Ranchi Sadar Hospital: रांची सदर अस्पताल ने एक सराहनीय पहल करते हुए जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया. इसका उद्देश्य आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करना है.
Ranchi Sadar Hospital: रांची सदर अस्पताल ने एक सराहनीय पहल करते हुए जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया. इसका उद्देश्य आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करना है.
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Ranchi Sadar Hospital
Ranchi Sadar Hospital: रांची में स्वास्थ्य सेवाओं को केवल इलाज तक सीमित न रखते हुए अब लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए भी तैयार किया जा रहा है. इसी दिशा में रांची सदर अस्पताल ने एक सराहनीय पहल करते हुए जीवनरक्षक तकनीक सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया. इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आम नागरिकों और स्वास्थ्यकर्मियों को ऐसी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार करना था, जब किसी व्यक्ति की अचानक हृदय गति रुक जाए या उसे हार्ट अटैक आए.
सदर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग में आयोजित इस कार्यशाला में अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों के परिजनों और आम लोगों सहित 50 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया. प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने सीपीआर की वैज्ञानिक और व्यावहारिक विधि को आसान तरीके से समझाया और प्रतिभागियों को खुद अभ्यास भी कराया, ताकि जरूरत पड़ने पर वे बिना घबराए सही तकनीक का इस्तेमाल कर सकें.
कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश कुमार झा के मार्गदर्शन में किया गया. इस दौरान मेडिकल ऑफिसर डॉ. शुभम शेखर ने भी प्रतिभागियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि किसी व्यक्ति की सांस या दिल की धड़कन अचानक बंद होने पर शुरुआती कुछ मिनट सबसे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं. यदि इसी दौरान सही तरीके से सीपीआर दिया जाए, तो मरीज के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है.
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क्यों सीखना है जरुरी?
डॉ. राजेश कुमार झा ने कहा कि हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति में एंबुलेंस या डॉक्टर के पहुंचने का इंतजार करना हमेशा संभव नहीं होता. ऐसे समय में मौके पर मौजूद व्यक्ति यदि सीपीआर देना जानता हो, तो वह मरीज के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है. इसलिए हर नागरिक को इस तकनीक की बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है.
उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम केवल स्वास्थ्यकर्मियों के लिए ही नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी हैं. इससे लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और वे किसी भी आपात स्थिति में घबराने के बजाय आत्मविश्वास के साथ प्राथमिक सहायता दे सकेंगे. समय पर दी गई सही प्राथमिक चिकित्सा कई बार मरीज की जान बचाने में निर्णायक भूमिका निभाती है.
लोगों का जागरूक होना है जरुरी
अस्पताल प्रशासन का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए इलाज के साथ-साथ लोगों को जागरूक करना भी उतना ही जरूरी है. इसी सोच के तहत भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोग सीपीआर जैसी जीवनरक्षक तकनीक सीख सकें और जरूरत पड़ने पर दूसरों की मदद कर सकें.
डॉ. राजेश कुमार झा ने इस जनहितकारी पहल को सफल बनाने में सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार, उपाधीक्षक डॉ. बिमलेश सिंह तथा डॉ. अखिलेश कुमार झा के सहयोग की सराहना की. उन्होंने कहा कि सभी के संयुक्त प्रयास से यह प्रशिक्षण सफल रहा और आने वाले समय में इसे और व्यापक स्तर पर आयोजित करने की योजना है.
अस्पताल बना उदाहरण
रांची सदर अस्पताल की यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सही प्रशिक्षण और जागरूकता के माध्यम से आम नागरिकों को भी आपातकालीन परिस्थितियों में जीवनरक्षक की भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जा सकता है. यदि समाज में अधिक से अधिक लोग सीपीआर जैसी तकनीक सीख लें, तो सड़क दुर्घटनाओं, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी घटनाओं में समय रहते प्राथमिक सहायता देकर कई अनमोल जिंदगियां बचाई जा सकती हैं.
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