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Explainer: दिल्ली में तेजी से बढ़े स्वाइन फ्लू के मामले, जानें क्या हैं लक्षण, कैसे करें मुकाबला?

August 23, 2026

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामले में काफी तेजी देखने को मिल रही है. सरकार ने इससे बचाव को लेकर सतर्कता को बढ़ा दी है. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों और अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं. दिल्ली में इन्फ्लूएंजा ए के अब तक 2,392 केस सामने आ चुके हैं. इनमें स्वाइन फ्लू के 1,777 मामले सामने आए हैं. बढ़ते मामलों को देखते हुए सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है. सरकार का कहना है कि अस्पतालों में डॉक्टर, बेड और दवाइयों की किसी तरह की कोई कमी नहीं है. दिल्ली सरकार पूरी तरह से तैयार है, मरीजों को इलाज देने के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जाएंगे. 

स्वास्थ्य विभाग की लगातार नजर

स्वास्थ्य विभाग और अधिकारी लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं. स्वाइन फ्लू को फैलने से रोकने के लिए दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी परामर्श जारी करके लोगों से श्वसन संबंधी स्वच्छता का पालन करने को कहा है. इसके साथ भीड़भाड़ वाली जगहों से बचने और वक्त पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की है. 

इस साल राजधानी में इन्फ्लुएंजा-ए के 2,300 से अधिक केस सामने आए हैं. इनमें शुक्रवार तक एच1एन1 के 1,777 से अधिक केस मिले हैं. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अकेल गुरुवार को एच1एन1 के 114 मामले मिले हैं.  

डॉक्टरों ने मरीजों को दी खास सलाह 

स्वास्थ्य परामर्श में लोगों से कहा गया है कि खांसते या छींकते समय अपने मुंह और नाक को ढककर रखें, साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोने जरूरी हैं. भीड़भाड़ वाली जगहों से बचें या मास्क पहनें और श्वसन संबंधी बीमारी से पीडित लोगों से संपर्क से बचें. लोगों को आंखों और नाक छूने से बचना चाहिए. सार्वजनिक जगहों पर  न थूकने और पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेने को कहा गया है. परामर्श के तहत, अगर बुखार, खांसी, गले में खराश, सांस लेने में दिक्कत हो या शरीर में दर्द या सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो चिकित्सक की सलाह के बिना किसी तरह की दवा न लें. 

H1N1 में आमतौर पर ये लक्षण 

तेज बुखार या ठंड लगना, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान, कमजोरी, कुछ मामलों में उल्टी या दस्त के संकेत.

संक्रमण कैसे फैलता है?

H1N1 मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है. संक्रमित व्यक्ति के बहुत करीब रहने या दूषित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है.

सावधान रहने की जरूरत  

स्वाइन फ्लू से गंभीर बीमारी का खतरा खास तौर पर छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में अधिक हो सकता है. ऐसे लोगों में लक्षण आने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना बेहतर है.

स्वाइन फ्लू से कैसे बचें?

1. भीड़भाड़ में मास्क पहनें, खासकर बंद या कम हवादार जगहों पर.
2. हाथों को साफ रखें, साबुन-पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं.
3. खांसते-छींकते समय मुंह ढकें, टिश्यू या कोहनी का इस्तेमाल करें.
4. बीमार होने पर घर पर रहें, दूसरों के संपर्क में आने से बचें.
5. पर्याप्त आराम और पानी लें, बीमारी के दौरान शरीर को रिकवरी के लिए आराम दें.
6. बिना सलाह दवा न लें, फ्लू जैसे लक्षण होने पर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है.

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर बुखार या खांसी लगातार बनी रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो, ज्यादा कमजोरी महसूस हो या हालत तेजी से बिगड़े रही हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें. बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में लक्षणों  को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. 

भारत में H1N1 (स्वाइन फ्लू) का पहला मामला 16 मई 2009 को सामने आया था. यह मामला हैदराबाद में एक ऐसे शख्स में पाया गया था, जो विदेश से भारत आया था. इसके बाद वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन शुरू हुआ और 2009 में भारत के कई राज्यों में H1N1 के मामले तेजी से बढ़े. यह उस वक्त दुनिया भर में फैली 2009 H1N1 महामारी का हिस्सा था.

भारत में H1N1 का संक्षिप्त इतिहास

16 मई 2009  में भारत में पहला H1N1 केस, हैदराबाद में सामने आया था.  इसके बाद  संक्रमण कई राज्यों में फैला और महामारी जैसी स्थिति बनी. 2010 में WHO ने 10 अगस्त 2010 को H1N1 महामारी के post-pandemic phase की  घोषणा की. इसके बाद H1N1 भारत में seasonal influenza के रूप में समय-समय पर सामने आता रहा है.

स्वाइन को लेकर क्या हैं भ्रामक

भ्रम: स्वाइन फ्लू सिर्फ सूअरों से फैलता है
सच्चाई: इंसानों में H1N1 का संक्रमण व्यक्ति से व्यक्ति भी फैलता है, संक्रमित व्यक्ति की सांस, खांसी या छींक से निकलने वाली बूंदों के जरिए होता है. 

भ्रम: सूअर का मांस खाने से स्वाइन फ्लू हो जाता है
सच्चाई: अच्छी तरह पकाया गया पोर्क H1N1 संक्रमण का सामान्य स्रोत नहीं है. श्वसन मार्ग से फैलता है.

भ्रम: H1N1 यानी हमेशा जानलेवा बीमारी.
सच्चाई: अधिकांश संक्रमित लोग ठीक हो जाते हैं. कुछ लोगों में बीमारी गंभीर हो सकती है. खासकर बुजुर्गों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और कुछ अन्य हाई-रिस्क लोगों में सावधानी जरूरी है.

भ्रम: हर बुखार का मतलब स्वाइन फ्लू है.
सच्चाई: H1N1 के लक्षण सामान्य वायरल फ्लू जैसे हो सकते हैं-बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द और बदन दर्द. केवल लक्षण देखकर H1N1 की पुष्टि नहीं की जा सकती.

भ्रम: H1N1 सिर्फ सर्दियों में होता है.
सच्चाई: इसका संक्रमण साल के अलग-अलग समय में हो सकता है. मामलों में मौसमी उतार-चढ़ाव देखा जाता है.

भ्रम: H1N1 होने पर अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है.
सच्चाई: हर मरीज को अस्पताल की जरूरत नहीं होती. कई मामलों में डॉक्टर की सलाह के अनुसार घर पर देखभाल की जा सकती है. लेकिन सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या हालत बिगड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी है.

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