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ई-वे बिल और यूपीआई पेमेंट से टैक्स चोरी: GST - 9 साल बाद भी कई पेचीदगियां 8 हजार केसों में 12 हजार करोड़ अटके - Indore News

August 27, 2026

जीएसटी को 9 साल हो चुके हैं लेकिन फिर भी सिस्टम में ऐसी पेचीदगियां हैं जो विवाद का कारण बन रही हैं लेकिन उनकी ट्रैकिंग नहीं हो पा रही। चाहे 48 घंटे में रजिस्ट्रेशन की सुविधा हो या यूपीआई पेमेंट और ई-वे बिल। कई कारोबारियों ने कर चोरी के ऐसे रास्ते ढू

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यही कारण है कि मध्य प्रदेश में जीएसटी विभाग में कुल 8,775 विवादित मामलों में रिफंड और रेवेन्यू के करीब 12,000 करोड़ अटके हैं। भास्कर ने कमर्शियल टैक्स के वरिष्ठ अधिकारियों, सीए, टैक्स प्रैक्टिशनर्स, बड़े करदाताओं से बातचीत कर इस पूरे ढांचे की गहराई से पड़ताल की तो 7 बड़े ब्लाइंड स्पॉट्स सामने आए।

ये हैं वो सात बड़ी खामियां जो विवाद का कारण बन रही हैं...

केस अटके

राज्यों को फाइलों का एक्सेस नहीं

खामी: केंद्र सरकार ने ‘GSTN’ कंपनी बनाई है। विभागीय कार्रवाइयों, जैसे न्यायिक निर्णय, नोटिस, पेंडेंसी का पूरा डाटा कंपनी के पास है। ब्लाइंड स्पॉट: राज्यों के कमर्शियल टैक्स विभागों के पास इस डाटा का एक्सेस नहीं है। असर: राज्य के अधिकारियों को पता नहीं चलता कि किस अफसर के पास कौन-सा केस कब से लंबित है। इसी के चलते केस अटके हैं।

ई-वे बिल

लाइव ट्रैकिंग ही नहीं हो पा रही

खामी: देश भर में माल की आवाजाही के लिए ई-वे बिल तो तेजी से बन रहे हैं। लेकिन माल गंतव्य तक पहुंचा या रास्ते में ही उतार दिया गया, इसकी कोई ट्रैकिंग व्यवस्था नहीं है। ब्लाइंड स्पॉट: एनएचएआई और फास्टैग से गाड़ी की लोकेशन का डेटा 4 घंटे देरी से मिलता है। असर: इस ‘टाइम गैप’ का फायदा उठाकर फर्जी कारोबारी माल दूसरे राज्यों में खपा देते हैं।

रजिस्ट्रेशन

कंपनी का जमीनी सत्यापन नहीं

खामी: 14-A के तहत कोई कारोबारी महीने में ~2.5 लाख से कम टैक्स भरता है, तो उसे 48 घंटे में स्वत: जीएसटी रजिस्ट्रेशन मिलता है। ब्लाइंड स्पॉट: बिना जमीनी सत्यापन के मिल रहे रजिस्ट्रेशन की मॉनिटरिंग नहीं। असर: बोगस बिलिंग, फेक फर्म्स, जाली इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिए गिरोह सरकार को करोड़ों की चपत लगा देते हैं।

एंटी एवेजन

वसूली 30 करोड़, 15 करोड़ खर्च

खामी: प्रदेश के 6 डिवीजनों में एंटी एवेजन ब्यूरो बनाया है। यहां करीब 90 अधिकारी हैं। ब्लाइंड स्पॉट: इनका मुख्य काम डेटा विश्लेषण नहीं रहा। ये सड़कों पर ट्रक रोकते हैं, दफ्तरों में छापे मारते हैं। असर: इस विभाग की मैदानी चेकिंग से सालाना 30 करोड़ की आमदनी हुई। 15 करोड़ वेतन, भत्ते, अन्य खर्च में चला गया।

टूल्स कमजोर

क्लाउड पर चला गया कारोबार

खामी: अब व्यापारी Tally या रजिस्टर के बजाय AWS, गूगल क्लाउड, रिमोट सर्वर, VPN का इस्तेमाल कर रहे हैं। ब्लाइंड स्पॉट: डेटा क्लाउड पर स्टोर्ड है। इसका एक्सेस जीएसटी अफसरों के पास नहीं। असर: साइबर फोरेंसिक टूल्स के अभाव में टैक्स अधिकारी आधुनिक वित्तीय अपराधों को पकड़ नहीं पा रहे हैं।

यूपीआई

एक दुकान, 4 QR कोड

खामी: डिजिटल ट्रांजैक्शन की सहूलियत अब टैक्स चोरी का जरिया बन गई है। ब्लाइंड स्पॉट: व्यापारी एक ही दुकान पर अलग-अलग QR कोड (UPI) से पर्सनल अकाउंट या रिश्तेदारों के खातों में पेमेंट ले रहे। असर: बैंक ‘डेटा प्राइवेसी’ का हवाला देकर जीएसटी विभाग के साथ डेटा शेयर नहीं करते। व्यापारी अपना असली टर्नओवर दबा रहे हैं।

ऑडिट

2017 से अधिकारियों के फैसलों की पड़ताल नहीं

खामी: जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य कर अधिकारियों द्वारा जारी प्रतिकूल आदेशों का न सत्यापन न री-वेरिफिकेशन।

ब्लाइंड स्पॉट: किसी अफसर ने पहले 100 करोड़ की टैक्स डिमांड बनाई। बाद में उसे 20 करोड़ कर दिया। इसका ऑडिट सिस्टम नहीं।

असर: इंदौर में ऐसे 1,000 संदेहास्पद ऑर्डर्स को री-सिलेक्ट किया गया है। इनका वेरिफिकेशन अब शुरू हो रहा है।

सीधी बात - अमरेश कुमार, एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट, जीएसटीएन

हम संबंधित कमिश्नर को जानकारी दे देंगे

जीएसटीएन से प्रदेशों को डेटा शेयरिंग के लिए कोई सिस्सटम नहीं है। इसके कारण 12 हजार करोड़ के केस अटके हैं? - ऐसा तो नहीं है। हम संबंधित को पूरी जानकारी पोर्टल से दे रहे हैं। अगर किसी को कोई शिकायत है तो हमसे सीधे बात कर सकता है। हम लगातार राज्यों से फीडबैक लेते हैं।

स्टेट को अपने ही डेटा को देखने का अधिकार नहीं है। पता नहीं चल पाता कि कौन-सा केस कब से लंबित है। कहां पर अटका है? - मैं आपको यह सब जानकारी आधिकारिक रूप से नहीं दे सकता। हम संबंधित कमिश्नर को जानकारी दे देंगे। अगर कोई दिक्कत है तो हमसे संबंधित राज्य ही बात करें।