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IND-PAK Tensions: ऑपरेशन सिंदूर के बाद रुकी 150 पाकिस्तानी दुल्हनों की शादी, जानें किस तरीके से पहुंचीं भारत

August 23, 2026

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच वीजा और सीमा मार्ग बंद होने से पाकिस्तान के सिंध प्रांत की करीब 150 महिलाओं की शादी अटक गई थी। इन महिलाओं की सगाई भारत में रहने वाले पुरुषों से हो चुकी थी और उन्हें शादी के बाद अपने ससुराल आना था। लंबे इंतजार के बाद अब इन पाकिस्तानी दुल्हनों और उनके परिवारों को भारत आने के लिए वीजा मिल गया है। गृह मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अटारी-वाघा बॉर्डर बंद होने के बाद भी लगभग 150 पाकिस्तानी लड़कियां भारत में दुल्हन बनकर आई हैं। अप्रैल से जून के बीच ये दुल्हनें करीब 450 रिश्तेदारों के साथ भारत पहुंचीं। यहां उन्होंने नागपुर, जोधपुर, अहमदाबाद, रायपुर, पुणे व भोपाल जैसे शहरों में अपने जीवनसाथी संग शादी रचाई। मंत्रालय के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर से पहले ही रिश्ता कर चुके इन जोड़ों को स्पेशल अनुमति दी गई।



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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बंद हुई आवाजाही


आमतौर पर भारत और पाकिस्तान से वीजा होने की स्थिति में लोग अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते आ सकते हैं। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद इस रास्ते के बंद होने पर ये दुल्हनें मस्कट, कोलंबो, ढाका, दुबई और कतर के रास्ते कनेक्टिंग फ्लाइट्स लेकर भारत पहुंचीं। दरअसल, भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने सिंध के एक सम्मानित धार्मिक स्थल की पहल पर इन परिवारों को विशेष छूट दी। इसके बाद परिजनों के लिए तय समय के भीतर लौटने की पाबंदी की वजह से ज्यादातर शादियां बेहद सादगी के साथ संपन्न कराई गईं।

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भावुक कर देने वाली आरती और इंकेश की कहानी


भारत में लंबे समय के वीजा पर रह रहे इंकेश जशनानी की सगाई ऑपरेशन सिंदूर से पहले हुई थी। उसकी मंगेतर आरती मई 2025 में वाघा बॉर्डर से महज एक किलोमीटर दूर थीं, तभी अटारी गेट बंद कर दिया गया। एक साल बाद आरती मस्कट के रास्ते नागपुर आईं, तब जाकर शादी हो पाई। हालांकि, वीजा पाबंदियों की वजह से उनके माता-पिता पाकिस्तान में ही छूट गए और सिर्फ भाई ही साथ आ सके।



अन्य देशों के रास्ते भारत पहुंची दुल्हनें


सिंधी समुदाय के नेता राजेश झांबिया ने रविवार को बताया कि अप्रैल 2026 से अब तक करीब 150 पाकिस्तानी दुल्हनें और उनके परिवार भारत पहुंच चुके हैं। चूंकि अटारी-वाघा के रास्ते से आने की अनुमति नहीं थी, इसलिए इन लोगों ने दुबई, ओमान, श्रीलंका, बांग्लादेश और अन्य देशों के रास्ते हवाई यात्रा कर भारत में प्रवेश किया। इनमें नागपुर की करीब 15 शादियां शामिल हैं। इसके अलावा रायपुर, जोधपुर, पुणे और देश के दूसरे शहरों में भी इन दुल्हनों की शादी होनी है।



ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली स्थिति


झांबिया के मुताबिक, पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत से सिंधी परिवार अपनी बेटियों की शादी के लिए आसानी से वाघा-अटारी सीमा के रास्ते भारत आते थे। लेकिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अटारी मार्ग से आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा पर रोक लगा दी। इससे भारत में शादी के लिए आने वाली कई महिलाओं की योजनाएं अटक गईं। ऑपरेशन सिंदूर भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया था। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।



मंदिर ने सरकार से मांगी मदद


शादियां अटकने के बाद समुदाय के लोगों ने पाकिस्तान के सिंध प्रांत के घोटकी स्थित प्रसिद्ध हिंदू धार्मिक स्थल सदानी दरबार के आध्यात्मिक प्रमुख संत युधिष्ठिरलाल शदानी से मदद मांगी। सदानी दरबार ने भारत में शादी के लिए आने वाली पाकिस्तानी महिलाओं की सूची तैयार की। इसमें करीब 150 दुल्हनों के नाम शामिल थे। इसके बाद मंदिर की ओर से गृह मंत्रालय से संपर्क कर इन महिलाओं और उनके परिवारों के लिए वीजा जारी करने की अपील की गई। झांबिया के अनुसार, गृह मंत्रालय ने इन लोगों को भारत आने की अनुमति दी, लेकिन शर्त रखी कि उन्हें हवाई मार्ग से भारत आना होगा।



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300 और महिलाओं को वीजा का इंतजार


झांबिया ने बताया कि पाकिस्तान में अभी करीब 300 और महिलाएं ऐसी हैं, जिनकी सगाई भारत में रहने वाले पुरुषों से हुई है। ये महिलाएं भी शादी के बाद भारत आने का इंतजार कर रही हैं। सिंधी समुदाय ने सरकार से इन महिलाओं और उनके परिवारों को भी वीजा देने की अपील की है, ताकि उनकी शादियां भी हो सकें। इस तरह लंबे समय बाद भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच कुछ परिवारों के लिए शादी का इंतजार खत्म हुआ है।