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Car Wireless Charger: बिना केबल गाड़ी में कैसे चार्ज होता है मोबाइल? जानिए कार के वायरलेस चार्जर के काम करने का तरीका

August 22, 2026

Sat, 22 Aug 2026 10:30 AM IST

ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति शुक्ला Updated Sat, 22 Aug 2026 10:30 AM IST

सार

Car Wireless Charging: आजकल की कई नई और लग्जरी कारों में वायरलेस चार्जिंग फीचर मिलने लगा है, जिसमें मोबाइल का चार्ज करने के लिए किसी केबल की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिना किसी केबल या वायर के यह चार्जर आपके फोन तक पावर कैसे पहुंचाता है। क्या है इसके पीछे की तकनीक और इसका इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से।
 

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How Your Phone Charge in Car Without Cable? Know Technology

कार वायरलेस चार्जर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Wireless Charging in Car: आधुनिक कारों के केबिन को हाई-टेक बनाने के लिए एक से बढ़कर एक फीचर्स दिए जा रहे हैं। इन्ही में से एक फीचर है वायरलेस चार्जिंग का। इसमें आपको कार में सफर के दौरान मोबाइल चार्ज करने के लिए किसी केबल को लगाने या संभालने की जरूरत नहीं पड़ती। सिर्फ कार के चार्जिंग पैड पर मोबाइल रखने भर से बैटरी चार्ज होने लगती है। इसके पीछे वायरलेस चार्जिंग टेक्नोलॉजी, कॉइल और मैग्नेटिक फील्ड का इस्तेमाल होता है। आइए समझते हैं कि कार का वायरलेस चार्जर किस तरह काम करता है।

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Wireless Phone Charging: क्या होती है कार की वायरलेस चार्जिंग?

  • कारों में वायरलेस चार्जिंब का मतलब है कि मोबाइल को चार्ज करने के लिए सीधे चार्जिंग केबल लगाने की जरूरत नहीं पड़ती है। कार में एक खास वायरलेस चार्जिंग पैड दिया जाता है। फोन को इस पैड के ऊपर सही जगह रखने पर चार्जिंग शुरू हो जाती है।
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  • इस तकनीक में आमतौर पर Qi जैसे वायरलेस चार्जिंग स्टैंडर्ड का इस्तेमाल किया जाता है। चार्जिंग पैड और मोबाइल, दोनों के अंदर खास तरह की तांबे की कॉइल लगी होती है। इन्हीं कॉइल की मदद से ऊर्जा चार्जिंग पैड से मोबाइल तक पहुंचती है।
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How Wireless Charging Works: पावर मोबाइल तक कैसे पहुंचती है?

  • अब लोगों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि आखिर बिना केबल के पावर कैसे पहुचंती है। तो जब कार का वायरलेस चार्जिंग पैड चालू होता है, तो उसके अंदर लगी कॉइल में तेजी से बदलने वाला इलेक्ट्रिक करंट प्रवाहित होता है। इससे आसपास एक बदलता हुआ मैग्नेटिक फील्ड बनता है। 
  • मोबाइल के अंदर भी एक छोटी कॉइल लगी होती है। जब फोन को चार्जिंग पैड पर सही जगह रखा जाता है, तो फोन की कॉइल इस मैग्नेटिक फील्ड से ऊर्जा हासिल करती है।
  • इसके बाद मोबाइल का चार्जिंग सिस्टम इस ऊर्जा को बैटरी चार्ज करने के लिए इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक पावर में बदल देता है। इस तरह बिना चार्जिंग केबल लगाए मोबाइल की बैटरी तक पावर पहुंच जाती है।


चार्ज करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • वायरलेस चार्जिंग में मोबाइल चार्ज करते समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण इसके रखने की पोजिशन होती है। फोन के अंदर लगी कॉइल और चार्जिंग पैड की कॉइल अगर एक-दूसरे के सही सामने नहीं होंगी, तो चार्जिंग धीमी हो सकती है।
  • गलत पोजिशन में कुछ ऊर्जा चार्जिंग के बजाय गर्मी के रूप में बदल सकती है। इसी वजह से कई कारों में वायरलेस चार्जिंग पैड पर मोबाइल रखने के लिए एक निर्धारित जगह या निशान दिया जाता है।
  • इसलिए फोन को चार्जिंग पैड पर सही जगह रखना जरूरी है, ताकि दोनों कॉइल के बीच ऊर्जा का ट्रांसफर बेहतर तरीके से हो सके।


क्या हर मोबाइल में चलेगी कार की वायरलेस चार्जिंग?

  • नहीं...हर स्मार्टफोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट नहीं करता। इसके लिए फोन के अंदर जरूरी हार्डवेयर और वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट होना चाहिए।
  • अगर आपका फोन वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट नहीं करता है, तो उसे कार के वायरलेस चार्जिंग पैड पर रखने से बैटरी चार्ज नहीं होगी।
  • इसके अलावा हर फोन और कार का वायरलेस चार्जिंग पैड एक जैसी स्पीड से चार्ज करे, यह भी जरूरी नहीं है। चार्जिंग की गति फोन और चार्जिंग पैड दोनों की क्षमता पर निर्भर करती है