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IIT Bombay में चीटिंग पकड़ने वाले प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला कौन हैं? अब खुद कैसे साहिल की मौत में फंस गए?

September 21, 2026

Time Updated: Monday, September 21, 2026, 15:15 [IST]

IIT Bombay Professor Suryanarayana Doolla: आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला का नाम चर्चा में है। साहिल की मौत के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और प्रोफेसर पर कार्रवाई की मांग उठाई। 20 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे ने दुल्ला को डीन पद से निलंबित कर दिया। दूसरी ओर संस्थान के फैकल्टी फोरम ने उनका बचाव किया है।

परीक्षा में हुई एक घटना से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस केस, जातिगत भेदभाव के आरोप और प्रोफेसर के सस्पेंशन तक पहुंच चुका है। ऐसे में सवाल है कि आखिर प्रोफेसर सूर्यनारायण दुल्ला कौन हैं और इस पूरे मामले में उनकी भूमिका क्या है?

IIT Bombay Professor Suryanarayana Doolla

कौन हैं सूर्यनारायण दुल्ला?

प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग (DESE) में पढ़ाते हैं। वे बीते एक दशक से ज्यादा समय से इस संस्थान से जुड़े हैं। उन्होंने अपनी बीटेक की पढ़ाई साल 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से पूरी की। इसके बाद 2002 में आईआईटी बॉम्बे से एमटेक और 2007 में आईआईटी दिल्ली से पावर सिस्टम्स में पीएचडी की।

शिक्षण क्षेत्र में आने से पहले उन्होंने बेंगलुरु की पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स और हैदराबाद की मशीन 2 मशीन जैसी कंपनियों में काम किया। वे स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी एफिशिएंसी के जाने-माने जानकार माने जाते हैं।

शिक्षण और प्रशासनिक करियर का रिकॉर्ड

प्रोफेसर दूल्ला का प्रशासनिक अनुभव भी काफी बड़ा रहा है। वे हॉस्टल 6 के वार्डन और डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं।

इसके अलावा वे जेईई एडवांस्ड (JEE Advanced), यूसीईईडी (UCEED) और सीड (CEED) जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के आयोजन से भी जुड़े रहे हैं। उन्हें 2021 में प्रो. एस.पी. सुखात्मे एक्सीलेंस इन टीचिंग अवॉर्ड, 2017 में एक्सीलेंस इन टीचिंग अवॉर्ड और 2009 में यंग फैकल्टी अवॉर्ड मिल चुका है। साथ ही वे आईईईई (IEEE) से भी सम्मानित हैं।

साहिल वाकोडे मामले में कैसे आया नाम?

18 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे का शव मिला। संस्थान के मुताबिक, मिड-सेमेस्टर परीक्षा के दौरान साहिल को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते पकड़ा गया था। आरोप है कि उसने प्रश्न पत्र की फोटो खींचकर उत्तर पाने के लिए एआई (AI) प्लेटफॉर्म पर अपलोड की थी।

प्रोफेसर दूल्ला उस वक्त परीक्षा हॉल में इन्विजिलेटर (निरीक्षक) थे। उन्होंने नियम के तहत इस गड़बड़ी की जानकारी संस्थान के अधिकारियों को दी। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि इसके बाद साहिल को समझाया गया था। विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर ने उसे भरोसा दिया था कि इस घटना का असर उसके करियर पर नहीं पड़ेगा। संस्थान के अनुसार, छात्र पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं की गई थी।

परिवार के आरोप और पुलिस का एक्शन

साहिल के परिवार ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि साहिल को प्रताड़ित किया गया और उसके साथ जातिगत भेदभाव हुआ।

परिवार की शिकायत के आधार पर मुंबई पुलिस ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस एफआईआर में प्रोफेसर दूल्ला का नाम भी शामिल है। पुलिस फिलहाल इन आरोपों की जांच कर रही है।

छात्रों का प्रदर्शन और प्रोफेसर का निलंबन

घटना के बाद आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों ने प्रोफेसर दूल्ला के खिलाफ सख्त कदम उठाने की मांग रखी। 20 सितंबर को आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर प्रोफेसर शिरीष केदारे ने प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात की और उनकी 18 सूत्री मांगों पर हस्ताक्षर किए। दबाव के बाद 20 सितंबर की शाम को ही प्रशासन ने प्रोफेसर दूल्ला को सस्पेंड कर दिया।

दूसरी तरफ आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी फोरम पूरी तरह से प्रोफेसर दूल्ला के समर्थन में उतर आया है। फोरम का कहना है कि प्रोफेसर केवल अपनी ड्यूटी कर रहे थे। नकल पकड़े जाने पर उन्होंने संस्थान के तय नियमों का ही पालन किया था।

फिलहाल प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला निलंबित हैं। पुलिस जांच जारी है और कानूनी तौर पर अभी आरोप साबित होने बाकी हैं। यह पूरा मामला तीन अलग-अलग पहलुओं में बंट चुका है: पहला- परीक्षा में हुई गड़बड़ी, दूसरा- परिवार के आरोप व पुलिस जांच, और तीसरा- छात्रों का विरोध प्रदर्शन व संस्थान की कार्रवाई।

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