कोटा2 घंटे पहले
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कोटा में लाडपुरा रेंजर नरेंद्र पाल सिंह की ओर से डीएफओ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाने के बाद वन विभाग में विवाद खड़ा हो गया है। सीसीएफ को भेजी शिकायत में रेंजर नरेंद्र पाल सिंह ने डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव पर आरोप लगाया है कि उन्होंने पुराने वसूली चैनल को फॉलो करने का दबाव बनाया।
ऐसा नहीं करने पर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए प्रताड़ित किया। रेंजर ने 6 अगस्त को डीएफओ के खिलाफ मेल के जरिए दादाबाड़ी व किशोरपुरा थाने में शिकायत भेजी है। उन्होंने कार्रवाई की मांग की है।
अवैध वसूली का हिस्सा बनने से इनकार करने पर उन्हें एपीओ कर जयपुर लगा दिया गया और वेतन भी रोक दिया। इसी प्रताड़ना के कारण उन्होंने पद से इस्तीफा दे दिया। इधर, डीएफओ ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ड्यूटी और उच्चाधिकारियों के प्रति रेंजर का रवैया गैर-जिम्मेदाराना है, इसलिए उन्हें एपीओ किया है।
इस्तीफा बिना किसी दबाव के दिया है। अब नरेंद्र पाल की जगह बालूराम सहारण को नया रेंजर बनाया गया है, जिन्होंने शुक्रवार को कार्यभार संभाल लिया है।
रेंज के खर्चे निकालने और ऊपर पैसे पहुंचाने का दवाव बनाया-रेंजर
रेंजर नरेंद्र पाल सिंह ने अधिकारियों को दी शिकायत में कहा कि जब उन पर रेंज के खर्चे निकालने और ऊपर पैसे पहुंचाने का दवाव बनाया गया तो उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया था। रेंज के जो भी जरूरी खर्वे (30-40 हजार रुपए) होंगे, उन्हें वे अपनी तनख्वाह से दे देंगे, लेकिन भ्रष्टाचार का एक पैसा न खुद लेंगे और न ऊपर देंगे। डीएफओ के डर से रेज अफिस के कर्मचारी और टाइपिस्ट इतने सहमे थे कि वे विभागीय पत्र टाइप करने से भी कतराने लगे। इसलिए बाहर ई-मित्र केंद्र पर जाकर उच्च अधिकारियों को भेजे जाने वाले पत्र टाइप करवाने पड़े।

लापरवाही और निष्क्रियता को छिपाने के लिए आरोप लगाए-डीएफओ
लापरवाही और निष्क्रियता को छिपाने के लिए आरोप लगाए-डीएफओ
इधर, डीएफओ एके श्रीवास्तव ने संभागीय मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर कहा कि रेंजर की ओर से राजकीय कार्यों में बरती जा रही घोर लापरवाही और निष्क्रियता को छिपाने के लिए ये आरोप लगाए। रेंजर ने 13 जुलाई 2026 को कार्यभार संभाला था. लेकिन 8 नाकों की 48 एक्टिव पौधरोपण साइटों में से वे 20 दिन में मात्र 5 साइट पर ही पहुंचे। अवैध खनन और अतिक्रमण पर एक भी कार्रवाई नहीं की।ढाड़ देवी माता मंदिर के पास वन भूमि पर दोबारा बने अवैध ढाबों पर कार्रवाई करने की बजाय उन्होंने पुलिस को केवल पत्र लिखकर खानापूर्ति कर ली।
एसीएस, फॉरेस्ट आनंद कुमार ने कहा इस मामले की जानकारी ली जा रही है कि इसमें सच्चाई क्या है। लिखित शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में एसीएस फॉरेस्ट आनंद कुमार का कहना है मामले की जानकारी ली जा रही लिखित शिकायत मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पीसीसीएफ वन विभाग जयपुर पीके उपाध्याय ने बताया कि डीएफओ और रेंजर दोनों ने अपना-अपना पक्ष रखा है। जो आरोप लगाए गए है उनको जांच करवई जाएगी। जांच रिपोर्ट आने तक रेंजर को एपीओ कर अजमेर मुख्यालय लगाया है।
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