सतना जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में शुक्रवार को स्कूल की दो छात्राओं की मौजूदगी में पोस्टमॉर्टम किए जाने का मामला सामने आया है। दोनों छात्राएं स्कूल यूनिफॉर्म में करीब पौने दो घंटे तक मॉर्चुरी में रहीं।
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इस दौरान मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर प्रतीक शुक्ला समेत चार लोग वहां मौजूद थे। छात्राओं को मॉर्चुरी में प्रवेश की अनुमति देने और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया दिखाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक शुक्रवार दोपहर करीब 1.45 बजे जिला अस्पताल की मॉर्चुरी में दुर्गेश पिता बेटू सिंह निवासी नरदहा, जिला पन्ना के कंकाल का परीक्षण शुरू हुआ। करीब 3.35 बजे टीम मॉर्चुरी से बाहर निकली।
5 तस्वीरें देखिए…

स्कूल यूनिफॉर्म में बैग लिए मॉर्चुरी में प्रवेश करती छात्रा।

तस्वीर में देखा जा सकता है कि बच्चियां मॉर्चुरी में मौजूद हैं।

मॉर्चुरी में मौजूद बच्चियों ने बाकायदा मास्क भी लगा रखा है।

दोनों बच्चियों के सामने ही डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम किया।

दोनों छात्राएं करीब पौने दो घंटे बाद मॉर्चुरी से बाहर निकलीं।
स्कूल प्रबंधन ने अनुमति देने से इनकार किया
एमएलबी स्कूल की प्राचार्य शीला सिंह ने बताया कि शनिवार को पीएससी परीक्षा के कारण शुक्रवार को स्कूल में हाफ डे था। स्कूल प्रबंधन ने किसी छात्रा को मॉर्चुरी जाने की अनुमति नहीं दी। अगर छात्राएं बिना अनुमति वहां गई हैं तो नियमानुसार कार्रवाई कर परिजन को सूचना दी जाएगी।
वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी ने भी बताया प्रतिबंधित क्षेत्र
पुलिस के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. महेंद्र सिंह ने कहा कि पोस्टमार्टम रूम प्रतिबंधित क्षेत्र होता है। बिना अनुमति किसी को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। यदि स्कूल की छात्राएं पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों के साथ वहां मौजूद थीं तो यह अनुचित है।
सीएमएचओ बोले- बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी नहीं हो सकती
सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि मॉर्चुरी में प्रशिक्षण का कोई शेड्यूल उनके यहां नहीं है। मेडिकल कॉलेज ही फोरेंसिक प्रशिक्षण से जुड़े नियम बता सकता है।
डॉ. शुक्ला के मुताबिक ड्यूटी स्टाफ के अलावा पोस्टमॉर्टम के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति मौजूद नहीं रह सकता। विशेष परिस्थितियों में मृतक के परिजन को अनुमति के आधार पर बुलाया जाता है।
डीन बोले- स्कूली बच्चों के प्रशिक्षण का कोई नियम नहीं
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. एसपी गर्ग ने कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है, जिसके तहत स्कूल के बच्चों को पोस्टमॉर्टम के दौरान प्रशिक्षण दिया जाए। एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं को भी अनुमति के बाद ही मॉर्चुरी में भेजा जाता है। अगर स्कूल के बच्चे वहां मौजूद रहे हैं, तो इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।
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