world-news

2025 में जलवायु आपदाओं से लाखों बच्चों की शिक्षा बाधित

September 11, 2026

2025 में जलवायु आपदाओं से लाखों बच्चों की शिक्षा बाधित

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की बुधवार को जारी नई रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जलवायु आपदाओं के कारण दुनिया भर में लगभग 17 करोड़ 10 लाख छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई. मतलब ये कि प्री-स्कूल से हाई स्कूल तक के हर 10 छात्रों में से लगभग एक छात्र इससे प्रभावित हुआ.

तूफ़ान के कारण सबसे अधिक छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई और 10 करोड़ 90 लाख छात्र प्रभावित हुए. इसके बाद बाढ़ और तापलहरों का सबसे अधिक असर रहा.

इन आपदाओं के कारण लाखों छात्रों की कक्षाएँ स्थगित हुईं, स्कूलों को नुक़सान पहुँचा, ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ी, पढ़ाई का समय और स्कूल में उपस्थिति घटी तथा पढ़ाई बीच में छोड़ने का जोखिम बढ़ा.

पापुआ न्यू गिनी में ताउदीबुरा और उनके सहपाठियों को इस वर्ष और भी चरम मौसम का सामना करना पड़ सकता है. अल-नीनो के पहले से अधिक शक्तिशाली होने के कारण, आने वाले महीनों में चरम मौसम की घटनाओं का ख़तरा बढ़ने की आशंका है.

ताउदीबुरा ने बताया, “आमतौर पर पानी हमारे घुटनों तक आ जाता है और गड्ढे वाले शौचालय भर जाते हैं. इससे स्कूल में रहना सुरक्षित नहीं रहता और हमें अपनी पढ़ाई छोड़कर घर लौटना पड़ता है.”

निर्धनतम देशों पर सर्वाधिक असर

UNICEF के अनुसार, जलवायु आपदाओं से हर आय वर्ग के छात्र प्रभावित हुए, लेकिन प्रभावित छात्रों में लगभग तीन-चौथाई निम्न और निम्न-मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं. इन देशों की शिक्षा प्रणालियों के पास अक्सर जलवायु आपात स्थितियों के दौरान पढ़ाई जारी रखने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं होते.

उदाहरण के लिए, पाकिस्तान में अगस्त की भीषण मानसूनी बाढ़ के कारण 2 करोड़ 80 लाख से अधिक छात्रों की स्कूल वापसी में देरी हुई. यह 2025 में जलवायु आपदाओं से शिक्षा बाधित होने के सबसे बड़े मामलों में से एक था.

इसी तरह, मिस्र में अप्रैल में आए शक्तिशाली ख़मसीन धूल-भरे तूफ़ान के कारण पूरे देश में एक दिन के लिए कक्षाएँ स्थगित करनी पड़ीं. इससे भी 2 करोड़ 80 लाख से अधिक छात्र प्रभावित हुए.

लड़कियाँ सबसे अधिक प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु आपदाओं के कारण स्कूल बन्द होने या पढ़ाई बाधित होने पर लड़कों की तुलना में लड़कियों के स्कूल छोड़ने का ख़तरा अधिक होता है.

स्कूलों एवं स्वच्छता सुविधाओं को नुक़सान पहुँचने, परिवारों के विस्थापित होने और आमदनी घटने पर लड़कियों को अक्सर देखभाल व पानी लाने जैसी अतिरिक्त ज़िम्मेदारियाँ उठानी पड़ती हैं.

ऐसी परिस्थितियों में लड़कियों को बाल विवाह के लिए मजबूर किए जाने का ख़तरा भी बढ़ जाता है. इससे स्कूल दोबारा खुलने के बाद उनके लिए पढ़ाई में लौटना और मुश्किल हो सकता है.

दीर्घकालिक प्रभाव

UNICEF की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसैल ने कहा, “लाखों बच्चों के लिए जलवायु आपदाएँ केवल पढ़ाई में बाधा नहीं डालतीं. इनसे स्कूल तबाह हो जाते हैं, परिवार विस्थापित होते हैं और सबसे संवेदनशील बच्चे, विशेषकर लड़कियाँ, हमेशा के लिए स्कूल से दूर हो सकते हैं.”

रिपोर्ट के अनुसार, यदि ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो 2025 में जलवायु आपदाओं से जिन छात्रों की पढ़ाई बाधित हुई, उनकी जीवनभर की कमाई में कुल मिलाकर कम से कम 200 अरब डॉलर की कमी हो सकती है.

लम्बे समय में, पढ़ाई का नुक़सान होने और स्कूल छोड़ने की बढ़ती दर से लोगों की काम करने व कमाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है. इससे आर्थिक विकास धीमा पड़ सकता है और ग़रीबी कम करना भी मुश्किल हो सकता है.

UNICEF ने दुनिया भर की सरकारों से जलवायु आपदाओं का सामना करने में सक्षम शिक्षा प्रणालियों और बुनियादी ढाँचे में अधिक निवेश करने की अपील की है,

कैथरीन रसैल के अनुसार, इसका उद्देश्य “आज के बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा की रक्षा करना” है.