11 मिनट पहले
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भारत की अर्थव्यवस्था इस साल G-20 देशों में सबसे तेज बढ़ सकती है। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने यह अनुमान लगाया है। एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6% से बढ़ाकर 7% कर दिया है।
मूडीज का कहना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव और संघर्ष के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था पर इसका असर अनुमान से काफी कम पड़ा है। मजबूत घरेलू खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी खर्च, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट में सुधार के संकेत और सर्विस सेक्टर की लगातार मजबूती से भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी हुई है।
IMF, RBI और एसएंडपी से काफी आगे निकला मूडीज का अनुमान
मूडीज का नया अनुमान अन्य प्रमुख वैश्विक और घरेलू वित्तीय संस्थाओं के मुकाबले काफी ज्यादा है। इस साल की शुरुआत में जब अन्य एजेंसियों ने वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण अपने अनुमान घटाए थे, तब मूडीज ने भारत की ग्रोथ रेट को लेकर अधिक भरोसा जताया है।

घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर बने ग्रोथ के मुख्य पिलर
मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की इस ग्रोथ के पीछे घरेलू मांग (Domestic Demand) सबसे बड़ा कारण है। देश में निजी खपत मजबूत हुई है और ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन (पूंजी निर्माण) में भी तेजी बनी हुई है।
कंपनी और प्राइवेट सेक्टर में नए निवेश (Private Investment) के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं। वहीं, सर्विस सेक्टर की एक्टिविटी लगातार मजबूत स्थिति में है, जिससे अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से उबरने में मदद मिली है।
रेटिंग Baa3 और 'स्टेबल' आउटलुक को बरकरार रखा
मूडीज ने भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को 'Baa3' पर बरकरार रखा है और देश का आउटलुक 'स्टेबल' रखा है। मूडीज का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था काफी बड़ी और डायवर्सिफाइड है। हालांकि, सरकार पर कर्ज का बोझ और कम प्रति व्यक्ति आय अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं।
कच्चे तेल की कीमतें और महंगाई अभी भी चिंता का विषय
मूडीज ने चेतावनी दी है कि भले ही GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया गया है, लेकिन जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
- ऊर्जा कीमतें: यदि मिडल ईस्ट में युद्ध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
- महंगाई: तेल महंगा होने से वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई दर मूडीज के 4.8% के अनुमान से ऊपर जा सकती है जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह 2.4% थी।
- एल नीनो का असर: मौसम संबंधी अनिश्चितताओं से खाने-पीने के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे आम जनता के खर्च करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, भारत का विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और क्रूड ऑयल के विविध स्रोत इन बाहरी झटकों से बचाने में मदद करेंगे।
सरकारी खजाने का घाटा कम करने की रफ्तार धीमी रह सकती है
रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार अपने राजकोषीय घाटे को कम करने के लक्ष्य पर कायम है। सरकार का लक्ष्य इसे पिछले साल के 4.4% से घटाकर वित्त वर्ष 2026-27 में 4.3% पर लाना है।
लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की कीमतें बढ़ती हैं, तो सरकार को सब्सिडी का बोझ उठाना पड़ सकता है। इसके अलावा डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की जरूरत के कारण सरकारी कर्ज में तेजी से कमी आना मुश्किल होगा।
अब ग्राफिक्स से समझें क्या है G-20

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