world-news

FIR लिखने वाला ASI ही बना जांच अधिकारी: महिला जेल में, बच्चे को 10 घंटे थाने में बैठाया था, हाईकोर्ट ने DGP से मांगा एफिडेविट - Bilaspur (Chhattisgarh) News

August 22, 2026

  • Hindi News
  • Local
  • Chhattisgarh
  • Bilaspur
  • Chhattisgarh High Court Slams Bilaspur Police On NDPS Case Investigation

बिलासपुर4 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक
महिला को एनडीपीएस के केस में फंसाने का है आरोप। - Dainik Bhaskar

महिला को एनडीपीएस के केस में फंसाने का है आरोप।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने बिलासपुर पुलिस की एनडीपीएस एक्ट के तहत की गई कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। मामला सरकंडा थाना क्षेत्र में प्रतिबंधित नशीली टेबलेट की बरामदगी और जांच प्रक्रिया से जुड़ा है।

कोर्ट ने जांच प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए डीजीपी से एफिडेविट के साथ जवाब मांगा है। कोर्ट ने खास तौर पर पूछा है कि जिस एएसआई ने मामले में एफआईआर दर्ज की, उसे ही जांच अधिकारी कैसे नियुक्त कर दिया गया। इस प्रक्रिया को लेकर हाईकोर्ट ने पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा है।

पुलिस ने महिला के घर दबिश देकर 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) टैबलेट जब्त करने का दावा किया था। (फाइल फोटो)

पुलिस ने महिला के घर दबिश देकर 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) टैबलेट जब्त करने का दावा किया था। (फाइल फोटो)

महिला के घर से 2925 नशीली टेबलेट जब्त

दरअसल, सरकंडा थाना क्षेत्र के बंधवापारा में पुलिस ने महिला के घर दबिश देकर 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) टैबलेट जब्त करने का दावा किया था। पुलिस ने टेबलेट को प्रतिबंधित और नशीला पदार्थ बताते हुए महिला के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और उसे जेल भेज दिया।

महिला करीब सात महीने से जेल में बंद है। इस दौरान उसकी बच्ची और परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

भाई ने पुलिस पर साजिश का लगाया आरोप

महिला के भाई ने आरोप लगाया है कि उसकी बहन को सरकंडा पुलिस और उसके बहनोई रामकिशोर ने कथित तौर पर साजिश के तहत फंसाया है। उसने मामले में ASI शैलेंद्र सिंह की मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।

छत पर मिला था दवाओं से भरा पॉलिथीन

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि जिस पॉलिथीन बैग से कथित प्रतिबंधित दवाएं बरामद हुईं, वह महिला के पास से सीधे नहीं मिला था। परिवार के मुताबिक, करीब 14 साल के बच्चे को पतंग उड़ाते समय यह बैग घर की छत पर मिला था।

बच्चे ने मोबाइल पर दवाओं के बारे में जानकारी जुटाई और इसकी जानकारी अपनी मां को दी। परिवार का कहना है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे की तरह रख दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महिला को मामले में आरोपी बना दिया।

हाईकोर्ट ने सरकंडा थाना पुलिस के प्रतिबंधित नशीली टेबलेट की बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है। (फाइल फोटो)

हाईकोर्ट ने सरकंडा थाना पुलिस के प्रतिबंधित नशीली टेबलेट की बरामदगी और जांच प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है। (फाइल फोटो)

नाबालिग को 10 घंटे थाने में बैठाने का आरोप

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में बताया कि 14 साल के बच्चे के खिलाफ कोई FIR दर्ज नहीं थी। इसके बावजूद पुलिस उसे थाने ले गई और करीब 10 घंटे तक वहां बैठाकर रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

बैग छत तक कैसे पहुंचा, जांच की मांग

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि पुलिस यह पता लगाए कि दवाओं से भरा बैग आखिर छत तक कैसे पहुंचा और उसे वहां किसने रखा था। इसके अलावा दवाओं के वास्तविक स्रोत और महिला की गिरफ्तारी किन परिस्थितियों में हुई, इसकी भी जांच की मांग की गई है। याचिका में बच्चे के मोबाइल को फोरेंसिक जांच के लिए मुहैया कराने की बात भी कही गई है।

हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जिस पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज की और जिसके आधार पर FIR दर्ज हुई, उसी अधिकारी को मामले की जांच कैसे सौंप दी गई।

कोर्ट के सामने यह भी बताया गया कि इसी अधिकारी ने जांच पूरी करने के बाद महिला के खिलाफ चार्जशीट भी पेश की है। हाईकोर्ट ने इस पूरी प्रक्रिया को लेकर DGP से जवाब मांगा है।

डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। (फाइल फोटो)

डिवीजन बेंच ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। (फाइल फोटो)

ASI के पुराने रिकॉर्ड की भी मांगी जानकारी

डिवीजन बेंच ने DGP को इस मामले के जांच अधिकारी ASI शैलेंद्र सिंह के पिछले आचरण और रिकॉर्ड की जानकारी भी पेश करने का निर्देश दिया है। इससे पुलिस की भूमिका और जांच की निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल और गंभीर हो गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी। इसमें DGP के शपथपत्र के बाद हाईकोर्ट आगे का रुख तय करेगा।

क्या होती है देहाती नालिश?

देहाती नालिश अपराध स्थल या थाने पहुंचने से पहले पीड़ित या गवाह की ओर से पुलिस अधिकारी को दी गई शुरुआती सूचना या बयान होता है। इसी के आधार पर आगे FIR दर्ज की जा सकती है। ऐसे में शिकायत दर्ज करने वाले अधिकारी को ही जांच की जिम्मेदारी दिए जाने पर हाईकोर्ट का सवाल जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

…………………

इससे जुड़ी यह खबर भी पढ़िए…

बेटियां बोलीं-पिता ने मां को NDPS केस में जेल भिजवाया: भरण-पोषण से बचने झूठे केस में फंसाया; महिला आयोग ने दोबारा जांच के निर्देश दिए

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की जनसुनवाई में बिलासपुर का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। दो बेटियों ने आरोप लगाया कि उनके पिता ने पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी कर ली। जब मां ने भरण-पोषण की मांग की तो पति ने पुलिस से मिलीभगत कर उसे कथित तौर पर झूठे एनडीपीएस केस में फंसा दिया। पढ़ें पूरी खबर…

.

खबरें और भी हैं...

  • बिलासपुर में तेज-बहाव में बाइक समेत दो युवक फंसे,VIDEO: दोनों को बचाने नदी में उतरे तीन लड़के, बहादुरी से बचाई जान, SSP ने किया सम्मानित

    दोनों को बचाने नदी में उतरे तीन लड़के, बहादुरी से बचाई जान, SSP ने किया सम्मानित|बिलासपुर (छत्तीसगढ़),Bilaspur (Chhattisgarh) - Dainik Bhaskar0:31
    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बिना चुनाव NSUI में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति: बिलासपुर ग्रामीण से रंजेश सिंह क्षत्री और शहर से समर्थ मिरानी को जिम्मेदारी, दावा-संगठन को मिलेगी मजबूती

    बिलासपुर ग्रामीण से रंजेश सिंह क्षत्री और शहर से समर्थ मिरानी को जिम्मेदारी, दावा-संगठन को मिलेगी मजबूती|बिलासपुर (छत्तीसगढ़),Bilaspur (Chhattisgarh) - Dainik Bhaskar
    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • बिलासपुर में मकान के बेसमेंट से बिना लाइसेंस कीटनाशक-खाद जब्त: बिना दस्तावेज किया जा रहा था स्टॉक, एक्सपायर-डुप्लीकेट दवाएं मिलीं, गाजियाबाद से मंगाने की आशंका

    बिना दस्तावेज किया जा रहा था स्टॉक, एक्सपायर-डुप्लीकेट दवाएं मिलीं, गाजियाबाद से मंगाने की आशंका|बिलासपुर (छत्तीसगढ़),Bilaspur (Chhattisgarh) - Dainik Bhaskar
    • कॉपी लिंक

    शेयर

  • तालाब में डूबने से 2 भाइयों की मौत: बिलासपुर में मोबाइल पर बात करता रहा पिता, छोटे को बचाने बड़े भाई की चली गई जान

    • कॉपी लिंक

    शेयर