Published: Sunday, September 20, 2026, 18:14 [IST]
पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी के 'हिंदू कट्टरपंथ से खतरा'वाले बयान पर सियासी घमासान तेज हो गया है। हामिद अंसारी ने एक कार्यक्रम में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के पुराने कथन का हवाला देते हुए कहा था कि भारत के लिए खतरा साम्यवाद से नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता से है।
इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस बयान पर खुलकर जवाब दिया है।
CM योगी ने हामिद अंसारी पर क्या कहा?
ग्रेटर नोएडा में प्रेरणा विमर्श-2026 के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने हामिद अंसारी के बयान को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर रह चुके व्यक्ति से पद की गरिमा के मुताबिक सार्वजनिक आचरण की उम्मीद की जाती है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा,
"कुछ लोगों की फितरत होती है कि वे जिस पद पर रहते हैं, उसकी मर्यादा को बनाए नहीं रख पाते। पद की गरिमा के खिलाफ आचरण करना उनकी आदत बन जाती है।"
सीएम योगी ने हामिद अंसारी के बयान को भारत, भारतीयता, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के लिए डराने वाला बताया।
उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देने वाले लोगों की बातों का जवाब देना सामान्य तौर पर उचित नहीं लगता, लेकिन जब किसी बड़े संवैधानिक पद पर रह चुका व्यक्ति ऐसा बयान देता है तो उस पर चर्चा जरूरी हो जाती है।
योगी ने कहा,
"ऐसे बयानों के जरिए भारत की गलत छवि बनाने की कोशिश होती है। सनातन परंपरा को कोसना, उसे अपमानित करना और आतंकवाद से जोड़ना देश और समाज के लिए ठीक नहीं है।"
सीएम योगी ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति की निजी राय अलग हो सकती है। लेकिन जब कोई व्यक्ति देश के संवैधानिक पद पर रह चुका हो तो उससे देश की एकता और अखंडता के प्रति जिम्मेदारी की उम्मीद रहती है।
'भटके हुए लोग व्यवस्था में घुसकर...'
सीएम योगी आदित्यनाथ ने हामिद अंसारी के लिए 'भटका हुआ व्यक्ति' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग व्यवस्था का हिस्सा बनने के बाद भी भारत की तस्वीर को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश करते हैं।
उन्होंने कहा,
"जब ऐसे भटके हुए लोग भारत की व्यवस्था में घुसपैठ कर जाते हैं, तो वे देश की गलत छवि बनाने का प्रयास करते हैं। ऐसे बयानों से भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश होती है।"
यहां योगी की आपत्ति सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं रही। उन्होंने इसे संवैधानिक पद की मर्यादा, देश की एकता और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जोड़ दिया।
हामिद अंसारी ने आखिर क्या कहा था?
यह विवाद 19 सितंबर को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एजी नूरानी मेमोरियल लेक्चर के बाद शुरू हुआ। कार्यक्रम दिवंगत संविधान विशेषज्ञ और लेखक एजी नूरानी की स्मृति में रखा गया था।
हामिद अंसारी ने नूरानी की किताब 'The RSS: A Menace to India' का हवाला दिया। उन्होंने इस किताब की प्रस्तावना में दर्ज जवाहरलाल नेहरू की एक पुरानी टिप्पणी का जिक्र किया। अंसारी के मुताबिक, नेहरू ने भारत के सामने साम्यवाद के बजाय हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता को बड़ा खतरा बताया था।
हामिद अंसारी के बयान का सार था, "भारत के लिए खतरा साम्यवाद नहीं, बल्कि हिंदू दक्षिणपंथी सांप्रदायिकता है।" यानी अंसारी खुद यह बात अपने निजी आकलन के तौर पर पेश करने के बजाय नेहरू के पुराने कथन और एजी नूरानी की किताब के संदर्भ में रख रहे थे। यही संदर्भ इस पूरे विवाद को समझने के लिए अहम है।