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ED ने पकड़ा तृणमूल का अंदरूनी खेल! दूसरे ने दिए विमानन कंपनी को 8.90 लाख प्रति घंटा लेकिन TMC ने चुकाए 28.04 लाख

September 14, 2026

Sep 14, 2026 10:28 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता

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TMC ने कुल 224 घंटे और 27 मिनट की उड़ान के लिए लगभग ₹37.17 करोड़ का भुगतान किया। वहीं अन्य ग्राहकों के लिए यह विमान 1,458 घंटे और 19 मिनट उड़ाया गया, जिससे कंपनी को कुल ₹112 करोड़ की प्राप्ति हुई ।

Mamata Banerjee

तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी।

केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल की मुख्य विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आर्थिक गड़बड़ियों का पर्दाफाश किया है। ED की जांच से पता चला है कि TMC ने Carewell Aviation India Pvt Ltd द्वारा संचालित एम्ब्रेयर लेगेसी 600 (Embraer Legacy 600) विमान के लिए अन्य ग्राहकों की तुलना में काफी अधिक दर पर भुगतान किया है। ED सूत्रों ने बताया कि एयरक्राफ्ट के फ्लाइंग रिकॉर्ड और रसीदों के विश्लेषण से पता चला है कि TMC ने Embraer Legacy 600 के लिए प्रति फ्लाइंग घंटा औसतन 16.56 लाख रुपये का भुगतान किया है, जबकि जांच की अवधि के दौरान Carewell Aviation ने दूसरे क्लाइंट्स से प्रति घंटा औसतन 7.68 लाख रुपये ही लिए।

मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि डेटा से पता चलता है कि TMC द्वारा भुगतान किया गया रेट, Carewell को दूसरे ग्राहकों से मिले औसत रेट का लगभग 2.15 गुना था। ED के विश्लेषण के अनुसार, यह अंतर चुनावी साल यानी 2026 में खास तौर पर ज़्यादा देखा गया। एक अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि TMC ने VT-KOL के तौर पर पहचाने गए एक एयरक्राफ्ट के लिए प्रति फ्लाइंग घंटा औसतन 28.04 लाख रुपये का भुगतान किया है, जबकि उसी साल Carewell को दूसरे क्लाइंट्स से प्रति घंटा औसतन लगभग 8.90 लाख रुपये मिले हैं। यानी TMC ने विमानन कंपनी को तीन गुना से भी ज्यादा दर से कीमत चुकाई है।

चार साल के किराए और विमान इस्तेमाल की जांच

प्रवर्तन निदेशालय की यह जांच विधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी (FIR) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज ECIR पर आधारित है। इसके तहत ED ने चार साल तक एयरक्राफ्ट के ऑपरेशन की जांच की है। 2023 में, TMC ने एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल लगभग 12 घंटे किया और 2.12 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जिसका मतलब है कि प्रति फ्लाइंग घंटा औसत भुगतान लगभग 17.53 लाख था।

वहीं 2024 में, इसका इस्तेमाल बढ़कर लगभग 82 घंटे हुआ, जिसके लिए 12.74 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, यानी प्रति घंटा लगभग 15.50 लाख। 2025 में, TMC ने एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल लगभग 96 घंटे किया और फिर से ₹12.74 करोड़ का भुगतान किया, जिसका मतलब है कि प्रति घंटा लगभग ₹13.27 लाख का भुगतान हुआ। ED के डेटा से पता चलता है कि 2026 में TMC ने लगभग 34 घंटे तक एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया, लेकिन इसके लिए ₹9.56 करोड़ का भुगतान किया। इस हिसाब से प्रति फ्लाइंग घंटा प्रभावी दर लगभग ₹28.04 लाख रही।

कुल उड़ान और भुगतान

एक अधिकारी ने बताया कि इस दौरान TMC का कुल इस्तेमाल लगभग 224 घंटे 27 मिनट का रहा, जिसके लिए Carewell को लगभग ₹37.17 करोड़ मिले। इसका औसत प्रति फ्लाइंग घंटा लगभग ₹16.56 लाख बैठता है। एजेंसी के विश्लेषण के मुताबिक, इसकी तुलना में दूसरे क्लाइंट्स के लिए एयरक्राफ्ट को लगभग 1,458 घंटे 19 मिनट तक उड़ाया गया, जिससे लगभग ₹112 करोड़ की कमाई हुई, यानी प्रति फ्लाइंग घंटा औसत लगभग ₹7.68 लाख रहा। ईडी इस बढ़े हुए भुगतान की पीछे मनी लॉन्ड्रिंग का खेल समझकर उसकी जांच कर रही है।

जांच का दायरा और टीएमसी का पक्ष

एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि यह तुलना ED की उस जांच का हिस्सा है जिसमें चार्टर व्यवस्था की कमर्शियल शर्तों और इस बात की पड़ताल की जा रही है कि क्या TMC द्वारा किया गया भुगतान एयरक्राफ्ट के असल इस्तेमाल और मौजूदा दरों के हिसाब से सही था। जांच में TMC के एविएशन से जुड़े कुल खर्च और Carewell के साथ लंबे समय के समझौते के बावजूद दूसरे ऑपरेटर्स से एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं के इस्तेमाल की भी पड़ताल की गई है। इसके अलावा पार्टी द्वारा अन्य ऑपरेटरों से ली गई विमान और हेलीकॉप्टर सेवाओं और फंड ट्रांसफर के प्रवाह की भी जांच की जा रही है। वहीं दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इन सभी आरोपों को बार-बार खारिज किया है और इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित करार दिया है।