By Oneindia Staff
Published: Saturday, September 19, 2026, 18:31 [IST]
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार (19 सितंबर) को पंजाब दौरे पर फतेहगढ़ साहिब पहुंचीं। यहां उन्होंने ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री ज्योति सरूप साहिब में माथा टेका और गुरु चरणों में अरदास की। इसके बाद वह भारतीय जनता पार्टी की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के दूसरे चरण में शामिल हुईं। इस चरण की शुरुआत फतेहगढ़ साहिब से की गई।
गुरुद्वारा साहिब में दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पंजाब की तरक्की, शांति और हर परिवार की खुशहाली की कामना की। उन्होंने वीर साहिबजादों और माता गुजरी जी की शहादत को नमन किया। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि फतेहगढ़ साहिब की धरती त्याग, साहस, तपस्या और धर्म के प्रति अटूट विश्वास की प्रेरणा देती है।
उन्होंने सभी लोगों के जीवन में सेवा, सत्य और सद्भाव का प्रकाश बने रहने की कामना की। साथ ही कहा कि वाहेगुरु जी की कृपा हर व्यक्ति पर बनी रहे।
'नशे के खिलाफ लड़ाई में पूरा देश पंजाब के साथ'
गुरुद्वारे में माथा टेकने के बाद रेखा गुप्ता ने कहा कि उन्होंने गुरु साहिब से पंजाब के लोगों को शक्ति देने की प्रार्थना की है, ताकि नशे के खिलाफ लड़ाई को मिलकर आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने पंजाब के युवाओं को सुरक्षित बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "पंजाब को नशे से बचाने की इस लड़ाई में पूरा देश उसके साथ खड़ा है।" इस मौके पर पंजाब भाजपा अध्यक्ष सरदार केवल सिंह ढिल्लों भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं ने फतेहगढ़ साहिब से 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के दूसरे चरण की शुरुआत की।
किन इलाकों से गुजरेगी नशा मुक्त पंजाब यात्रा?
भाजपा की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' की शुरुआत 18 सितंबर को हुई थी। पार्टी के कार्यक्रम के मुताबिक, यह यात्रा अलग-अलग चरणों में पंजाब के कई विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरेगी।
दूसरे चरण में समराला, पायल, खन्ना, अमलोह, बस्सी पठाना, डेरा बस्सी, एसएएस नगर, खरड़, चमकौर साहिब, रोपड़ और आनंदपुर साहिब समेत कई इलाके शामिल हैं। यात्रा के दौरान नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान और लोगों से जनसंपर्क किया जा रहा है। पंजाब में नशे का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का भी बड़ा हिस्सा बना हुआ है। अलग-अलग दल इस पर अपने दावे और आरोप सामने रख रहे हैं।
ज्योति सरूप साहिब का इतिहास क्या है?
फतेहगढ़ साहिब स्थित गुरुद्वारा श्री ज्योति सरूप साहिब सिख इतिहास में खास स्थान रखता है। जिला प्रशासन के आधिकारिक पोर्टल पर दी गई जानकारी के मुताबिक, इसी स्थान पर माता गुजरी जी और छोटे साहिबजादों, साहिबजादा फतेह सिंह तथा साहिबजादा जोरावर सिंह, के पार्थिव शरीरों का अंतिम संस्कार किया गया था। यही वजह है कि यह गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए गहरी आस्था और बलिदान की याद से जुड़ा हुआ है।