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Durga Ashtami 2026: कब है दुर्गा अष्टमी? जानें तारीख, मां महागौरी और कन्या पूजन की आसान विधि

October 17, 2026

Updated: Sat, 17 Oct 2026 08:57 PM (IST)

मां महागौरी और कन्या पूजन को दर्शाती तस्वीर (फोटो-एआई)

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Durga Ashtami 2026: नवरात्र की अष्टमी को दुर्गा अष्टमी या महा अष्टमी कहा जाता है. इस साल नवरात्र में दुर्गा अष्टमी कब है, मां महागौरी की पूजा और कन्या पूजन की आसान विधि जानें.

Durga Ashtami 2026: शारदीय नवरात्र की अष्टमी तिथि को महा अष्टमी के नाम से जाना जाता है. इस दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा की जाती है. इसके अलावा इस दिन महिलाएं व्रत रखकर मां दुर्गा का खोइछा भरती हैं. यह रस्म झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से निभाया जाता है. आइए जानते हैं कि दुर्गा अष्टमी कब है, महा अष्टमी का व्रत कब रखा जाएगा और कन्या पूजन कैसे करें.

दुर्गा अष्टमी कब है?

महावीर और मिथिला पंचांग के अनुसार, नवरात्र में दुर्गा अष्टमी 18 अक्टूबर 2026, रविवार को है. महावीर पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 54 मिनट पर होगी.

अष्टमी तिथि की समाप्ति 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को सुबह 7 बजकर 53 मिनट पर होगी. महा अष्टमी का व्रत और महानिशा पूजा 18 अक्टूबर 2026 को ही निभाई जाएगी. इसके अलावा इस दिन महानिशा पूजा भी की जाएगी. अष्टमी का पूजन शाम के समय किया जाता है.

दुर्गा अष्टमी मुहूर्त को दर्शाती इंफोग्राफिक्स (फोटो- एआई)
दुर्गा अष्टमी मुहूर्त को दर्शाती इंफोग्राफिक्स (फोटो- एआई)

महा अष्टमी 2026: मां महागौरी की पूजा विधि

महा अष्टमी के दिन सुबह नहाकर साफ-सुथरे कपड़े पहनें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ करें, गंगाजल से पवित्र करें. मां दुर्गा के आठवें स्वरूप देवी महागौरी की की तस्वीर स्थापित करें. अगर पहले से स्थापित है, तो न करें. पूजा स्थान पर दीपक जलाएं और मां महागौरी का ध्यान करें. मन ही मन पूजा का संकल्प लें. देवी महागौरी को लाल फूल, अक्षत, रोली, धूप, फल आदि चढ़ाएं. मां महागौरी के मंत्र का जाप करें. दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. सच्ची श्रद्धा से माता महागौरी की आरती करें. मां महागौरी से सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें. आरती करने के बाद प्रसाद बांटें.

अष्टमी के दिन कैसे करें कन्या पूजन

नवरात्र की अष्टमी को भी कन्या पूजन की परंपरा है. इस दिन दो से 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन करने का विधान है. इसलिए महा अष्टमी के दिन पहले उन्हें निमंत्रण दें. कन्या को घर बुलाएं और सबसे पहले उनके पैर धोएं. इसके बाद उन्हें आदरपूर्वक बिठाएं. इतना करने के बाद उन्हें श्रद्धा पूर्वक भोजन कराएं. भोजन के बाद उन्हें कुछ उपहार या दक्षिणा (अपनी क्षमता के अनुसार) दें.

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