By Oneindia Staff
Published: Thursday, August 20, 2026, 22:20 [IST]
Gautam Adani Karan Adani News: अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड (APSEZ) के प्रबंध निदेशक करण अदाणी ने अपने पिता और अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के नेतृत्व और मुश्किल दौर में उनके रवैये को लेकर खुलकर बात की है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कई चुनौतियों और जांच के बीच भी उन्होंने अपने पिता को काम पर लगातार डटे रहते और देश के बुनियादी ढांचे के विकास से जुड़े प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाते देखा।
करण अदाणी ने बुधवार को लिंक्डइन पर साझा एक पोस्ट में बताया कि उनसे अक्सर पूछा जाता रहा है कि एक बेटे के तौर पर अपने पिता को इतने कठिन दौर से गुजरते देखना कैसा अनुभव था। उन्होंने कहा कि उस समय शायद उनके पास इसका स्पष्ट जवाब नहीं था, लेकिन अब पीछे मुड़कर देखने पर वह उस दौर को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
बेटे के नजरिए से अनुभव करना आसान नहीं था
करण अदाणी के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम को दो अलग-अलग नजरिए से देखा जा सकता है। एक नजरिया कारोबारी का है, जहां वह किसी संस्था को असाधारण दबाव के बीच काम करते हुए देखता है। दूसरा नजरिया एक बेटे का है, जिसके लिए अपने पिता को लगातार मुश्किल परिस्थितियों का सामना करते देखना भावनात्मक रूप से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें सबसे ज्यादा जिस बात ने प्रभावित किया, वह था उनके पिता का अपने आसपास की परिस्थितियों को अपने व्यवहार पर हावी न होने देना। उनके मुताबिक, गौतम अदाणी ने कठिन परिस्थितियों को अपने साथ काम करने वाले लोगों के प्रति अपने रवैये को बदलने नहीं दिया। करण ने इसे अपने जीवन में सीखे सबसे महत्वपूर्ण सबक में से एक बताया।
'कभी-कभी जवाब सिर्फ आगे बढ़ते रहना होता है'
करण अदाणी ने कहा कि मुश्किल परिस्थितियों से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका हमेशा कोई बड़ा जवाब देना या प्रतिक्रिया देना नहीं होता। कई बार सबसे जरूरी चीज होती है कि व्यक्ति अपना काम करता रहे और आगे बढ़ता रहे।
उन्होंने उस दौर को याद करते हुए कहा कि सुबह की शुरुआत अक्सर नई खबरों, नए आरोपों और उनके पिता के खिलाफ सामने आए नए दावों से होती थी। ऐसे समय में उन्हें गुस्सा और चिंता दोनों महसूस होते थे। उनके मन में यह सवाल भी आता था कि आखिर एक व्यक्ति कितना दबाव सह सकता है।
हालांकि, समय के साथ उन्हें इस पूरे दौर से जो सबसे बड़ा सबक मिला, वह किसी बयान या सार्वजनिक प्रतिक्रिया से जुड़ा नहीं था। बल्कि उन्होंने अपने पिता को हर सुबह उठकर फिर उसी काम में जुटते देखा।
बंदरगाह, बिजली और एयरपोर्ट का काम जारी रहा
करण अदाणी ने कहा कि बुनियादी ढांचे से जुड़े प्रोजेक्ट किसी व्यक्ति या परिवार की निजी परिस्थितियों के कारण रुक नहीं सकते। परियोजनाएं पूरी होनी थीं, कर्मचारी और कारोबारी साझेदार संगठन पर निर्भर थे, बंदरगाहों का संचालन जारी रखना था, घरों और उद्योगों तक बिजली पहुंचनी थी और एयरपोर्ट्स को यात्रियों की सेवा करते रहना था।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे कई निवेश होते हैं जिनका वास्तविक परिणाम वर्षों या दशकों बाद दिखाई देता है। इसलिए किसी मुश्किल दौर के कारण लंबे समय के विकास कार्यों को रोक देना विकल्प नहीं हो सकता।
उनके मुताबिक, भारत ने इसलिए अपनी गति नहीं रोकी क्योंकि उनका परिवार कठिन दौर से गुजर रहा था और उनके पिता ने भी काम जारी रखा।
बचपन में पिता के लिए सिर्फ 'पापा' थे गौतम अदाणी
करण अदाणी ने अपने निजी अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन में उन्होंने अपने पिता को कभी 'गौतम अदाणी' के रूप में नहीं देखा। उनके लिए वह सिर्फ 'पापा' थे।
उन्होंने कहा कि उनके पिता बड़े-बड़े भाषणों या सार्वजनिक प्रदर्शन के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जाने जाते हैं। करण के मुताबिक, मुश्किल समय में भी इसी एकाग्रता और निरंतरता को उन्होंने सबसे करीब से देखा।
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर पिता का विश्वास
करण अदाणी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों की घटनाओं ने उन्हें यह समझने में मदद की कि उनके पिता ने अपना जीवन इंफ्रास्ट्रक्चर और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कामों को क्यों समर्पित किया है।
उनके मुताबिक, यह सिर्फ भाषणों या नारों तक सीमित विचार नहीं है, बल्कि उनके पिता का दृढ़ विश्वास है कि भारत की बढ़ती आकांक्षाओं को भविष्य में ऐसे बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी, जिसकी कल्पना आज शायद बहुत से लोग नहीं कर सकते।
करण ने कहा कि यही विश्वास गौतम अदाणी के कई बड़े कारोबारी और रणनीतिक फैसलों के पीछे रहा है। उनके लिए मुश्किल परिस्थितियों में भी निर्माण और विकास का काम जारी रखना ही सबसे महत्वपूर्ण रहा।