Share Market में इन्वेस्ट करने से पहले गैप अप (Gap Up) और गैप डाउन (Gap Down) जैसे शब्दों को समझना जरूरी है ताकि आप अच्छा मुनाफा कमा सके. Business News
Published byJyoti Singh
Share Market में इन्वेस्ट करने से पहले गैप अप (Gap Up) और गैप डाउन (Gap Down) जैसे शब्दों को समझना जरूरी है ताकि आप अच्छा मुनाफा कमा सके. Business News
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Gap Up And Gap Down Photograph: (magnific)
Share Market में जानकारी कभी भी काफी नहीं होती, क्योंकि शेयरों की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं. इसलिए, गैप अप (Gap Up) और गैप डाउन (Gap Down) जैसे शब्दों को समझना जरूरी है. असल में किसी स्टॉक की ओपनिंग प्राइस (शुरुआती कीमत) अक्सर पिछले दिन की क्लोजिंग प्राइस (बंद होने की कीमत) से काफी अलग होती है. इस अंतर को ही "गैप" कहा जाता है. अगर कोई स्टॉक ज्यादा कीमत पर खुलता है, तो इसे "गैप अप" कहते हैं और अगर वह कम कीमत पर खुलता है, तो इसे "Gap Down" कहते हैं. आइए इसे एक उदाहरण से समझते हैं मान लीजिए सोमवार को क्लोजिंग प्राइस ₹500 थी और मंगलवार को ओपनिंग प्राइस ₹525 है तो ₹25 के इस अंतर को "गैप अप" कहा जाएगा.
Gap Up होने के क्या कारण होते हैं?
'गैप अप' के कई कारण हो सकते हैं जैसे कि कंपनी के शानदार तिमाही नतीजे, कोई बड़ा ऑर्डर या अच्छी खबर, बोनस या डिविडेंड जैसी कॉर्पोरेट घोषणाएं और मार्केट का मजबूत पॉजिटिव सेंटिमेंट. वहीं, 'गैप डाउन' तब होता है जब किसी स्टॉक की ओपनिंग प्राइस उसके पिछले दिन की क्लोज़िंग प्राइस से कम होती है. इसे एक उदाहरण से समझते हैं अगर सोमवार को क्लोजिंग प्राइस ₹500 थी और मंगलवार को ओपनिंग प्राइस ₹475 है, तो ₹25 के इस अंतर को 'गैप डाउन' कहा जाता है. गैप डाउन के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कमजोर फाइनेंशियल नतीजे, बुरी खबरों का असर, ग्लोबल मार्केट में गिरावट, और इन्वेस्टर्स द्वारा भारी बिकवाली आदि.
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Gap Up और Gap Down ट्रेडर्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है
'गैप-अप' से निवेशकों को बाजार के मौजूदा मूड को समझने में मदद मिलती है. इंट्राडे और स्विंग ट्रेडर्स ऐसे गैप के आधार पर अपनी ट्रेडिंग रणनीतिय बनाते हैं. अक्सर, गैप-अप के बाद किसी स्टॉक में प्रॉफ़िट-बुकिंग हो सकती है, जबकि गैप-डाउन के बाद खरीदारी की गतिविधि देखी जा सकती है. इसलिए सिर्फ गैप के आधार पर ट्रेड नहीं करना चाहिए.
वैसे Gap Up या Gap Down ट्रेडिंग का अच्छा मौका होता है ऐसा जरूरी नहीं है कि हर Gap Up या Gap Down के बाद शेयर आगे बढ़े। इसलिए कई बार शेयरगैप बनने के बाद उसी दिन उस अंतर को भर देता है, जिसे Gap Filling कहा जाता है. इसलिए ट्रेड लेने से पहले वॉल्यूम, ट्रेंड, सपोर्ट-रेजिस्टेंस और अन्य टेक्निकल इंडिकेटर्स का भी विश्लेषण करना चाहिए.
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डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार के जोखिमों के अधीन है. किसी भी शेयर में पैसा लगाने से पहले अपने सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.
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