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Explainer: CM विजय को क्यों सताया परिसीमन का डर? विधानसभा में उठाया ये बड़ा कदम

August 12, 2026

What is delimitation: देश में एक बार फिर परिसीमन यानी लोकसभा सीटों के नए बंटवारे को लेकर सियासी माहौल गरम है. तमिलनाडु से लेकर केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश तक दक्षिण के राज्य इस मुद्दे पर लामबंद नजर आ रहे हैं. इसी बीच तमिलनाडु में हाल ही में सत्ता में आई थलपति विजय की सरकार ने खुद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाकर सबको चौंका दिया. अब तमिलनाडु CM विजय ने परिसीमन के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया है.


विधानसभा में तमिलनाडु के CM विजय ने कहा कि महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन 2029 के लोकसभा चुनाव में ही लागू किया जाना चाहिए, जो मौजूदा 543 चुनाव क्षेत्रों पर आधारित है. उनका कहना था कि महिलाओं के लिए 33% रिज़र्वेशन में अब और देरी नहीं होनी चाहिए. तमिलनाडु में पुरुषों से ज़्यादा महिलाओं ने वोट दिया है. महिलाओं को रिजर्वेशन देना कोई छूट नहीं है. यह सामाजिक न्याय का मामला है, महिलाओं के लिए 33% रिजर्वेशन बिना किसी और देरी के लागू किया जाना चाहिए.बता दें आखिर यह विवाद है क्या और दक्षिण भारत को किस बात का डर सता रहा है, इसे आसान भाषा में समझते हैं. उससे पहले ये बताना भी जरूरी है कि परिसीमन बदलते ही लोकसभा का पूरा गणित ही बदल जाएगा. 

परिसीमन का मतलब क्या होता है?

परिसीमन का सीधा मतलब है जनसंख्या के हिसाब से लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाएं और उनकी संख्या फिर से तय करना. संविधान में यह व्यवस्था है कि हर जनगणना के बाद यह प्रक्रिया होनी चाहिए, ताकि हर राज्य को उसकी आबादी के अनुपात में सदन में उतनी ही सीटें मिलें. सीधी भाषा में कहें तो जिस राज्य की आबादी जितनी ज्यादा बढ़ेगी, संसद में उसकी सीटें भी उतनी ही बढ़ेंगी.

1976 में सीटें फ्रीज क्यों की गई थीं?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 1976 में तत्कालीन सरकार ने 42वें संविधान संशोधन के जरिए एक बड़ा फैसला लिया. जिसमें हर राज्य में लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों की संख्या को 1971 की जनगणना के आधार पर फ्रीज यानी स्थिर कर दिया गया था. बताया जाता है कि इसके पीछे वजह थी परिवार नियोजन को बढ़ावा देना. दरअसल, सरकार को डर था कि अगर सीटें सीधे आबादी से जुड़ी रहीं तो जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम करेंगे उन्हें ही सजा के तौर पर कम सीटें मिल जाएंगी. बाद में बढ़ाकर इस निर्णय को 2026 तक के लिए बढ़ा दिया गया.

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दक्षिण भारत को अब किस बात का डर है? अच्छी नीति या बनेगी सजा 

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अब जब 2026 के बाद नई जनगणना के आधार पर परिसीमन की तैयारी है तो असली पेच सामने आ गया है. दरअसल,पिछले पांच दशकों में उत्तर भारत के राज्यों, खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की आबादी बहुत तेजी से बढ़ी है. वहीं तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे दक्षिणी राज्यों ने शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और परिवार नियोजन कार्यक्रमों को गंभीरता से लागू करते हुए अपनी जनसंख्या वृद्धि दर को काफी हद तक काबू में रखा.अगर अब सीधे मौजूदा आबादी के आधार पर सीटों का बंटवारा किया जाता है तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया उन्हीं का संसद में हिस्सा घट सकता है जबकि ज्यादा आबादी बढ़ाने वाले राज्यों की ताकत बढ़ जाएगी. दक्षिणी राज्यों का कहना है कि यह उनकी अच्छी नीतियों की सजा जैसा होगा.

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तमिलनाडु में सीएम विजय ने विरोध की कमान क्यों संभाली?

तमिलनाडु में इस साल हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम यानी TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और उन्होंने राज्य में सरकार बनाई है. सत्ता संभालते ही विजय ने परिसीमन के मुद्दे को प्राथमिकता से उठाया है. उन्होंने राज्य के सभी सांसदों की सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें यह सहमति बनी कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या को फ्रीज रखा जाए और तमिलनाडु की 39 सीटों में किसी तरह की कटौती न की जाए. इस मुद्दे पर विधानसभा में प्रस्ताव भी पेश कर दिया गया है. 

महिला आरक्षण कानून का इससे क्या संबंध है?

एक अहम पहलू यह भी है कि महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का प्रावधान तभी लागू होगा जब नया परिसीमन हो जाएगा. यही वजह है कि परिसीमन और महिला आरक्षण दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हुए माने जाते हैं. सरकार के अनुमानों के मुताबिक परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की कुल संख्या मौजूदा 543 से बढ़कर सैकड़ों में पहुंच सकती है जिससे राज्यवार सीटों का गणित पूरी तरह बदल जाएगा. फिलहाल परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार की तरफ से अंतिम फैसला नहीं आया है. जब तक संसद में इससे जुड़ा विधेयक पेश और पारित नहीं होता, तब तक सीटों की असली संख्या और राज्यों के बीच उनका बंटवारा तय नहीं माना जा सकता.

FAQ

सवाल: परिसीमन आसान शब्दों में क्या है?
जवाब: जनसंख्या के आधार पर लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाएं और उनकी कुल संख्या फिर से तय करने की प्रक्रिया को परिसीमन कहते हैं.

सवाल: 1976 में सीटें फ्रीज क्यों की गई थीं?
जवाब: परिवार नियोजन को बढ़ावा देने और जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में अच्छा काम किया, उन्हें नुकसान से बचाने के लिए 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों को स्थिर कर दिया गया था.

सवाल: दक्षिण भारत के राज्यों को किस बात का सबसे ज्यादा डर है?
जवाब: उन्हें डर है कि आबादी के आधार पर सीधे सीटों का बंटवारा होने पर जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में सफलता पाई, उन्हीं की संसद में सीटें और ताकत घट जाएगी.

सवाल: तमिलनाडु के सीएम विजय ने क्या मांग रखी है?
जवाब: उन्होंने मांग की है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को फ्रीज रखा जाए और तमिलनाडु की 39 सीटों में कोई कटौती न हो.

सवाल: क्या परिसीमन पर विपक्षी दल विजय के साथ हैं?
जवाब: पूरी तरह नहीं. डीएमके और एआईएडीएमके जैसे दलों ने विजय की सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया और कहा कि संसद में विधेयक आने के बाद ही अंतिम रुख तय होना चाहिए.

सवाल: परिसीमन का महिला आरक्षण कानून से क्या संबंध है?
जवाब: महिला आरक्षण कानून के तहत लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तभी लागू होगा, जब नया परिसीमन पूरा हो जाएगा. इसलिए दोनों मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं.

सवाल: क्या परिसीमन पर अंतिम फैसला हो चुका है?
जवाब: नहीं. अभी संसद में इससे जुड़ा विधेयक पारित होना बाकी है, इसलिए सीटों की असली संख्या और बंटवारा अभी तय नहीं है.

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