world-news

IT दिग्गजों ने खोले GenZs के लिए दरवाजे, AI के धुरंधरों की हो रही तलाश

August 6, 2026

दुनिया में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस अपने उरूज पर है. चीन, अमेरिका, सा​उथ कोरिया, ताइवान जैसे देश इस मामले में काफी आगे निकल चुके हैं. वहीं दूसरी ओर भारत आर्टिशियल इंटेलीजेंस के मोर्चे काफी पीछे है. ऐसा नहीं है कि भारत ने इस ओर अपने कदम बढ़ाए ही नहीं है. लेकिन उसकी रफ्तार उतनी तेज नहीं है. यही कारण है कि भारत की टॉप टेक कंपनियों ने देश के GenZs की ओर देखना शुरू कर दिया है. कैंपस हायरिंग के तहत ये कंपनियां ऐसे धुरंधरों की तलाश कर रही हैं, जो एआई के महारथी हों.

आर्टिशियल इंटेलीजेंस मौजूदा युवाओं की हथेली पर खेल रहा है. देश के युवा अब आर्टिशियल इंटेजीजेंस की ओर ही अपना भविष्य भी देख रहे हैं. ऐसे में देश के GenZs की एजुकेशन भी उसी ओर बढ़ी है. इसी का फायदा उठाने के लिए आईटी कंपनियों ने देश के कैंपस की ओर रुख किया है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस मामले को लेकर किस तरह की खबर सामने आई है…

आईटी कंपनियों ने फिर शुरू की हायरिंग

भारत की टॉप IT सर्विस कंपनियों ने कई महीनों की सावधानी के बाद फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए कैंपस हायरिंग बढ़ा दी है, लेकिन इस बार वे अलग तरह के इंजीनियर्स की तलाश कर रही हैं. देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर सर्विस एक्सपोर्टर कंपनियों – टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, एचसीएलटेक और टेक महिंद्रा – ने कॉलेज कैंपस से हायरिंग की योजनाएं फिर से शुरू कर दी हैं, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स की मांग बढ़ रही है. हालांकि, बड़े पैमाने पर भर्ती (मास रिक्रूटमेंट) के दिन अब लद गए हैं, क्योंकि कंपनियां ऐसे टैलेंट को हायर करना चाहती हैं जो शुरुआत से ही AI-बेस्ड ट्रांसफॉर्मेशन डील्स पर काम कर सकें.

शायद इस सोच से अलग विप्रो और पर्सिस्टेंट सिस्टम्स थीं, जो कॉलेज फ्रेशर्स के बजाय ऐसे टैलेंट पर फोकस करना चाहती हैं जिन्हें तुरंत काम पर लगाया जा सके (डिप्लॉय किया जा सके). इसके लिए वे मांग के अनुसार अनुभवी लोगों (लेटरल हायरिंग) को रखना चाहती हैं. टैलेंट सॉल्यूशंस फर्म ‘डायमंडपिक’ के फाउंडर और IT इंडस्ट्री के अनुभवी श्रीराम राजगोपाल के अनुसार, कंपनियां फिर से फ्रेशर्स की हायरिंग को लेकर बहुत उत्साहित हैं. उन्होंने मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि सोच यह है कि नए इंजीनियर पहले से ही AI में ट्रेंड हैं. इस AI-रेडी टैलेंट को नए प्रोजेक्ट्स सौंपे जाएंगे.

वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक, TCS ने इस तिमाही में लगभग 14,000 फ्रेशर्स को काम पर रखा है, इंफोसिस ने लगभग 4,000 फ्रेशर्स को हायर किया और एचसीएल ने 1,056 फ्रेशर्स को जोड़ा. टेक महिंद्रा, जिसने पिछले साल कैंपस हायरिंग नहीं की थी, ने कहा कि वह फिर से फ्रेशर्स की हायरिंग शुरू करेगी. टेक महिंद्रा के CEO और MD मोहित जोशी ने सालाना भर्ती का कोई खास लक्ष्य बताए बिना मीडिया रिपोर्ट में कहा कि जहां तक ​​कैंपस हायरिंग की बात है, इसमें थोड़ी अस्थिरता रही है क्योंकि रेवेन्यू को लेकर हमारी जानकारी सीमित थी.

अब जब हमारी जानकारी बेहतर हो गई है, तो मुझे उम्मीद है कि कैंपस हायरिंग प्रोग्राम फिर से शुरू होगा. इसके संकेत भी पहले से ही दिख रहे हैं. रेवेन्यू के हिसाब से भारत की टॉप 5 IT कंपनियों ने पिछली तिमाही में कुल कर्मचारियों की संख्या में 7,100 से ज्यादा की कमी के बाद, हालिया तिमाही में अपने पेरोल पर लगभग 5,480 लोगों को जोड़ा है.

‘फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स’ पर फोकस

भारत की सबसे बड़ी सर्विस एक्सपोर्टर कंपनी TCS, डिप्लॉयमेंट के लिए तैयारी बेहतर करने के मकसद से एक्सपीरियंस और प्रोजेक्ट-बेस्ड लर्निंग में निवेश कर रही है. साथ ही, वह धीरे-धीरे ऐसे एम्प्लॉई स्ट्रक्चर की ओर बढ़ रही है जिसमें स्किल्स (हुनर) को ज्यादा अहमियत दी जाती है. रॉयटर्स को दिए एक इंटरव्यू में CEO के. कृतिवासन ने बताया कि कंपनी लगभग 9,000 ‘फ्रं फ़्रंटियर इंजीनियर्स’ या जिन्हें आम तौर पर ‘फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स’ (FDEs) कहा जाता है, उन्हें हायर करने जा रही है.

FDE एक ऐसा रोल है जिसमें सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के साथ-साथ प्रोडक्ट थिंकिंग, कस्टमर कंसल्टिंग और AI की जानकारी का मेल होता है. पैलेंटिर (Palantir) ने इस रोल को लोकप्रिय बनाया था. वहीं, IT सेक्टर में TCS की सबसे बड़ी भारतीय प्रतिद्वंद्वी कंपनी इंफोसिस ने 23 जुलाई को कहा कि वह आने वाले कुछ सालों में लगभग 6,000 FDEs को हायर करेगी.

राजागोपाल ने कहा कि​, FDEs की जबरदस्त मांग है. दुनिया भर में, पैलेंटिर टेक्नोलॉजीज की परिभाषा के अनुसार, असल में सिर्फ 7,000 लोग ही FDE बनने के लिए ट्रेंड हैं. IT कंपनियां अब FDEs का अपना वर्जन तलाश रही हैं ऐसे इंजीनियर्स जो कम्युनिकेशन, प्रोडक्ट मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग में भी बेहतरीन हों.

दूसरी ओर, तीसरी सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनी HCLTech, हाई-क्वालिटी और स्पेशलाइज्ड फ्रेशर्स के एक खास ग्रुप पर फोकस करेगी, जिन्हें कंपनी के अंदर “एलीट कैडर” कहा जाता है. उम्मीद है कि अगले दो से तीन सालों में ये लोग ‘फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर्स’ (FDEs) के तौर पर तैयार हो जाएंगे. इसी तरह, LTM ने कहा कि उसका लक्ष्य 1,000 से ज्यादा AI इंजीनियर्स को FDEs के तौर पर ट्रेनिंग देना है, ताकि वे अपने क्लाइंट्स को AI इंनिशिएटिव्स को लागू करने और बढ़ाने में मदद कर सकें. वहीं, कोफ़ोर्ज (Coforge) की योजना है कि वह साल के अंत तक अपनी डेडिकेटेड FDE वर्कफोर्स को बढ़ाकर कम से कम 100 स्पेशलाइल्ड इंजीनियर्स तक ले जाए.

ISG में इंडिया रिसर्च की चीफ़ बिजनेस लीडर नम्रता दर्शन ने मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में कहा कि AI की वजह से कंपनियां इंजीनियर्स से जो उम्मीदें रखती हैं, वे बदल रही हैं. अब फोकस सिर्फ कोडिंग से हटकर ऐसे इंजीनियर्स पर जा रहा है जो क्लाइंट की समस्याओं को समझ सकें, कस्टमर्स से जुड़ सकें, बिजनेस की चुनौतियों का समाधान निकाल सकें और नतीजे देने के लिए टीमों के साथ मिलकर काम कर सकें. कंपनियां उन्हें ‘फ्रंटियर इंजीनियर्स’ कहें या कोई और नाम दें, यह पूरी IT इंडस्ट्री में टैलेंट डेवलपमेंट का एक अहम हिस्सा बन जाएगा.

लगातार बढ़ रहा कॉम्पिटिशन

हाल ही में खत्म हुई Q1FY27 की तिमाही नतीजों के दौरान, IT लीडर्स ने कहा कि वे सिर्फ फाउंडेशनल मॉडल पर ध्यान देने के बजाय, AI को जटिल और पुराने एंटरप्राइज वर्कफ़्लो में शामिल करने के लिए FDEs को प्राथमिकता दे रहे हैं. पिछले एक साल में, OpenAI, Anthropic, Google और Amazon Web Services लगातार एंटरप्राइज में AI लागू करने की दिशा में आगे बढ़े हैं. Anthropic ने प्राइवेट इक्विटी निवेशकों के सहयोग से एक खास एंटरप्राइज AI पहल शुरू की है. OpenAI ने अपनी एंटरप्राइज डिप्लॉयमेंट क्षमताएं यानी डिप्लॉयमेंट कंपनी विकसित की हैं.

वहीं, Google ने अपनी ‘गो-टू-मार्केट’ टीम के अंदर एक “AI-सेंट्रिक संगठन” बनाया है और अपनी पोर्टफोलियो कंपनियों में AI को तेजी से अपनाने के लिए निवेश फर्मों के साथ साझेदारी बढ़ाई है. इस बदलाव से नए बिजनेस भी बन रहे हैं: Infosys के पूर्व CEO विशाल सिक्का ने हाल ही में एंटरप्राइज AI सर्विस कंपनी ‘Hang Ten Systems’ के लिए 32 मिलियन डॉलर जुटाए.

जब उनसे इस चिंता के बारे में पूछा गया कि कहीं ‘फ्रंटियर AI’ कंपनियां सर्विस कंपनियों का काम न छीन लें, तो पारेख ने कहा कि यह डेवलपमेंट सर्विस इंडस्ट्री के मौजूदा बाज़ार को ही सही साबित करता है. पारेख ने आगे कहा कि अगर ऐसी कंपनियां हैं जो सर्विस के सेक्टर में आना चाहती हैं, तो यह असल में Infosys के लिए बहुत अच्छी बात है. क्योंकि इसका मतलब है कि हम जो काम करते हैं, वह होता रहेगा.

उन्होंने कहा कि हम रोज यही काम करते हैं. हमारा काम क्लाइंट्स के लिए AI को सर्विस के तौर पर इस्तेमाल करना है. और अभी हमारे पास 3,00,000 से ज़्यादा लोग यही काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम लगभग 1800 क्लाइंट्स के साथ काम करते हैं. इसलिए इतने बड़े पैमाने पर, हमारा context बिल्कुल अलग होता है.

सौरभ शर्मा

सौरभ शर्मा

15 साल से शेयर मार्केट, इकोनॉमी और कमोडिटी कवर कर रहे हैं. टीवी9 के साथ जुड़ने से पहले डीएनए, ए​शियानेट, जनसत्ता और राजस्थान पत्रिका जैसे कई बड़े संस्थानों के साथ भी जुड़े रहे.

Read More

google button