संसदीय समिति ने निजी अस्पतालों के मनमाने खर्च पर रोक लगाने की सिफारिश की है। सुझावों में कमरे का किराया 3-स्टार होटल के बराबर रखना, इलाज व जांच की दरें तय करना और भर्ती से पहले खर्च का अनुमान देना शामिल है।
नई दिल्ली: प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के नाम पर हो रही मनमानी और बेहिसाब खर्चों पर लगाम लगाने के लिए एक संसदीय समिति ने कुछ बड़े सुझाव दिए हैं। राज्यसभा सांसद प्रोफ़ेसर राम गोपाल यादव की अध्यक्षता वाली स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसदीय समिति ने अपनी 176वीं रिपोर्ट सरकार को सौंपी है। इस रिपोर्ट में आम लोगों को राहत देने वाले कई अहम सुझाव हैं। समिति ने बिल को बेवजह बढ़ाने की प्रथा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा है।
समिति ने एक क्रांतिकारी सिफारिश करते हुए कहा है कि बड़े शहरों में प्राइवेट अस्पताल जो कमरों का किराया वसूलते हैं, उसे उस इलाके के थ्री-स्टार होटलों के औसत किराए के बराबर तय कर देना चाहिए। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि मेट्रो शहरों के अस्पताल कमरों के लिए भारी-भरकम रकम वसूलते हैं। बेसिक रूम रेंट को थ्री-स्टार होटल के रेट पर सीमित करने के साथ-साथ, ड्यूटी डॉक्टरों की फीस, नर्सिंग चार्ज, मेडिकल सामान, खाना और लॉन्ड्री जैसे खर्चों का बिल अलग से और पूरी पारदर्शिता के साथ बनाया जाना चाहिए। साथ ही, कमरे की कैटेगरी के हिसाब से दवाओं और जांच के दाम बढ़ाने का चलन भी बंद होना चाहिए।
समिति ने अपनी बात रखने के लिए नेशनल सैंपल सर्वे के आंकड़ों का हवाला दिया है। इन आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी अस्पतालों में इलाज का औसत खर्च जहां 6,631 रुपये आता है, वहीं प्राइवेट अस्पतालों में यह 50,508 रुपये तक पहुंच जाता है। यानी सामान्य इलाज के लिए भी प्राइवेट सेक्टर में पांच गुना से ज़्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है। इसकी वजह से देश के आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भारी कर्ज़ में डूब जाते हैं।
समिति ने ज़रूरी इलाज, सर्जरी और लैब टेस्ट के लिए पूरे देश में एक जैसे रेट और एक अधिकतम सीमा तय करने का भी सुझाव दिया है। इसके लिए केंद्र सरकार को राज्यों के साथ मिलकर क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट को पूरे देश में सख्ती से लागू करवाना चाहिए। इसके अलावा, समिति ने यह भी मांग की है कि अस्पतालों के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि वे मरीज़ को भर्ती करने से पहले ही इलाज के पूरे खर्च की जानकारी दें।
रिपोर्ट में उन लोगों के लिए एक नई बीमा योजना की भी बात कही गई है, जो न तो सरकार की मुफ़्त बीमा योजनाओं के दायरे में आते हैं और न ही महंगे प्राइवेट बीमा का खर्च उठा सकते हैं। समिति ने 'आरोग्य संजीवनी' जैसी लोकप्रिय बीमा योजनाओं का मॉडल अपनाने की सिफारिश की है, जिसमें एक परिवार का सालाना प्रीमियम सिर्फ़ 4,000 से 6,000 रुपये के बीच हो।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।