Published: Saturday, July 25, 2026, 16:13 [IST]
Dharmendra Pradhan Tenure: केंद्रीय शिक्षा मंत्री के तौर पर धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल कई बड़े फैसलों और विवादों के बीच रहा। उनके कार्यकाल में देश की शिक्षा व्यवस्था को बदलने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 को लागू करने पर खास जोर दिया गया। IIT और IIM जैसे संस्थानों के विस्तार से लेकर मेडिकल की पढ़ाई को क्षेत्रीय भाषाओं में शुरू करने तक कई अहम कदम उठाए गए। वहीं, परीक्षा कराने वाली संस्था NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद उसमें सुधार के लिए उच्च स्तरीय समिति बनाई गई।
दूसरी ओर, NEET-UG में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों ने सरकार की मुश्किलें बढ़ाईं। UGC-NET परीक्षा रद्द होने के बाद भी विवाद थमा नहीं। छात्रों के प्रदर्शन और विपक्ष के दबाव के बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर सामने आई।
NEP 2020 रहा सबसे बड़ा बदलाव
धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने का काम तेजी से आगे बढ़ा। इसे करीब 30 साल बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में सबसे बड़े बदलावों में से एक माना गया। नई नीति के तहत पढ़ाई के पुराने तरीकों में बदलाव, छात्रों को अलग-अलग विषय चुनने की आजादी और शिक्षा को ज्यादा व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया।
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IIT-IIM के विस्तार पर फोकस
उच्च शिक्षा के क्षेत्र में IIT और IIM जैसे प्रमुख संस्थानों के विस्तार को भी प्राथमिकता दी गई। सरकार की कोशिश रही कि देश में उच्च शिक्षा के ज्यादा अवसर तैयार हों और छात्रों को बेहतर संस्थानों तक पहुंच मिल सके। इसी दौरान मेडिकल की पढ़ाई को क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए गए। इसका मकसद उन छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा को आसान बनाना था, जिन्हें अंग्रेजी में पढ़ाई करने में परेशानी होती है।
NTA में सुधार के लिए बनी समिति
परीक्षाओं को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की व्यवस्था में सुधार की जरूरत महसूस हुई। इसके लिए इसरो के पूर्व प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई। समिति को परीक्षा प्रक्रिया को बेहतर बनाने और NTA की कार्यप्रणाली में जरूरी बदलाव सुझाने की जिम्मेदारी दी गई।
NEET को CBT मोड में कराने का फैसला
परीक्षा व्यवस्था को और सुरक्षित बनाने के लिए NEET को कंप्यूटर आधारित टेस्ट यानी CBT मोड में कराने का फैसला भी अहम रहा। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और पेपर आधारित परीक्षा से जुड़ी संभावित गड़बड़ियों को कम करना था।
NEET-UG विवाद ने बढ़ाई परेशानी
हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में सबसे बड़ा विवाद NEET-UG परीक्षा को लेकर सामने आया। 3 मई को आयोजित परीक्षा के बाद पेपर लीक और दूसरी अनियमितताओं के आरोप लगे। मामले ने जल्द ही बड़ा रूप ले लिया और देश के कई हिस्सों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परीक्षा की प्रक्रिया और नतीजों को लेकर छात्रों के साथ-साथ विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाए। प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों और परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार दबाव बढ़ता गया।
UGC-NET रद्द होने से बढ़ा विवाद
NEET-UG विवाद के बीच UGC-NET परीक्षा भी सवालों के घेरे में आ गई। डार्कनेट पर पेपर लीक होने की जानकारी सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया। इस फैसले ने NTA की परीक्षा व्यवस्था को लेकर पहले से चल रही बहस को और तेज कर दिया।
जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन
NEET और दूसरी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों का आंदोलन लंबे समय तक जारी रहा। जंतर-मंतर पर भी प्रदर्शन हुए और विपक्षी दलों ने सरकार पर दबाव बढ़ाया। परीक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के भविष्य को लेकर सरकार से जवाब मांगा गया। इसी बीच 25 जुलाई 2026 को धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस तरह उनका कार्यकाल एक ओर NEP 2020 जैसे बड़े शिक्षा सुधारों और IIT-IIM के विस्तार के लिए चर्चा में रहा, तो दूसरी ओर NEET-UG और UGC-NET विवादों ने भी उनके कार्यकाल पर गहरी छाप छोड़ी।
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