world-news

Court News : हाईकोर्ट ने पर्यटन विभाग के सचिव को किया तलब

September 21, 2026

Ranchi News : झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ के रजरप्पा मंदिर से जुड़े संजीव कुमार सिंह की अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर पर्यटन विभाग के सचिव को 29 सितंबर को सुनवाई में अदालत के समक्ष सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया है.  

इसे भी पढ़ें...

देश के पूर्व वित्त सचिव सुभाष गर्ग पर मुकदमा करेंगे सांसद निशिकांत दुबे
रांची विवि प्रशासन की लापरवाही : कुलसचिव को खुद नहीं पता किस विभाग में काम कर रहे हैं उनके कर्मचारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश उपस्थित हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि महाधिवक्ता किसी कारण से कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हो सके हैं.

कोर्ट ने जब उनसे पिछली सुनवाई के आदेश के आलोक में राज्य सरकार की ओर से उपलब्ध निर्देश के बारे में जानकारी मांगी, तो अपर महाधिवक्ता ने बताया कि उनके पास इस संबंध में कोई निर्देश उपलब्ध नहीं है. प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा. अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि अगली तारीख पर पर्यटन विभाग के सचिव स्वयं उपस्थित रहें. कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर निर्धारित की. 


दरअसल, मामले में पिछली सुनवाई में अदालत से एडवोकेट जनरल ने रजरप्पा मंदिर क्षेत्र के विकास के संबंध में सरकार से निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा था. कोर्ट ने उस दौरान कहा था कि पहले सरकार की ओर से रजरप्पा मंदिर के पुनरुद्धार के लिए राज्य संसाधनों से राशि की व्यवस्था करने की बात कही गयी थी और डीपीआर तैयार कराने के लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त किया गया.

अब सरकार केंद्र की ‘PRASAD’ योजना से वित्तीय सहायता लेने पर विचार कर रही है. अदालत ने सवाल उठाया था कि यदि शुरू से ही केंद्र की योजना से राशि लेने का विचार था, तो इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं दी गयी.

एडवोकेट जनरल ने बताया था PRASAD योजना का लिया जाएगा सहारा

एडवोकेट जनरल ने अदालत को बताया था कि केंद्र सरकार की PRASAD योजना के तहत वित्तीय सहायता लेने के लिए राज्य सरकार विचार कर रही है. इस पर अदालत ने सवाल उठाया था कि जब मंदिर विकास को लेकर पूर्व में पर्यटन विभाग के सचिव ने कोर्ट में राज्य सरकार की गंभीरता बतायी थी, तो उस समय केंद्र की योजना से सहायता लेने की बात क्यों नहीं बतायी गयी थी.

अदालत ने यह भी कहा था कि पर्यटन विभाग के सचिव के बयान के आधार पर कंसल्टेंट नियुक्त किया गया था. कंसल्टेंट ने डीपीआर तैयार की और उसे खुली अदालत में प्रस्तुत भी किया गया था. सचिव ने हलफनामे में कहा था कि कोर्ट के आदेश का अक्षरश: पालन करने और मंदिर के विकास के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद उचित राशि की व्यवस्था की जाएगी.

खंडपीठ ने सवाल उठाया था कि अब सरकार के रुख में बदलाव क्यों आया और यदि केंद्र की योजना से सहायता लेने का निर्णय विचाराधीन था, तो पहले की कार्यवाही में इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गयी.

Lagatar Media की यह खबर आपको कैसी लगी. नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में अपनी राय साझा करें.