Datia Upchunav 2026: मध्य प्रदेश की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल दतिया में होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस ने वरिष्ठ नेता घनश्याम सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। घनश्याम सिंह दतिया राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और क्षेत्र की राजनीति में तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय हैं।
वे पूर्व शासक परिवार के सदस्य हैं। उनके पिता महाराज कृष्ण सिंह जूदेव वर्ष 1984 में कांग्रेस के टिकट पर दतिया लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। घनश्याम सिंह ने अर्थशास्त्र में एमए की पढ़ाई की है और लंबे समय से कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं।
1993 में पहली जीत, कई बार विधानसभा पहुंचे
घनश्याम सिंह ने वर्ष 1993 में पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधानसभा चुनाव जीतकर विधायक बनने का गौरव हासिल किया। वर्ष 1998 में उन्हें टिकट नहीं मिला, जबकि 2003 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे।
इसके बाद 2008 में कांग्रेस उम्मीदवार रहे, लेकिन जीत नहीं मिली। 2013 में सेवढ़ा सीट से चुनाव लड़ा और भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से हार गए। 2018 में उन्होंने सेवढ़ा सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में वापसी की, जबकि 2023 के चुनाव में उन्हें फिर हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस ने क्यों जताया भरोसा
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने अनुभवी चेहरे पर दांव खेलते हुए घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी को उम्मीद है कि उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठन में मजबूत पकड़ और दतिया-सेवढ़ा क्षेत्र में जनाधार का फायदा चुनाव में मिलेगा। दतिया उपचुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है।
दतिया उपचुनाव का पूरा कार्यक्रम
भारत निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 6 जुलाई को अधिसूचना जारी हो चुकी है। 13 जुलाई तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। 14 जुलाई को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 16 जुलाई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे। 30 जुलाई को मतदान होगा और 3 अगस्त को मतगणना के बाद चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
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दतिया में सीधा मुकाबला
दतिया उपचुनाव में कांग्रेस ने घनश्याम सिंह पर भरोसा जताया है, जबकि भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में दतिया की यह सीट एक बार फिर प्रदेश की सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी लड़ाइयों में शामिल हो गई है। दोनों दलों ने चुनाव प्रचार तेज कर दिया है और अब मुकाबला सीधे कांग्रेस के घनश्याम सिंह और भाजपा के आशुतोष तिवारी के बीच होगा।
अर्थशास्त्र के छात्र से राजनीति तक का सफर
घनश्याम सिंह ने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध किशोरी रमण कॉलेज, मथुरा से वर्ष 1976 में अर्थशास्त्र में एमए की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने सामाजिक गतिविधियों और कृषि कार्यों के साथ सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा और कांग्रेस के साथ जुड़कर क्षेत्र की राजनीति में अपनी पहचान बनाई।
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कृषि को बनाया आजीविका का आधार
राजनीति के साथ-साथ घनश्याम सिंह खेती-किसानी से भी जुड़े रहे हैं। चुनाव आयोग में दिए गए शपथ पत्र के अनुसार उन्होंने कृषि को अपना प्रमुख व्यवसाय बताया है। कृषि के अलावा उनकी आय के स्रोतों में किराया और विधायक पेंशन भी शामिल हैं। लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्र से जुड़े रहने के कारण किसानों और गांवों के मुद्दों पर भी उनकी पकड़ मानी जाती है।
चुनावी हलफनामे में नहीं दर्ज कोई आपराधिक मामला
घनश्याम सिंह की छवि साफ-सुथरे नेताओं में गिनी जाती है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए चुनावी शपथ पत्र के अनुसार उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। वहीं उन्होंने अपनी चल और अचल संपत्ति का पूरा विवरण भी चुनाव आयोग के सामने प्रस्तुत किया था, जिसमें करोड़ों रुपये की संपत्ति का उल्लेख किया गया था।
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सेवढ़ा से बनाई अलग राजनीतिक पहचान
हालांकि घनश्याम सिंह दतिया राजघराने से आते हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों में उन्होंने सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र से अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर पार्टी को महत्वपूर्ण सफलता दिलाई थी। अब दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस ने एक बार फिर उनके अनुभव और जनाधार पर भरोसा जताया है।
करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं घनश्याम सिंह
घनश्याम सिंह ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए शपथ पत्र में अपनी चल और अचल संपत्ति का विवरण भी सार्वजनिक किया था। चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके पास करीब 15 करोड़ रुपये की संपत्ति है, जबकि उन पर लगभग 26 लाख रुपये की देनदारियां दर्ज हैं। चुनाव आयोग को दी गई यह जानकारी उनके आधिकारिक शपथ पत्र का हिस्सा है।
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