Aug 12, 2026 11:01 am ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- EPFO Updates: सैलरीड कर्मचारियों के लिए काफी अहम खबर है
- पीएफ के पैसे निकालने, नौकरी बदलने पर खाता ट्रांसफर करने और अन्य ईपीएफ सेवाओं से जुड़े कुछ बदलाव हो चुके हैं
- आइए जानते हैं ऐसे 5 जरूरी बदलावों के बारे में, जिनके बारे में हर सैलरीड कर्मचारी को पता होना चाहिए

EPFO के 5 बड़े बदलाव: कर्मचारी इन नए नियमों का जरूर रखें ध्यान
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने इस साल कई महत्वपूर्ण अपडेट पेश किए हैं, जो सैलरीड कर्मचारियों के लिए काफी अहम साबित हो सकते हैं। ये बदलाव पीएफ पैसे निकालने, नौकरी बदलने पर खाता ट्रांसफर करने और अन्य ईपीएफ सेवाओं से जुड़े हैं। कुछ अपडेट लागू हो चुके हैं, जबकि कुछ डिजिटल और आसान प्रक्रिया की दिशा में उठाए गए कदम हैं। आइए जानते हैं ऐसे 5 जरूरी बदलावों के बारे में, जिनके बारे में हर सैलरीड कर्मचारी को पता होना चाहिए।
पहला बदलाव: ऑटो-सेटलमेंट सुविधा का विस्तार
ईपीएफओ अब अपनी ऑटो-सेटलमेंट प्रोसेस को बढ़ाकर अंतिम पीएफ विदड्रॉल प्रक्रिया को भी शामिल करने की योजना बना रहा है। केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त रमेश कृष्णमूर्ति ने मई में एक कार्यक्रम में बताया कि अभी तक केवल 5 लाख रुपये तक के एडवांस पीएफ दावे ही ऑटो-सेटलमेंट मोड से प्रोसेस होते थे, लेकिन अब इस सुविधा को अंतिम निकासी पर भी लागू किया जाएगा। इससे सदस्यों को तेज और परेशानी मुक्त प्रक्रिया का लाभ मिलेगा।
दूसरा बदलाव: यूएएन एक्टिवेशन अब उमंग ऐप पर
नए या मौजूदा ईपीएफओ सदस्य अब यूनिफाइड मेंबर पोर्टल के जरिए अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) एक्टिवेट या जेनरेट नहीं कर पाएंगे, क्योंकि ये दोनों सेवाएं अब उमंग ऐप पर शिफ्ट कर दी गई हैं। अब इसके लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। यह बदलाव डेटाबेस कंसोलिडेशन और सॉफ्टवेयर अपग्रेड के बाद किया गया है, ताकि ऑनलाइन सेवाएं तेज और अधिक भरोसेमंद बन सकें।
तीसरा बदलाव: पीएफ ट्रांसफर प्रक्रिया हुई ऑटोमैटिक
अब नौकरी बदलने पर पीएफ बैलेंस ट्रांसफर करना बेहद आसान हो गया है। ईपीएफओ की वेबसाइट के अनुसार, आधार-लिंक्ड और केवाईसी-कंप्लायंट यूएएन धारकों के लिए यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑटोमैटिक हो जाएगी। इस नियम के लागू होने से अलग से ट्रांसफर एप्लिकेशन देने की जरूरत नहीं रहेगी, जिससे कागजी कार्रवाई और अतिरिक्त परेशानी दोनों कम हो जाएंगी। पहले पीएफ अकाउंट ट्रांसफर के लिए पुराने और नए नियोक्ता के साथ-साथ ईपीएफओ कार्यालय से भी मंजूरी लेनी पड़ती थी।
चौथा बदलाव: तेजी से निपटेंगे ईपीएफ और ईपीएस क्लेम
ईपीएफओ ने उम्मीद जताई है कि अब अधिकांश नए पीएफ निकासी दावों का निपटारा उसी दिन या अधिकतम दो दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। कृष्णमूर्ति ने पिछले महीने एक उद्योग सम्मेलन में यह जानकारी दी। साथ ही, ईपीएस 2026 के तहत पेंशन दावों के प्रोसेसिंग के लिए 20 दिन की सख्त समय-सीमा तय की गई है। यदि ईपीएफओ बिना किसी वैध कारण के इस अवधि में दावे का निपटारा नहीं करता है, तो विलंबित राशि पर 12% वार्षिक ब्याज देना होगा, जो जिम्मेदार आयुक्त से वसूला जा सकता है।
पांचवां बदलाव: यूपीआई और एटीएम से पीएफ निकासी की सुविधा
जल्द ही भीम ऐप के जरिए पीएफ दावों के निपटारे की सुविधा शुरू होने वाली है, जिससे क्लेम सीधे सदस्यों के यूपीआई-लिंक्ड बैंक खातों में क्रेडिट होंगे। कृष्णमूर्ति ने जुलाई में यह घोषणा की थी कि इसको लगभग एक महीने में लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इस बारे में अभी कोई और स्पष्ट जानकारी या अपडेट नहीं आया है, लेकिन उम्मीद है कि यह सुविधा इसी महीने शुरू हो सकती है। यह कदम पीएफ निकासी को और अधिक आसान और त्वरित बनाएगा।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
