इन दिनों उत्तरप्रदेश के कई जिलों में बारिश के चलते कई जिलों का बुरा हाल है. जबकि अब लगातार हो रहे बारिश के चलते अब गंगा एक्सप्रेसवे पर भी पानी भर गया है. वायरल वीडियो में साफ देखा जा रहा है कि, गंगा एक्सप्रेसवे के टोल पर पूरा पानी भर गया है और मजबूरन गाड़ियों को पानी में घुसकर ही गुजरना पड़ रहा है. लेकिन जलभराव वाले रास्तों पर थोड़ी सी लापरवाही भी आपकी लाखों रुपये की चमचमाती कार के इंजन को पूरी तरह से तबाह कर सकती है.
क्योंकि, सड़क पर जलभराव के दौरान गाड़ी चलाने से सबसे बड़ा खतरा हाइड्रोलॉक का होता है जो पानी में इंजन बंद होने पर दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश से होता है. अगर एक्सप्रेसवे या किसी मुख्य सड़क पर अचानक बाढ़ जैसा नजारा बन जाए और पानी का स्तर काफी बढ़ जाए तो कार मालिकों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है. चलिए जानतें हैं ऐसी परेशानी में आप अपनी गाड़ी को कैसे बचा सकते हैं
हाइड्रोलॉक का होता है खतरा
बता दें कि, जब पानी का स्तर कार के साइलेंसर या एयर इंटेक तक पहुंच जाता है तो गाड़ी के कंबशन चैंबर में पानी घुसने की पूरी संभावना बढ़ जाती है. पानी एक दबाया न जा सकने वाला तरल पदार्थ है. जिससे पिस्टन घूमना बंद कर देता है और इंजन पूरी तरह से सीज हो जाता है.
जिसे ऑटोमोबाइल की भाषा में हाइड्रोलॉक कहते हैं. हाइड्रोलॉक होने पर कार के इंजन को ठीक कराने में 50 हजार से लेकर लाखों रुपये तक का भारी-भरकम खर्चा आ सकता है. इसलिए जलभराव में गाड़ी ले जाते समय इंजन में पानी जाने से रोकना ही सबसे समझदारी भरा कदम है.

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गलती से भी न करें स्टार्ट
आपको बता दें कि, अगर पानी भरे रास्ते या टोल प्लाजा से गुजरते वक्त आपकी कार अचानक बंद हो जाती है तो सबसे पहली बात जो आपको ध्यान रखनी है वह यह है कि गाड़ी को दोबारा स्टार्ट करने की कोशिश बिल्कुल न करें. बार-बार इग्निशन चालू करने से पानी सीधे इंजन के आंतरिक हिस्सों में खिंच जाता है और इंजन ब्लॉक क्रैक हो सकता है.
इस लिए ऐसी स्थिति में चाबी बंद कर दें गाड़ी को न्यूट्रल करें और धक्का देकर किसी सूखे या ऊंचे स्थान पर ले जाएं. इसके बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी या रोडसाइड असिस्टेंस को कॉल करके टोइंग क्रेन की मदद लें.

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धीरे-धीरे गाड़ी को बढ़ाए आगे
जानकारी दें दे कि, अगर सड़क पर पानी का स्तर आपकी गाड़ी के पहियों के आधे हिस्से से कम है और आगे बढ़ना जरूरी है तो हमेशा कार को पहले गियर में ही रखें. गाड़ी की रफ्तार धीमी रखें लेकिन एक्सीलेटर पर पैर का दबाव लगातार बनाए रखें ताकि रेव ज्यादा रहे.
ऐसा करने से साइलेंसर से निकलने वाली एग्जॉस्ट गैसों का दबाव बना रहता है और पानी साइलेंसर के जरिए उल्टा इंजन में प्रवेश नहीं कर पाता. इसके अलावा जलभराव वाले पानी में क्लच बार-बार दबाने या ब्रेक लगाने से बचें और सामने वाली गाड़ी से पर्याप्त दूरी बनाकर रखें.
इंश्योरेंस में कवर जरूर शामिल करें
मानसून के मौसम में एक्सप्रेसवे पर जलभराव जैसी अनचाही घटनाओं से सुरक्षा के लिए अपनी कार के इंश्योरेंस में इंजन प्रोटेक्शन कवर एड-ऑन जरूर जोड़ें. सामान्य कॉम्प्रीहेंसिव इंश्योरेंस पॉलिसी में पानी घुसने से हुए इंजन के नुकसान को क्लेम के तहत कवर नहीं किया जाता है.
अगर आपके पास इंजन प्रोटेक्ट कवर होगा तो पानी के कारण इंजन में आई खराबी का पूरा खर्च बीमा कंपनी उठाएगी. एक्सप्रेसवे पर सफर के दौरान मौसम का हाल और जलभराव की जानकारी पहले से रखकर ही यात्रा की योजना बनाएं ताकि आप सुरक्षित रहें.
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