जांच में सामने आया कि CREST के CEO के पद पर रहते हुए नवनीत श्रीवास्तव ने अन्य आरोपियों के साथ कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची और CREST के धन का दुरुपयोग किया
Published byJalaj Kumar Mishra
जांच में सामने आया कि CREST के CEO के पद पर रहते हुए नवनीत श्रीवास्तव ने अन्य आरोपियों के साथ कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची और CREST के धन का दुरुपयोग किया
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चंडीगढ़ के CREST-IDFC फ्रॉड मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय वन सेवा (IFoS) के अधिकारी और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (CREST) के तत्कालीन CEO नवनीत श्रीवास्तव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. CBI ने नवनीत श्रीवास्तव, मेसर्स विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और कंपनी के निदेशक को आरोपी बनाया है.
CBI के मुताबिक आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, सबूत नष्ट करने, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों को असली बताकर इस्तेमाल करने समेत भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धाराएं लगाई गई हैं. इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिश्वतखोरी, आपराधिक कदाचार और उकसाने से संबंधित अपराध भी लगाए गए हैं.
जांच में सामने आया कि CREST के CEO के पद पर रहते हुए नवनीत श्रीवास्तव ने अन्य आरोपियों के साथ कथित तौर पर आपराधिक साजिश रची और CREST के धन का दुरुपयोग किया. CBI का आरोप है कि सरकारी पद पर रहते हुए उन्होंने आपराधिक कदाचार किया और अवैध आर्थिक लाभ भी प्राप्त किया.
धोखाधड़ी की रकम करीब 75.4 करोड़ रुपये है
जांच एजेंसी के अनुसार नवनीत श्रीवास्तव की पत्नी जिस कंपनी की निदेशक हैं, उस मेसर्स विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड को भी मामले में आरोपी बनाया गया है. CBI का आरोप है कि कंपनी और उसके निदेशक ने कथित अपराध में सहयोग किया और आपराधिक साजिश का हिस्सा रहे. जांच के दौरान सामने आया कि धोखाधड़ी की रकम में से करीब 95 लाख रुपये इस कंपनी को प्राप्त हुए, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर अचल संपत्ति खरीदने में किया गया. CBI के अनुसार CREST से जुड़े इस मामले में कुल कथित धोखाधड़ी की रकम करीब 75.4 करोड़ रुपये है. मामले में नवनीत श्रीवास्तव को CBI पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.
चंडीगढ़ प्रशासन से CBI ने अपने हाथ में लिया था केस
CBI ने यह मामला चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से अपने हाथ में लिया था. इस चार्जशीट से पहले एजेंसी इस मामले में 13 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. यह मामला IDFC First Bank की चंडीगढ़ सेक्टर-32 शाखा में सामने आए बड़े बैंकिंग फ्रॉड से भी जुड़ा हुआ है. CBI के मुताबिक इसी व्यापक बैंकिंग धोखाधड़ी में हरियाणा सरकार के आठ विभागों और संगठनों से संबंधित करीब 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड को कथित तौर पर फर्जी और अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट तथा धोखाधड़ीपूर्ण डेबिट ट्रांजेक्शन के जरिए siphon off किया गया. हरियाणा से जुड़े इस मामले को भी CBI ने राज्य सरकार के अनुरोध पर स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो से अपने हाथ में लिया था. इस केस में CBI अब तक 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है.
स्मार्ट सिटी और नगर निगम से जुड़ा तीसरा केस भी CBI के पास
IDFC First Bank की सेक्टर-32 शाखा से जुड़े मामलों में CBI ने एक तीसरा केस भी अपने हाथ में लिया है. यह मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी/चंडीगढ़ नगर निगम के फंड से जुड़ा है. इस मामले में नगर निगम को करीब 78 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में CBI ने 7 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. CBI के मुताबिक CREST, हरियाणा सरकार के विभागों और चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़े तीनों मामलों की जांच अभी जारी है. एजेंसी फंड के पूरे ट्रेल का पता लगाने के साथ-साथ अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है.
CBI ने कहा है कि वह सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को कानून के दायरे में लाने और गबन की गई सरकारी रकम के पूरे मनी ट्रेल का पता लगाने के लिए प्रतिबद्ध है. जांच एजेंसी अपराध से अर्जित रकम और उससे खरीदी गई संपत्तियों समेत अन्य संभावित लाभों का भी पता लगा रही है.