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DAVV में नकल जांच पर नया संकट: जब्त मोबाइल की बैटरी हो रही खत्म, अब तुरंत होगी डिजिटल जांच - Haribhoomi

September 8, 2026

DAVV में नकल के दौरान जब्त किए गए मोबाइल लंबे समय तक जमा रहने से उनकी बैटरी खत्म हो रही है, जिससे डिजिटल सबूतों की जांच प्रभावित होती है। विश्वविद्यालय में हर साल करीब 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। अब फोन जब्त होते ही तकनीकी जांच के लिए अलग समिति बनाई जाएगी, ताकि डिजिटल सबूत सुरक्षित रहें और मामलों का फैसला जल्दी हो सके।

DAVV, Indore

DAVV में नकल जांच पर नया संकट: जब्त मोबाइल की बैटरी हो रही खत्म

  • Published: 08 Sep 2026, 10:48 AM IST
  • Last Updated: 08 Sep 2026, 10:48 AM IST

इंदौर: देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में नकल के मामलों की जांच अब नई तकनीकी व्यवस्था से की जाएगी। परीक्षा के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन लंबे समय तक जमा रहने के कारण बंद हो रहे हैं। इससे फोन में मौजूद डिजिटल सबूतों की जांच प्रभावित हो रही है। इसी समस्या को देखते हुए विश्वविद्यालय ने मोबाइल की तुरंत तकनीकी जांच के लिए अलग समिति बनाने का फैसला लिया है।

DAVV में हर साल करीब 300 नकल प्रकरण सामने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या उन मामलों की होती है, जिनमें छात्रों के मोबाइल फोन जब्त किए जाते हैं। मौजूदा व्यवस्था में मोबाइल को पहले रिकॉर्ड में जमा किया जाता है और बाद में मामला अनफेयर मीन्स कमेटी के सामने पहुंचता है। जांच शुरू होने तक कई सप्ताह या महीने बीत जाते हैं।

बैटरी खत्म होने से जांच में परेशानी
लंबे समय तक बंद पड़े रहने के कारण मोबाइल की बैटरी पूरी तरह डिस्चार्ज हो जाती है। ऐसे में फोन चालू करने में परेशानी होती है और डिजिटल डेटा की जांच में भी अतिरिक्त समय लग जाता है। कई मामलों में समिति के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि छात्र ने परीक्षा के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल किया था या वह सिर्फ उसके पास मिला था।

मोबाइल की जांच से यह भी पता लगाया जा सकता है कि परीक्षा के दौरान छात्र ने फोन में क्या देखा, कितनी देर उसका इस्तेमाल किया और किस तरह की जानकारी तक पहुंच बनाई। लेकिन समय पर जांच नहीं होने से जरूरी डिजिटल सबूतों का इस्तेमाल मुश्किल हो जाता है।

अब फोन जब्त होते ही शुरू होगी जांच
विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने इस समस्या के समाधान के लिए अलग जांच समिति बनाने को मंजूरी दे दी है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के अनुसार, नई समिति सिर्फ मोबाइल से जुड़े नकल मामलों की जांच करेगी। फोन जब्त होने के तुरंत बाद उसकी तकनीकी जांच शुरू की जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मोबाइल में मौजूद डिजिटल जानकारी को समय रहते सुरक्षित करना और नकल की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करना है। इससे यह तय करने में भी मदद मिलेगी कि छात्र ने मोबाइल का कितना और किस उद्देश्य से इस्तेमाल किया था।

विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद नकल मामलों की जांच में लगने वाला समय कम होगा और डिजिटल सबूतों के आधार पर ज्यादा स्पष्ट निर्णय लिए जा सकेंगे। इससे छात्रों के मामलों का निपटारा भी तेजी से होने की संभावना है।