Sep 12, 2026 06:05 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

यह उपहार 12 अक्टूबर 2019 को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान दिया गया था। उस समय पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर बातचीत की थी।

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की यह तस्वीर पुरानी है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपनी तस्वीर गिफ्ट की। वीडियो में एक ऐसे स्मृति चिह्न को दिखाया जा रहा है, जिस पर पीएम मोदी की फोटो बनी हुई है। इस वीडियो को शेयर करते हुए लोग इसे भारत और चीन के नेताओं के बीच हुई मुलाकात से जोड़ रहे हैं। लेकिन क्या वाकई पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को यह चित्र भेंट किया था? आइए, इस दावे का फैक्ट चेक करते हैं।
PIB फैक्ट चेक के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहा चीनी मिट्टी का स्मृति चिह्न पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को नहीं दिया था। दरअसल, यह स्मृति चिह्न खुद शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी को भेंट किया था। यह उपहार 12 अक्टूबर 2019 को तमिलनाडु के मामल्लपुरम में दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान दिया गया था। उस समय पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक बैठक हुई थी। दोनों नेताओं ने भारत और चीन के बीच संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत की थी। इसी दौरान चीनी राष्ट्रपति की ओर से प्रधानमंत्री को यह खास स्मृति चिह्न दिया गया था।
फैक्ट चेक से क्या पता चला
फैक्ट चेक में बताया गया कि स्मृति चिह्न पर पीएम मोदी की तस्वीर बनी हुई थी। इसी फोटो को देखकर सोशल मीडिया पर गलत दावा किया जा रहा है कि मोदी ने यह चित्र शी जिनपिंग को उपहार में दिया था। पीआईबी ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि वायरल वीडियो में किया गया दावा फर्जी है। फैक्ट चेक यूनिट ने इसके समर्थन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मामल्लपुरम मुलाकात से जुड़ी आधिकारिक जानकारी भी साझा की है। चीन के दूतावास से जारी दस्तावेज में भी इस मुलाकात और स्मृति चिह्न से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।
इस तरह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के साथ किया जा रहा दावा पूरी तरह गलत है। पीएम मोदी ने शी जिनपिंग को अपना चित्र वाला यह स्मृति चिह्न भेंट नहीं किया था। 12 अक्टूबर 2019 को मामल्लपुरम में चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी को यह चीनी मिट्टी से बना स्मृति चिह्न उपहार में दिया था। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को देखकर किए जा रहे दावे पर भरोसा करना सही नहीं है। ऐसे में किसी भी वायरल वीडियो या पोस्ट को सच मानने से पहले उसके स्रोत और आधिकारिक जानकारी की जांच करना जरूरी है।