न्यूयॉर्क (उत्तम हिन्दू न्यूजू) : अमेरिका में निवेश के जरिए ग्रीन कार्ड हासिल करने की योजना बना रहे भारतीयों के लिए अहम बदलाव होने जा रहा है। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (USCIS) ने EB-5 इमीग्रेंट इन्वेस्टर प्रोग्राम के तहत कई शुल्कों में भारी बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। नए नियम 30 नवंबर 2026 से लागू होंगे। इससे अमेरिका में निवेश के जरिए स्थायी निवास हासिल करने की कोशिश कर रहे भारतीय निवेशकों और उनके परिवारों की इमिग्रेशन लागत बढ़ जाएगी।
EB-5 प्रोग्राम के तहत खुद निवेश करने वाले आवेदकों के लिए फॉर्म I-526 की फीस 3,675 डॉलर से बढ़ाकर 7,615 डॉलर कर दी गई है। वहीं, रीजनल सेंटर के जरिए निवेश करने वाले आवेदकों के फॉर्म I-526E की फीस 3,675 डॉलर से बढ़कर 7,850 डॉलर हो जाएगी। इन दोनों शुरुआती याचिकाओं पर 75 डॉलर की अतिरिक्त टेक्नोलॉजी फीस भी लागू होगी। ग्रीन कार्ड पर लगी शर्तों को हटाने के लिए दाखिल किए जाने वाले फॉर्म I-829 की फीस भी बढ़ाई गई है। यह फीस 3,750 डॉलर से बढ़कर 5,000 डॉलर हो जाएगी।
रीजनल सेंटर की फीस में भी बड़ा इजाफा
नए नियमों के तहत रीजनल सेंटर से जुड़ी फीस में भी बड़ी बढ़ोतरी होगी। फॉर्म I-956 के जरिए रीजनल सेंटर की मान्यता के लिए फीस 17,795 डॉलर से बढ़कर 44,115 डॉलर हो जाएगी। वहीं, फॉर्म I-956F की फीस बढ़ाकर 42,675 डॉलर कर दी गई है।
USCIS के अनुसार, एजेंसी अपनी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा आवेदन फीस से मिलने वाले राजस्व के जरिए संचालित करती है। इसमें आवेदनों की जांच, पृष्ठभूमि की जांच, पात्रता का सत्यापन और धोखाधड़ी रोकने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
10.5 लाख डॉलर तक का निवेश जरूरी
EB-5 कार्यक्रम के तहत विदेशी निवेशक अमेरिका में किसी योग्य कारोबारी परियोजना में निवेश करके और कम से कम 10 पूर्णकालिक नौकरियां पैदा करके स्थायी निवास के लिए पात्र बन सकते हैं। मौजूदा नियमों के तहत सामान्य निवेश की न्यूनतम राशि 10.5 लाख डॉलर है, जबकि लक्षित रोजगार क्षेत्र या इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में न्यूनतम 8 लाख डॉलर का निवेश करना होता है। इस कार्यक्रम में निवेशक के साथ उसके पति या पत्नी और पात्र बच्चे भी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।
भारतीय निवेशकों पर बढ़ेगा खर्च
पिछले कुछ वर्षों में भारत से EB-5 कार्यक्रम के लिए मांग बढ़ी है। इसके चलते भारतीय आवेदकों के लिए बैकलॉग भी बना हुआ है, जिससे ग्रीन कार्ड हासिल करने के लिए प्रतीक्षा अवधि प्रभावित हो सकती है। ऐसे में आवेदन फीस में हुई बड़ी बढ़ोतरी से भारतीय निवेशकों की कुल इमिग्रेशन लागत और बढ़ने की संभावना है।
हालांकि, फीस में बदलाव के बावजूद निवेश की मूल पात्रता, न्यूनतम निवेश राशि और रोजगार सृजन जैसी शर्तें अपने संबंधित नियमों के तहत लागू रहेंगी।
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