल गेंस के स्टेटमेंट तैयार रखें। गलत बैंक अकाउंट डिटेल देने, गलत रिजीम चुनने या अग्रिम टैक्स में चूक जैसी गलतियों से बचें। अपना रिफंड सुरक्षित रखने और टैक्स स्क्रूटनी से बचने के लिए जल्द से जल्द बिलेटेड ITR दाखिल करें।
Story first published: Wednesday, September 2, 2026, 13:06 [IST]
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