Published: Sunday, October 4, 2026, 10:28 [IST]
Indira Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष में आने वाली इंदिरा एकादशी को विशेष माना जाता है। पचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में इंदिरा एकादशी पड़ती है। पितृ पक्ष के दौरान आने के कारण इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ पितरों का तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने की भी परंपरा है। इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इंदिरा एकादशी का व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है। साथ ही, भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। आइए, जानते हैं इंदिरा एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण समय -
कब है इंदिरा एकादशी 2026?
द्रिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर 2026 को रात 2 बजकर 07 मिनट से शुरू होगी और 7 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा।
इंदिरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 39 मिनट से 5 बजकर 28 मिनट तक
पूजा के लिए शुभ मुहूर्त: सुबह 9 बजकर 13 मिनट से दोपहर 1 बजकर 37 मिनट तक
लाभ-उन्नति मुहूर्त: सुबह 10 बजकर 41 मिनट से दोपहर 12 बजकर 9 मिनट तक
अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: दोपहर 12 बजकर 9 मिनट से 1 बजकर 37 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक
इंदिरा एकादशी 2026 पारण का समय
पंचांग के अनुसार, इंदिरा एकादशी व्रत का पारण 7 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 16 मिनट से 8 बजकर 39 मिनट तक किया जा सकता है।
इंदिरा एकादशी का महत्व
पितृ पक्ष के दौरान पड़ने के कारण इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिल सकती है। मान्यता है कि इंदिरा एकादशी पर पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने से उन्हें शांति और मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। साथ ही, भगवान विष्णु की कृपा से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
इंदिरा एकादशी की पूजा विधि
इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इसके बाद भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थान को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की कोई तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
इसके बाद भगवान को फूल, माला, पीला चंदन और अक्षत अर्पित करें।
भगवान विष्णु को तुलसी दल के साथ भोग लगाएं।
इसके बाद घी का दीपक और धूप जलाएं।
पूजा के दौरान विष्णु चालीसा और इंदिरा एकादशी की व्रत कथा का पाठ करना शुभ माना जाता है।
अंत में भगवान विष्णु की आरती करें और भगवान से सुख-शांति व समृद्धि की कामना करें।
इंदिरा एकादशी पर करें पितरों का तर्पण
इंदिरा एकादशी पितृ पक्ष में आती है, इसलिए इस दिन पितरों को याद करना विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन दोपहर के समय पितरों का स्मरण करके श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान किया जा सकता है। पितरों की शांति के लिए उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा और तर्पण करने के साथ गरुड़ पुराण का पाठ करने की भी मान्यता है। ऐसा करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है और घर में सुख-शांति बनी रहने की मान्यता है।
Story first published: Sunday, October 4, 2026, 10:00 [IST]